32 केस, 1 गैंगस्टर और एक तालाब: क्या पुलिस ने सचमुच किया 'एनकाउंटर' या डूबकर मरा सलमान लाला?

 
इंदौर के कुख्यात अपराधी सलमान लाला का शव सीहोर में मिला, पुलिस ने बताई डूबने से मौत, परिजनों ने लगाए हिरासत में हत्या के आरोप |

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) इंदौर के अपराध जगत में दहशत का पर्याय बन चुका गैंगस्टर सलमान लाला अब खुद एक रहस्यमयी मौत का शिकार हो गया है। रविवार को उसका शव सीहोर जिले में इंदौर-भोपाल हाईवे के पास एक पानी से भरे गड्ढे में पाया गया। इस मौत ने न सिर्फ पुलिस और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि एक ही घटना के दो बिल्कुल अलग-अलग दावों को भी जन्म दिया है: एक तरफ पुलिस का बयान, तो दूसरी ओर परिजनों के गंभीर आरोप। सलमान पर हत्या के प्रयास, एनडीपीएस एक्ट और अन्य संगीन जुर्मों सहित 32 से ज्यादा मामले दर्ज थे। उसकी मौत ने इस पूरे मामले को एक जटिल पहेली बना दिया है।

पुलिस का दावा: फरार होने की कोशिश में हुआ हादसा
इस मामले में क्राइम ब्रांच के अधिकारियों की कहानी कुछ और ही कहती है। पुलिस के अनुसार, सलमान लाला ड्रग्स से जुड़े एक मामले में फरार था और पुलिस को कई दिनों से उसकी तलाश थी। एक पुख्ता सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच की एक टीम उसका पीछा कर रही थी। जानकारी मिली थी कि वह अपनी जमानत पर छूटे भाई को लेने के लिए स्कॉर्पियो से सागर गया था।

पुलिस का दावा है कि रविवार देर रात करीब 2 बजे सलमान ने अपनी स्कॉर्पियो को सीहोर के पास एक तालाब के नजदीक रोका। जैसे ही पुलिस के जवान उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़े, सलमान ने अंधेरे का फायदा उठाकर छलांग लगा दी। पुलिस को लगा कि वह भाग गया है, लेकिन जब दो दिन तक उसकी तलाश के बाद भी वह नहीं मिला, तो रविवार दोपहर उसका शव पानी के ऊपर आ गया। पुलिस ने इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना बताते हुए कहा कि भागने की कोशिश में उसकी डूबने से मौत हो गई।

क्या पुलिस हिरासत में मौत एक अपराध है? 
पुलिस हिरासत में हुई किसी भी मौत को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। भारतीय कानून के तहत, पुलिस की यह जिम्मेदारी है कि वह हिरासत में लिए गए व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करे। अगर हिरासत में मौत होती है, तो इसे अक्सर मानवाधिकारों का उल्लंघन माना जाता है और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है।

परिजनों का पलटवार: "वह डूबा नहीं, उसे मारा गया"
सलमान की मौत की खबर सुनते ही उसके परिजन और समर्थक भोपाल के हमीदिया अस्पताल पहुँच गए। वहाँ, उन्होंने पुलिस के दावों को पूरी तरह से नकार दिया। सलमान के परिजनों ने एक वीडियो भी जारी किया जिसमें वह समुद्र में तैरते हुए दिख रहा है। इस वीडियो को दिखाते हुए उसके चाचा ने जोर देकर कहा, "वह एक कुशल तैराक था, जो किसी छोटे से पानी के गड्ढे में डूबकर नहीं मर सकता।"

परिजनों का सीधा आरोप है कि पुलिस ने सलमान को पकड़ा और फिर उसे हिरासत में मार डाला। उनका कहना है कि पुलिस अपनी इस कार्रवाई पर पर्दा डालने के लिए मनगढ़ंत कहानी बना रही है। इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप ने इस केस को एक संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहाँ सच का पता लगाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

पुलिस को उस पर क्यों शक था?
सलमान लाला अपने आपराधिक रिकॉर्ड के कारण पुलिस की नजर में था। वह पुलिस पर हमला करने में भी हिचकिचाता नहीं था। कुछ समय पहले उसने खजराना में क्राइम ब्रांच के एक एसआई पर पिस्टल तान दी थी, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस के पास इस बात की पक्की जानकारी थी कि उसकी स्कॉर्पियो में अवैध हथियार हो सकते हैं, इसलिए वे उसे रोकने से भी डर रहे थे।

खौफ का डिजिटल साम्राज्य: सोशल मीडिया पर था दबदबा
सलमान लाला ने अपनी आपराधिक गतिविधियों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी अपना एक अलग तरह का दबदबा बना रखा था। उसने उज्जैन के कुख्यात गैंगस्टर दुर्लभ कश्यप की तरह ही एक डिजिटल नेटवर्क खड़ा कर रखा था। उसकी करीब 20 से ज्यादा फर्जी इंस्टाग्राम आईडी उसके साथियों द्वारा चलाई जाती थीं, जिनका उपयोग उसे गैंगस्टर के रूप में महिमामंडित करने के लिए होता था। इन आईडी पर पुलिस हिरासत और आपराधिक गतिविधियों के वीडियो पोस्ट किए जाते थे, ताकि उसके नाम का खौफ आम लोगों के बीच बना रहे।

डेढ़ साल पहले उसने एमआईजी इलाके में एक युवक को नग्न कर बुरी तरह पीटा था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। यह दर्शाता है कि वह अपराध को सिर्फ अंजाम नहीं देता था, बल्कि उसका प्रचार-प्रसार भी करता था।

वह दुर्लभ कश्यप की तरह क्यों था?
दुर्लभ कश्यप की तरह ही सलमान लाला भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी आपराधिक छवि को चमकाने के लिए करता था। दोनों ने ही युवाओं का एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया था, जो उनके अपराधों को सोशल मीडिया पर वायरल करता था। यह आधुनिक अपराधियों की एक नई प्रवृत्ति है, जहाँ वे सिर्फ अपराध नहीं करते, बल्कि उसे 'ग्लैमराइज़' भी करते हैं।

अंतिम संस्कार के समय हंगामा: तनावपूर्ण माहौल
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में जब सलमान के शव का पोस्टमार्टम हुआ, तो उसके समर्थकों और परिजनों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस भीड़ ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और हंगामा किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा। यह भीड़ और प्रदर्शन यह साबित करता है कि सलमान का प्रभाव केवल अपराध की दुनिया तक सीमित नहीं था, बल्कि उसके समर्थक भी बड़ी संख्या में थे।

सलमान लाला की मौत एक गंभीर मुद्दा है, जिसमें पुलिस के दावों और परिजनों के आरोपों में भारी अंतर है। यह मामला निष्पक्ष जांच की मांग करता है, ताकि सच सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो सके।