आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन: सुरों की मलिका ने दुनिया को कहा अलविदा

 

भारतीय पार्श्व गायन की दुनिया में अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक राज करने वाली आशा भोसले (Asha Bhosle) अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंबई के अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनकी आवाज ने न केवल भारतीय फिल्मों को नई पहचान दी, बल्कि पॉप, गजल और शास्त्रीय संगीत में भी नए आयाम स्थापित किए।

ब्रीच कैंडी अस्पताल में ली अंतिम सांस 
आशा ताई को शनिवार शाम को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआती खबरों के अनुसार उन्हें कार्डियक अरेस्ट और सीने में तकलीफ की शिकायत थी। हालांकि उनकी पोती जनाई भोसले ने प्रशंसकों को दिलासा देते हुए कहा था कि यह केवल थकान है, लेकिन रविवार दोपहर उनकी स्थिति बिगड़ी और उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके बेटे आनंद भोसले ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की है।

9 साल की उम्र से शुरू हुआ संघर्षपूर्ण सफर 
आशा भोसले का जन्म प्रसिद्ध कलाकार दीनानाथ मंगेशकर के घर हुआ था। जब वह मात्र 9 वर्ष की थीं, तब उनके पिता का साया सिर से उठ गया। परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए आशा और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने कम उम्र में ही गाना शुरू कर दिया था। लता जी जहाँ अपनी सादगी और सुरीली आवाज के लिए जानी जाती थीं, वहीं आशा जी ने वर्सटैलिटी (बहुमुखी प्रतिभा) को अपना हथियार बनाया।

निजी जीवन के उतार-चढ़ाव और घरेलू हिंसा का दर्द 
आशा जी का जीवन जितना चमक-धमक भरा पर्दे पर दिखता था, पर्दे के पीछे उतना ही संघर्षपूर्ण था। मात्र 16 साल की उम्र में उन्होंने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर अपनी बड़ी बहन के सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से शादी कर ली। इस फैसले के कारण मंगेशकर परिवार ने उनसे नाता तोड़ लिया था। शादी के बाद उन्हें गंभीर घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। 1960 में, वह अपने तीन बच्चों के साथ पति का घर छोड़कर वापस आ गईं।

आरडी बर्मन और आशा की अनकही प्रेम कहानी
जीवन के अंधेरे मोड़ पर उनकी मुलाकात संगीतकार आरडी बर्मन (पंचम दा) से हुई। 'तीसरी मंजिल' फिल्म के दौरान उनकी दोस्ती गहरी हुई। जब बर्मन ने शादी का प्रस्ताव रखा, तो उनकी मां इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थीं। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि यह शादी "मेरी लाश पर होगी"। हालांकि, तमाम बाधाओं के बावजूद दोनों ने 1980 में शादी की और संगीत की दुनिया में "पावर कपल" के रूप में उभरे।

संगीत जगत में आशा जी का अतुलनीय योगदान 
आशा भोसले ने अपने करियर में 12,000 से अधिक गाने गाए हैं।

कैबरे नंबर्स: "पिया तू अब तो आजा", "ओ हसीना जुल्फों वाली"।
रोमांटिक गाने: "चुरा लिया है तुमने जो दिल को", "दो लफ्जों की है दिल की कहानी"।

क्लासिकल: "इन आंखों की मस्ती के"।
उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सबसे अधिक स्टूडियो रिकॉर्डिंग करने वाली कलाकार के रूप में दर्ज है।

अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार का समय 
आनंद भोसले के अनुसार, आशा जी के पार्थिव शरीर को कल सुबह 11 बजे उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। संगीत प्रेमी और बॉलीवुड की हस्तियां उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचेंगी। उनका अंतिम संस्कार कल शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की संभावना है।