MP News : भोपाल समेत प्रदेश के तीन जिला अस्पतालों को मिली DNB/PG डिप्लोमा की 12 नई सीटें

 

नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने मध्यप्रदेश के तीन जिला अस्पतालों—भोपाल, शिवपुरी और रतलाम—को पोस्ट एमबीबीएस DNB/PG डिप्लोमा की 12 नई सीटों की मान्यता दी है। इससे राज्य में इन पाठ्यक्रमों की कुल सीटें 63 हो गई हैं। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाना है।

नई मान्यता प्राप्त सीटों का विवरण:

  • जिला अस्पताल, भोपाल: DGO (गायनेकोलॉजी) – 4 सीटें

  • जिला अस्पताल, शिवपुरी: DGO – 4 सीटें; DA (एनेस्थीसिया) – 2 सीटें

  • जिला अस्पताल, रतलाम: DO (नेत्र रोग) – 2 सीटें

प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार:

इन नई सीटों से युवा मेडिकल ग्रेजुएट्स को DNB और PG डिप्लोमा में प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा, जिससे प्रदेश में डॉक्टरों की कमी दूर होगी और उन्हें अपने गृह जिलों में ही सेवा देने का मौका मिलेगा। राज्य सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में हर जिला अस्पताल को उन्नत चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण केंद्र बनाना है। इस फैसले से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं केवल मेट्रो सिटीज तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि ग्रामीण अंचलों के लोगों को भी समान रूप से लाभ मिलेगा।

मरीजों को होने वाले लाभ:

  1. महिला रोग विशेषज्ञों की संख्या बढ़ेगी, जिससे प्रसव और महिलाओं से जुड़ी बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर संभव होगा।

  2. एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की उपलब्धता से जिला अस्पतालों में बड़ी सर्जरी संभव होगी।

  3. नेत्र रोग विशेषज्ञों की मौजूदगी से आंखों की बीमारियों की जांच और ऑपरेशन जिला स्तर पर संभव हो सकेगा।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल का बयान:

उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने इसे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक बड़ा सुधारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह मान्यता राज्य सरकार द्वारा जिला अस्पतालों में लगातार किए जा रहे बुनियादी ढांचे के सुधार, डॉक्टरों की नियुक्ति और प्रशिक्षण के प्रयासों का परिणाम है। उनका लक्ष्य है कि हर जिले में उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, जिससे आमजन को राहत मिले और रेफर सिस्टम पर निर्भरता कम हो।

इस पहल से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, बल्कि युवाओं को अपने ही जिले में विशेषज्ञ बनने का अवसर भी मिलेगा, जिससे राज्य में चिकित्सा क्षेत्र में समग्र विकास संभव होगा।