"साहब! डॉक्टर बनेंगे या धरने पर बैठेंगे?" NEET रद्द होने से देशभर में मचा कोहराम, छात्र सड़कों पर

 

भारत के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का जरिया बनी NEET UG 2026 परीक्षा एक बार फिर विवादों के घेरे में आकर रद्द हो गई है। पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा निरस्त करने का कड़ा फैसला लिया है। इस फैसले ने देशभर के उन 23 लाख छात्रों को गहरा सदमा दिया है, जो दिन-रात एक कर डॉक्टर बनने का सपना देख रहे थे।

'गेस पेपर' के नाम पर बिका असली प्रश्नपत्र; राजस्थान से पहली गिरफ्तारी
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पेपर लीक का जाल कई राज्यों में फैला हुआ था। केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सोशल मीडिया के माध्यम से प्रश्नपत्रों को 'गेस पेपर' बताकर सर्कुलेट किया गया था। जब मिलान किया गया, तो ये सवाल हूबहू मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खा गए। राजस्थान पुलिस ने इस सिलसिले में शुभम खैरनार नामक युवक को गिरफ्तार किया है, जिससे पूछताछ में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

CBI को सौंपी गई कमान; एनटीए की विश्वसनीयता पर उठते सवाल
परीक्षा की गोपनीयता भंग होने के बाद केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI जांच के आदेश दे दिए हैं। छात्रों का आरोप है कि एनटीए जैसी बड़ी संस्था बार-बार परीक्षा की सुचिता बनाए रखने में विफल साबित हो रही है। सड़कों पर उतरे आक्रोशित छात्रों का कहना है कि यह केवल पेपर लीक नहीं, बल्कि उनके संघर्षों का कत्ल है।

दोबारा परीक्षा के लिए नहीं देनी होगी फीस; पुराने सेंटर ही होंगे मान्य
लाखों छात्रों की आर्थिक स्थिति और मानसिक परेशानी को देखते हुए एनटीए ने कुछ राहत भरी घोषणाएं भी की हैं:

कोई नया रजिस्ट्रेशन नहीं: जो छात्र पहले आवेदन कर चुके हैं, उन्हें दोबारा फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी।
फीस की माफी: दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
वही केंद्र और पात्रता: पुराने एडमिट कार्ड और परीक्षा केंद्र ही दोबारा परीक्षा के लिए मान्य किए जा सकते हैं, ताकि छात्रों को भागदौड़ न करनी पड़े।

विपक्ष के निशाने पर सरकार: "एक परीक्षा तक नहीं करा पा रहे?"
नीट घोटाले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। विपक्षी दलों ने सरकार की घेराबंदी करते हुए इसे "भविष्य का घोटाला" करार दिया है। नेताओं का कहना है कि साल-दर-साल पेपर लीक होना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है और दोषियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।