MP Government Job Rules: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए 2 बच्चों की अनिवार्यता खत्म, कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव

 

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव करने जा रही है। प्रदेश में पिछले ढाई दशकों से लागू 'दो बच्चों' की अनिवार्य शर्त को अब समाप्त करने की तैयारी है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इसका विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट की बैठक में पेश किया जाएगा। इस फैसले के बाद, तीसरी संतान होने पर किसी भी कर्मचारी की सेवा समाप्त नहीं की जा सकेगी।

25 साल पुराना 'तीसरी संतान' नियम होगा खत्म
आपको बता दें कि यह कड़ा नियम साल 2001 में दिग्विजय सिंह सरकार के दौरान लागू किया गया था। तब 'सिविल सेवा नियम 1961' में संशोधन कर यह प्रावधान किया गया था कि 26 जनवरी 2001 के बाद यदि किसी कर्मचारी की तीसरी संतान होती है, तो वह सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जाएगा। अब 25 साल बाद इस नियम को अप्रासंगिक मानते हुए बदलने का निर्णय लिया गया है।

शिक्षकों के लिए संजीवनी: 30 हजार परिवारों को सीधा फायदा
इस नीतिगत बदलाव का सबसे व्यापक असर शिक्षा विभाग पर देखने को मिलेगा। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के लगभग 30,000 शिक्षक इस नियम की वजह से विभागीय कार्रवाई या नौकरी खोने के डर के साये में जी रहे थे। स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में ऐसे हजारों मामले लंबित हैं। सरकार के इस कदम से इन कर्मचारियों के करियर पर लगा 'खतरे का निशान' हमेशा के लिए हट जाएगा।

कैबिनेट की मुहर का इंतजार: प्रस्ताव तैयार
सूत्रों के हवाले से खबर है कि मुख्यमंत्री स्तर पर इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है। अब केवल कैबिनेट की औपचारिक मुहर लगना बाकी है। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही सामान्य प्रशासन विभाग अधिसूचना जारी कर देगा, जिससे कोर्ट और विभिन्न विभागों में चल रहे पुराने अनुशासनात्मक मामलों का भी निपटारा हो सकेगा।

क्यों बदला जा रहा है नियम?
इस नियम को हटाने के पीछे कई सामाजिक और राजनीतिक तर्क दिए जा रहे हैं:

  • जनसंख्या संतुलन: हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने घटती प्रजनन दर और जनसंख्या संतुलन पर चिंता जताई थी, जिसके बाद इस दिशा में विमर्श तेज हुआ।
  • पड़ोसी राज्यों का उदाहरण: राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने पहले ही इस तरह के प्रतिबंध हटा लिए हैं। आंध्र प्रदेश ने तो जनसंख्या बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन तक की बात कही है।
  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता: कई कर्मचारी संगठनों ने इसे निजी जीवन में हस्तक्षेप बताते हुए विरोध दर्ज कराया था।

कानूनी उलझनों से मिलेगी मुक्ति
सरकार के इस संवेदनशील फैसले से न केवल वर्तमान कर्मचारियों को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उन लोगों को भी राहत मिलेगी जो इस नियम के कारण वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम कर्मचारियों के प्रति एक उदारवादी दृष्टिकोण को दर्शाता है।