MP : माता-पिता का गर्व से ऊंचा हुआ सिर : मुरैना की बेटी नंदिनी ने देशभर में दर्ज किया पहला स्थान, घर में लगा बधाई देने वालों का तांता

मुरैना की पहचान जहां डाकुओं व बंदूकों की वजह से है। जहां आज भी लड़कियों को लड़कों से कमतर समझा जाता है। उनकी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया जाता है। उसी मुरैना की बेटी नंदिनी अग्रवाल ने देश की प्रतिष्ठित चार्टेंट एकाउंटेट(सीए) की परीक्षा में देश भर में पहला स्थान लाकर मुरैना का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया है। सोमवार को जारी हुए परिणाम में नंदिनी के साथ ही उसके भाई सचिन अग्रवाल ने भी देश भर में 18 वां स्थान लाकर नाम रोशन किया है।

मीडिया के दिए संक्षिप्त साक्षात्कार में नंदिनी अग्रवाल ने बताया कि बचपन से उसका सपना इच्छा सीए बनने का था। इसका कारण उनकी पारिवारिक पृष्ठिभूमि है। उनके पिता नरेशचन्द्र गुप्ता एक कर सलाहकार है मां डिंपल गुप्ता भी एकाउंट ग्रेजुएट हैं। इस सफलता को हांसिल करने के लिए उन्होंने दिन में 13 से 15 घंटे तक पढ़ाई की है। इसमें उनके माता-पिता ने पूरा सहयोग किया है।

शुरु से ही आर्टीकलशिप की

नंदिनी ने बताया कि उन्होंने सीए के एग्जाम की शुरुआत के साथ ही आर्टीकलशिप शुरु कर दी थी। आर्टीकलशिप के दौरान ही उन्होंने सारी क्लासेस भी खत्म कर ली थीं। आर्टीकलशिप के आखिरी महीनों में उन्होंने केवल रिवीजन किया था। यही वजह थी कि उनके इम्तहान पहुत अच्छे हुए थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने शुरु में 13 से 14 घंटे प्रतिदिन पढ़ाई की थी। आखिरी के महीनों में 10 से 11 घंटे ही पढ़ाई की थी। इससे उनका सिलेबस समय पर पूरा हो गया था।

सीए में अच्छी रैंक लाना मेरा सपना था

टॉपर नंदिनी अग्रवाल ने बताया कि सीए में अच्छी रैंक लाना मेरा सपना था। इसके लिए उनके माता पिता ने भी बहुत प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि जितने भी टॉपर्स आते हैं उनकी सफलता का मुख्य कारण उनकी प्रेरणा व फैमिली सपोर्ट रहता है। उन्हें इस बात का पूरा ख्याल रहता है कि हमें शत प्रतिशत प्रदर्शन करना है। यही सोच उन्हें टॉपर बनाती है

तैयारी करने वालों को दिए टिप्स

टॉपर नंदिनी अग्रवाल ने बताया कि जो सीए की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें आईसीआई का स्टडी मैटेरियल सबसे पहले पढ़ना चाहिए। सीए की बहुत सारी किताबें आती हैं, लेकिन उनमें स्टडी मैथ में फर्क होता है। अच्छे मार्क्स हमें तभी मिलते हैं जब हम स्टडी मैथ से पढ़ाई करते हैं। इसलिए हम सभी परीक्षार्थियों से कहना चाहेंगे कि वे स्टडी मैथ को सबसे अधिक रिकमंड करें। उन्होंने यह भी बताया कि अगर किसी की तैयारी शुरु से अच्छी चल रही है तो वह 11 से 12 घंटे पढ़ाई करे लेकिन अगर आपके पास केवल चार या पांच महीनें ही शेष बचे हैं तो आपको हर दिन 14 से 15 घंटे तैयारी करना पड़ेगी।

एक नजर नंदिनी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर

टॉपर नंदिनी अग्रवाल का जन्म 18 अक्टूबर 2021 को मुरैना में हुआ था। नंदिनी ने स्कूल की पढ़ाई मुरैना में ही की। उसके बाद उन्होंने 10 वीं की परीक्षा सेन्ट मैरी स्कूल मुरैना से वर्ष 2015 में 95 प्रतिशत अंको के साथ उत्तीर्ण की। वर्ष 2017 में हायर सेकेण्डरी परीक्षा मुरैना के विक्टर कान्वेंट स्कूल से 94 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। बीकॉम उन्होंने इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सटी, दिल्ली से वर्ष 2019 में किया है।

ऑडिट कंपनी में करतीं थीं हर दिन 10 से 11 घंटे काम

टॉपर नंदिनी अग्रवाल ने देश की शीर्ष स्तर की चार प्रमुख ऑडिट कंपनियों में एक PWC(प्राइस वॉटर हाउस कूपर्स) कंपनी में लगातार तीन साल काम किया है। वह बताती हैं कि देश में कुल चार ही टॉपर ऑडिट कंपनियां है। उनमें PWC, KPMG, ENY तथा DELOITTE हैं। उन्होंने बताया कि वे PWC आडिट कंपनी में औसतन 10 से 11 घंटे तक काम करती थीं। इसकी वजह से उनको सीए के इम्तहान की तैयारी के लिए अधिक समय नहीं मिलता था। वह हर दिन बामुश्किल डेढ़ से दो घंटे ही पढ़ाई कर पाती थीं। लेकिन उनके अन्दर यह हमेशा चाहत बनी रहती थी कि उन्हें टॉप करना है। उन्होंने सीए की प्रारंभिक परीक्षा वर्ष 2017 में दी थी।

मुख्यमंत्री व कन्द्रीय मंत्री ने दी बधाई

यहां बता दें, कि देश भर में मध्यप्रदेश का नाम ऊंचा करने वाली नंदिनी अग्रवाल को प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बधाई दी है। इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा ने ट्विटर पर संदेश भेजकर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि नंदिनी ने न केवल मुरैना बल्कि पूरे प्रदेश का नाम देश भर में रोशन किया है।

ऑनलॉइन की क्लॉसेस लेकिन सोशल मीडिया से बनाई दूरी

टॉपर नंदिनी अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने कोरोना कॉल के दौरान अधिकांश क्लासेस ऑनलाईन लीं, इसके बावजूद उन्होंने सोशल मीडिया से बराबर दूरी बनाकर रखी। उनका कहना है कि अगर आपको अपने उद्देश्य में सफल रहना है तो सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखना ही पड़ेगा।

बेटियों को आगे बढ़ने का मौका दें

नंदिनी की मां डिंपल गुप्ता ने दैनिक भास्कर के माध्यम से कहा कि हम जिले की माताओं से कहना चाहते हैं कि वे बेटियों को किसी से कमतर न समझें। उन्हें आगे बढ़ने का मौका दें। अगर उन्हें मौका दिया जाएगा तो वे नंदनी की तरह अपने माता-पिता का नाम रोशन करेंगी। पिता नरेश चन्द्र गुप्ता का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी को कभी भी आगे बढ़ने से नहीं रोका। वह स्वेच्छा से आगे बढ़ी और इतनी बड़ी सफलता हांसिल की।

सात महीनें की छुटि्टयों का किया उपयोग, प्लानिंग बनाकर की मेहनत

नंदिनी के भाई सचिन अग्रवाल ने दैनिक भॉस्कर को दिए संक्षिप्त साक्षात्कार में बताया कि उन्होंने प्लानिंग के साथ मेहनत की थी। उन्होंने बताया कि उनकी सात महीनें की छुटि्टयां थी। उन्होंने प्लानिंग करके शेड्यूल बनाया कि उन्हें किस तारीख को क्या पढ़ना है। उन्होंने बताया कि इसमें उनकी छोटी बहन नंदिनी का बहुत सहयोग मिला। उसने उनको बताया कि क्या सही था और क्या गलत था। उनकी सफलता के पीछे एक मुख्य उद्देश्य अनुशासन के साथ पूरी पढ़ाई करना था। जो भी समस्याएं थी, दोनों भाई-बहन ने एक साथ हल कीं। उनके मन में एक बात थी कि जो भी करना है वह कमाल करना है तथा अलग हटकर करना है, वही हमने किया। परीक्षार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने कहा कि जिन लोगों की फाइनेंस व एकाउंट में रुचि है वे जरूर इस फील्ड में आएं और देश की सेवा करें।

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