सुरक्षा में चूक, साजिश या लापरवाही ? सुरक्षा तार तार कौन जिम्मेदार? DGP और चीफ सेक्रेटरी पर गिरेगी गाज


PM मोदी की सुरक्षा चूक मामले में सेंट्रल होम मिनिस्ट्री ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में केंद्र कड़ा कदम उठा सकता है। राज्य के DGP और चीफ सेक्रेटरी पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग कर सकता है।

केंद्र अगर इस तरह का कदम उठाता है तो क्या यह संवैधानिक होगा? इस पर पूर्व DGP प्रकाश सिंह कहते हैं, ''केंद्र सीधी कार्रवाई नहीं कर सकता है। वह राज्य से DGP को बर्खास्त करने की मांग कर सकता है या फिर उसे दिल्ली बुलाने का फरमान जारी कर सकता है, लेकिन सब कुछ राज्य सरकार की सहमति के साथ होगा।''

वे कहते हैं, ''इस पूरे मामले में सड़क मार्ग में ट्रैफिक पर प्रधानमंत्री के फंसने की बात सामने आ रही है। कहीं न कहीं, राज्य पुलिस सवालों के घेरे में है। उसने वह रास्ता क्लीन क्यों नहीं करवाया? प्रोटेस्टर्स कैसे वहां पहुंच गए? लिहाजा DGP को केंद्र तलब कर सकता है। नोटिस भेज सकता है। DGP को दिल्ली भेजना है या नहीं, उसे बर्खास्त करना है या नहीं। यह निर्णय राज्य सरकार लेगी।''

तो क्या ममता की तरह चन्नी अपने अधिकारियों का करेंगे बचाव?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को पंजाब के फिरोजपुर में रैली करनी थी, लेकिन उनका काफिला करीब 20 मिनट तक फंसा रहा और उन्हें वापस लौटना पड़ा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को पंजाब के फिरोजपुर में रैली करनी थी, लेकिन उनका काफिला करीब 20 मिनट तक फंसा रहा और उन्हें वापस लौटना पड़ा।

पूर्व DGP प्रकाश सिंह कहते हैं कि यह तो राज्य सरकार और CM पर निर्भर करेगा। ममता ने अपने पूर्व सेक्रेटरी अलपन बंद्योपाध्याय को केंद्र के नोटिस के बावजूद दिल्ली नहीं भेजा था। पंजाब के CM अब इस पर क्या रुख अख्तियार करेंगे, ये तो उनका फैसला होगा, लेकिन सूत्र जैसा बता रहे हैं कि केंद्र DGP और चीफ सेक्रेटरी को नोटिस भेजकर दिल्ली तलब कर सकता है। अगर ऐसा हुआ और पंजाब सरकार अड़ी तो स्थिति बंगाल की ही तरह हो सकती है।

राज्य सरकार के साथ कांग्रेस पर भी केंद्र ने साधा निशाना

अमित शाह के बेहद करीबी सूत्रों के मुताबिक केंद्र इस मुद्दे पर राज्य सरकार को ही नहीं, बल्कि कांग्रेस की टॉप लीडरशिप को भी घेरने की तैयारी कर चुका है। अमित शाह ने तो सीधा इसे कांग्रेस निर्मित घटना बताते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने साफ कह दिया है कि जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।


इन 5 बिंदुओं पर केंद्र पंजाब सरकार और कांग्रेस पर खड़े करेगी बड़े सवाल

जब देश का एक राज्य PM की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं ले सकता तो फिर वह राज्य की सुरक्षा कैसे करेगा?
पंजाब की सीमा पाकिस्तान से लगती है। ऐसे में पंजाब की सुरक्षा पर यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करेगी।
कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता जिस तरह से ट्वीट कर रहे हैं, उससे उनकी मंशा साफ है कि देश की संवैधानिक संस्था, यानी PM की सुरक्षा उनके लिए गंभीर मुद्दा नहीं है।

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी एक साजिश की तरफ इशारा करती है।

किसानों का हुसैनीवाला में इकट्ठा होना और स्टेट पुलिस का सक्रिय न होना बताता है कि राजधानी में किसानों का आंदोलन कांग्रेस प्रायोजित था।

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक को लेकर पंजाब सरकार और पुलिस सवालों के घेरे में है। हालांकि मुख्यमंत्री चन्नी का कहना है कि PM सुरक्षित थे, 10 हजार जवान तैनात थे।

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक को लेकर पंजाब सरकार और पुलिस सवालों के घेरे में है। हालांकि मुख्यमंत्री चन्नी का कहना है कि PM सुरक्षित थे, 10 हजार जवान तैनात थे।

इससे पहले बंगाल में पूर्व चीफ सेक्रेटरी पर गिरी थी गाज

प. बंगाल के पूर्व सेक्रेटरी अलपन बंद्योपाध्याय पर केंद्र सख्ती कर चुका है। बंगाल में आए यास तूफान के बाद केंद्र की तरफ से समीक्षा के लिए PM की तरफ से बुलाई गई बैठक में न तो मुख्यमंत्री ही पहुंची थीं और न ही उस वक्त के चीफ सेक्रेटरी अल्पन बंद्योपाध्याय। इससे खफा होकर केंद्र ने दंडात्मक कार्रवाई करते हुए अलपन को तुरंत प्रभाव से दिल्ली बुलाया था। हालांकि उनका रिटायरमेंट कुछ ही महीनों के भीतर था।

ममता बनर्जी के वे खास थे। लिहाजा ममता ने उन्हें चीफ सेक्रेटरी पद से इस्तीफा दिलवाकर अपना सलाहकार नियुक्त कर दिया था। इस मामले में केंद्र और राज्य दोनों आमने-सामने आ गए थे। दरअसल, राज्य के अधिकारी को केंद्र नोटिस भेज सकता है। उसे बर्खास्त करने या फिर दिल्ली भेजने की मांग भी कर सकता है, लेकिन निर्णय राज्य का ही होगा। अलपन के खिलाफ अब भी केस चल रहा है।
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