"मऊगंज में आर-पार के मूड में 'बन्ना'! कार्यकर्ताओं के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव, प्रशासन को दी खुली चेतावनी
ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के नवनिर्मित जिले मऊगंज में बुनियादी समस्याओं और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। स्थानीय जनता की आवाज को बुलंद करते हुए पूर्व कांग्रेस विधायक सुखेंद्र सिंह 'बन्ना' के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सोमवार को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। मऊगंज जिले के गठन के बाद से ही विकास कार्यों की गति और कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर रहा है, लेकिन इस बार का प्रदर्शन सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र को एक खुली चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना अपने समर्थकों और जमीनी कार्यकर्ताओं के हुजूम के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने नवगठित जिले के कलेक्टर संजय जैन और पुलिस अधीक्षक (SP) सुरेंद्र जैन से मुलाकात कर जनसमस्याओं से जुड़ा एक विस्तृत मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा। इस दौरान बन्ना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिला प्रशासन फाइलों से बाहर निकलकर धरातल पर काम करे, अन्यथा कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया कि यदि तय समय सीमा के भीतर इन जनहित के मुद्दों का निराकरण नहीं किया गया, तो पूरी मऊगंज विधानसभा और जिला क्षेत्र में चक्काजाम और उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह शासन की होगी।
NH-135 बना मौत का हाईवे: बराव बाईपास और मोटवा पहाड़ी को ब्लैक स्पॉट घोषित करने की मांग
इस पूरे विरोध प्रदर्शन के केंद्र में मऊगंज-हनुमना मार्ग (National Highway 135) की बदहाल यातायात व्यवस्था और लगातार हो रही मासूमों की मौतें थीं। पूर्व विधायक बन्ना ने कलेक्ट्रेट के सामने इस मुद्दे को बेहद आक्रामकता से उठाया। उन्होंने कहा कि एनएच-135 इस समय रीवा संभाग का सबसे खतरनाक मार्ग साबित हो रहा है, जहां तेज रफ्तार वाहनों और त्रुटिपूर्ण इंजीनियरिंग के कारण आए दिन भीषण सड़क हादसे हो रहे हैं।
बिजली संकट, जर्जर तार और अवैध शराब का कारोबार: पुलिस-आबकारी पर उठे सवाल
प्रशासनिक विफलता की सूची में दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा जिले के ग्रामीण अंचलों में फैला बिजली संकट और कानून व्यवस्था का रहा। पूर्व विधायक ने आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मऊगंज और हनुमना के ग्रामीण इलाकों में अवैध मदिरा (शराब) की बिक्री कुटीर उद्योग की तरह फल-फूल रही है, जिससे युवा पीढ़ी गर्त में जा रही है और घरेलू हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं। पुलिस सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बनी हुई है।
वहीं दूसरी ओर, भीषण गर्मी और आने वाले मानूसन के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। कृषि और घरेलू उपयोग के लिए मिलने वाली बिजली की कोई निश्चित समय-सारणी नहीं है। बन्ना ने ध्यान आकर्षित कराया कि खेतों और गांवों के ऊपर से गुजरने वाली बिजली की लाइनें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं। कई गांवों में फूके हुए (खराब) ट्रांसफार्मर महीनों से नहीं बदले गए हैं, जिससे पूरी की पूरी पंचायतें अंधेरे में डूबी हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि जर्जर तारों को तत्काल बदला जाए और खराब ट्रांसफार्मरों को 48 घंटे के भीतर बदलने की व्यवस्था सुचारू की जाए।
बरसात से पहले नालियों की सफाई और वार्ड 11 के विस्थापितों को मुआवजे की मांग
शहरी और अर्ध-शहरी बुनियादी ढांचे की पोल खोलते हुए पूर्व विधायक ने नगर परिषद मऊगंज की कार्यशैली पर भी तीखा प्रहार किया। मानसून के ठीक मुहाने पर खड़े होने के बावजूद मऊगंज और हनुमना नगर की मुख्य नालियों और जल निकासी प्रणालियों (Drainage System) की सफाई नहीं की गई है। बन्ना ने चेतावनी दी कि यदि पहली ही बारिश में नालियां चोक होने से शहरी इलाकों और रिहायशी बस्तियों में जलभराव हुआ, तो इसके लिए सीधे तौर पर नगर परिषद के अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
पंचायतों में विकास कार्य ठप: 15वें वित्त आयोग की राशि पर प्रशासनिक अड़ंगा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पंचायती राज व्यवस्था को लेकर भी कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान गहरी चिंता व्यक्त की गई। पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना ने प्रशासनिक नौकरशाही पर विकास कार्यों को अवरुद्ध करने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मऊगंज जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में सरपंच और सचिव लाचार महसूस कर रहे हैं क्योंकि 15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission) के अंतर्गत मिलने वाली विकास राशि का प्रशासनिक अप्रूवल और तकनीकी स्वीकृति जानबूझकर जिला स्तर पर अटका कर रखी गई है।
इस फंड के रुकने के कारण गांवों में सीसी रोड, पुलिया निर्माण, सामुदायिक भवनों की मरम्मत और स्वच्छता से जुड़े बुनियादी काम पूरी तरह ठप पड़े हैं। मनरेगा के मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन की स्थिति बन रही है। बन्ना ने कलेक्टर संजय जैन से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि पंचायतों के विकास कार्यों की फाइलों को तुरंत क्लीयरेंस दिया जाए ताकि ग्रामीण विकास की गति न रुके।
सियासी पारा गर्म: मुख्यमंत्री मोहन यादव के बयान पर बन्ना का तीखा पलटवार
ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह 'बन्ना' ने इस प्रशासनिक आंदोलन को एक बड़ा राजनीतिक मोड़ दे दिया। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के संदर्भ में हाल ही में दिए गए एक विवादास्पद बयान की कड़े शब्दों में निंदा की।
बन्ना ने कहा कि मुख्यमंत्री जैसे गरिमामय और संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को राजनीतिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। मुख्य विपक्षी दल के अध्यक्ष पर की गई टिप्पणी अशोभनीय है और इसके लिए मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से मध्य प्रदेश की जनता और कांग्रेस नेतृत्व से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं का यह आक्रोश केवल मऊगंज की स्थानीय समस्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यदि वैचारिक और राजनीतिक रूप से विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया, तो भोपाल से लेकर मऊगंज की सड़कों तक एक व्यापक और ऐतिहासिक आंदोलन खड़ा किया जाएगा।