भारत का नंबर 1 टीचर: खान सर ने 107 करोड़ का ऑफर ठुकराकर रचा इतिहास!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) शिक्षा जगत में एक नाम जो पिछले कुछ वर्षों में भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में गूंजा है, वह है खान सर का। अपनी अनूठी शिक्षण शैली और छात्रों के प्रति समर्पण के लिए जाने जाने वाले, खान सर (जिनका असली नाम फैज़ल खान बताया जाता है) ने एक ऐसा काम किया है, जिसने लाखों लोगों को प्रेरित किया है। हाल ही में यह खबर सामने आई है कि उन्होंने एक बड़ी एडटेक (EdTech) कंपनी द्वारा दिए गए ₹107 करोड़ के भारी-भरकम ऑफर को ठुकरा दिया।
यह प्रस्ताव एक साधारण व्यावसायिक निर्णय नहीं था, बल्कि शिक्षा के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता की परीक्षा थी। इस कदम के पीछे उनका एकमात्र उद्देश्य यह था कि वे शिक्षा को सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं करना चाहते, बल्कि इसे हर उस बच्चे तक पहुंचाना चाहते हैं जो सीखने का सपना देखता है, भले ही उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। इस ऑफर को ठुकराकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि छात्रों का भविष्य और सस्ती शिक्षा उनके लिए पैसों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।
यह कहानी उस दौर में सामने आई है, जब एडटेक कंपनियां अरबों-खरबों का व्यापार कर रही हैं और शिक्षा को एक महंगा उत्पाद बना रही हैं। ऐसे में खान सर का यह फैसला उन सभी के लिए एक कड़ा संदेश है जो शिक्षा को सिर्फ मुनाफा कमाने का जरिया मानते हैं। उनकी इस कार्रवाई ने उन्हें न सिर्फ एक बेहतरीन शिक्षक के रूप में स्थापित किया है, बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता और एक सच्ची प्रेरणा के रूप में भी।
कौन हैं खान सर और क्यों हैं इतने लोकप्रिय?
खान सर, जिनका असली नाम फैज़ल खान है, बिहार की राजधानी पटना में 'खान जी.एस. रिसर्च सेंटर' नामक कोचिंग संस्थान चलाते हैं। उनका जन्म 1993 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ था। वह एक पूर्व सैनिक परिवार से आते हैं, उनके पिता एक सैनिक थे। उनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण उनकी अद्भुत शिक्षण शैली है। वे बेहद जटिल और कठिन विषयों को भी सरल, हास्यपूर्ण और मनोरंजक तरीके से समझाते हैं, जिससे छात्र आसानी से समझ जाते हैं।
उनके वीडियो लेक्चर्स यूट्यूब पर लाखों व्यूज पाते हैं। वे न केवल सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं, बल्कि छात्रों को देश-दुनिया की घटनाओं से भी जोड़ते हैं। उनकी भाषा और शैली इतनी सहज होती है कि कोई भी छात्र उनसे तुरंत जुड़ जाता है। उनका तरीका सिर्फ किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों में जिज्ञासा और सीखने की ललक पैदा करना है। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके यूट्यूब चैनल पर करोड़ों सब्सक्राइबर हैं।
उनकी लोकप्रियता का एक और बड़ा कारण यह है कि वे सिर्फ पढ़ाते नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं को समझते हैं। वे मानते हैं कि हर बच्चा अपनी आर्थिक स्थिति के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसी सोच ने उन्हें अपने संस्थान में बहुत ही कम फीस रखने के लिए प्रेरित किया, जो आज भी जारी है। उनका मानना है कि शिक्षा पर हर बच्चे का अधिकार है।
एडटेक कंपनियों के ऑफर और शिक्षा का बाजारीकरण
आजकल, एडटेक (एजुकेशनल टेक्नोलॉजी) उद्योग तेज़ी से बढ़ रहा है। बड़ी-बड़ी कंपनियां छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा देने के लिए करोड़ों-अरबों का निवेश कर रही हैं। इन कंपनियों का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को एक आकर्षक पैकेज बनाकर बेचना है। वे महंगे कोर्स बेचते हैं और कई बार छात्र आर्थिक बोझ के कारण इन सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाते।
ऐसे माहौल में खान सर का ₹107 करोड़ का ऑफर ठुकराना एक बेहद साहसिक कदम है। एक तरह से, यह शिक्षा के बाजारीकरण के खिलाफ एक मौन विरोध है। इस प्रस्ताव को स्वीकार करने पर, शायद उन्हें अपने पढ़ाने के तरीके और फीस के ढांचे में बदलाव करना पड़ता, जिससे उनके गरीब और मध्यमवर्गीय छात्र प्रभावित होते। खान सर ने पैसे की जगह अपने छात्रों की भलाई को चुना। उन्होंने यह साबित कर दिया कि शिक्षा एक सेवा है, न कि सिर्फ व्यापार।
छात्रों के लिए खान सर का समर्पण: एक प्रेरणादायक कहानी
खान सर का जीवन और उनका शिक्षण करियर छात्रों के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण है। वे अपने संस्थान में छात्रों से बहुत कम फीस लेते हैं, जो कई बार इतनी कम होती है कि वह केवल संस्थान के संचालन खर्च को ही कवर कर पाती है। उनका मानना है कि अगर कोई छात्र पैसे की कमी के कारण नहीं पढ़ पा रहा है, तो यह शिक्षा प्रणाली की असफलता है, न कि उस छात्र की।
उनकी कक्षाओं में हजारों छात्र एक साथ बैठते हैं और पढ़ते हैं। उनकी फीस इतनी कम है कि एक गरीब छात्र भी आसानी से तैयारी कर सकता है। खान सर ने अपनी कमाई को हमेशा छात्रों के हित में लगाया है, चाहे वह डिजिटल बोर्ड लगाना हो या फिर अपने यूट्यूब चैनल पर गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराना हो।
उनके लिए यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि एक मिशन है। एक मिशन जिसमें वे हर उस बच्चे को सशक्त बनाना चाहते हैं जो अपनी गरीबी के कारण सपने देखने से डरता है। उनका यह कार्य समाज के लिए एक बड़ा उदाहरण है और यह दिखाता है कि एक व्यक्ति अगर ठान ले, तो वह कितना बड़ा बदलाव ला सकता है।
खान सर के पढ़ाने का तरीका: कैसे करते हैं मुश्किल विषयों को आसान?
खान सर को उनकी पढ़ाने की अद्वितीय शैली के लिए जाना जाता है। वे जटिल विषयों को सरल, रोजमर्रा के उदाहरणों से जोड़ते हैं। जैसे, अगर वे इतिहास पढ़ा रहे हैं, तो वे उसे एक कहानी की तरह सुनाते हैं। यदि वे विज्ञान के सिद्धांत समझा रहे हैं, तो वे उन्हें आम जीवन से जोड़कर बताते हैं, जिससे छात्र उन्हें आसानी से याद रख पाते हैं।
उनकी कक्षाएं सिर्फ एक तरफा व्याख्यान नहीं होतीं, बल्कि इसमें छात्रों के साथ संवाद और हंसी-मजाक भी शामिल होता है। वे छात्रों के साथ ऐसे घुल-मिल जाते हैं, जैसे वे उनके बड़े भाई हों। यह तरीका छात्रों को सीखने में रुचि लेने के लिए प्रेरित करता है और उन्हें बोरियत महसूस नहीं होती। उनके इसी तरीके से लाखों छात्रों को फायदा हुआ है और वे प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हुए हैं।
खान सर के संस्थान: 'खान जी.एस. रिसर्च सेंटर'
'खान जी.एस. रिसर्च सेंटर' पटना में स्थित एक लोकप्रिय कोचिंग संस्थान है। यह संस्थान मुख्य रूप से विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं, जैसे कि एसएससी, रेलवे, यूपीएससी, बिहार पुलिस, आदि की तैयारी कराता है। यह संस्थान सिर्फ ईंट और मोर्टार का ढांचा नहीं है, बल्कि यह खान सर की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
यहां की फीस इतनी कम है कि गरीब से गरीब छात्र भी अपनी तैयारी कर सकता है। खान सर का लक्ष्य अपने संस्थान को एक व्यावसायिक इकाई के रूप में चलाने का नहीं है, बल्कि इसे एक ऐसे केंद्र के रूप में विकसित करना है, जहां हर किसी को समान रूप से शिक्षा मिल सके।
यह संस्थान केवल पटना के छात्रों तक ही सीमित नहीं है। खान सर के ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और यूट्यूब चैनल ने इस संस्थान को पूरे देश और दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचा दिया है।
भारत में शिक्षा का भविष्य और खान सर का योगदान
भारत में शिक्षा का भविष्य एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। एक तरफ एडटेक कंपनियां शिक्षा को आधुनिक बना रही हैं, वहीं दूसरी तरफ वे इसे एक महंगा उत्पाद भी बना रही हैं। ऐसे में खान सर जैसे शिक्षकों का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। वे एक संतुलन बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।
खान सर ने यह साबित किया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सस्ता भी बनाया जा सकता है। उनका कार्य भारत के शिक्षा क्षेत्र में एक नई दिशा दे रहा है, जो यह संदेश देता है कि शिक्षा को हर बच्चे के लिए सुलभ बनाना चाहिए। उनका यह निर्णय न केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह देश के उन लाखों छात्रों की उम्मीदों का प्रतीक है जो पैसों की कमी के कारण अपने सपने छोड़ देते हैं।