रीवा-मऊगंज में दवाइयों की महा-किल्लत: ई-फार्मेसी के खिलाफ 2880 मेडिकल स्टोर्स बंद, सांसों की डोर थामने वाली जरूरी खबरें
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। ऑनलाइन ई-फार्मेसी कंपनियों की मनमानी और बिना डॉक्टर के पर्चे के धड़ल्ले से बेची जा रही दवाओं के विरोध में देश के दवा विक्रेता संघ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। इसी कड़ी में रीवा और मऊगंज जिलों की 2880 निजी दवा दुकानें एक साथ बंद की जा रही हैं। बुधवार की रात 12 बजे से शुरू होने वाली यह बंदी लगातार अगले 30 घंटों तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद दुकानें सीधे गुरुवार की सुबह नियमित समय पर खुलेंगी। इस दौरान निजी बाजारों में एक टैबलेट मिलना भी नामुमकिन हो जाएगा।
ई-फार्मेसी के खिलाफ क्यों भड़का दवा विक्रेताओं का गुस्सा?
स्थानीय दवा दुकानदारों और केमिस्ट एसोसिएशन का आरोप है कि ऑनलाइन दवा बेचने वाली कंपनियाँ (E-Pharmacies) न केवल उनके पारंपरिक व्यापार को चौपट कर रही हैं, बल्कि देश के स्वास्थ्य नियमों के साथ भी खिलवाड़ कर रही हैं।
हड़ताल के मुख्य कारण:
नियमों का दोहरा मापदंड: जमीन पर दुकान चलाने वाले छोटे रिटेलरों को ड्रग लाइसेंस बनाए रखने के लिए दर्जनों कागजी कार्रवाइयों, फार्मासिस्ट की अनिवार्य मौजूदगी और कड़े नियमों का पालन करना होता है। इसके विपरीत, ऑनलाइन कंपनियों पर ऐसी कोई कड़ी बाध्यता नहीं दिखती।
प्रतिबंधित दवाओं की अवैध होम डिलीवरी: दवा दुकानदारों का कहना है कि ई-फार्मेसी के जरिए ऐसी नशीली या प्रतिबंधित दवाएं भी आसानी से लोगों के घरों तक पहुंच रही हैं, जिन्हें कोई भी जिम्मेदार दुकानदार बिना डॉक्टर के ओरिजिनल पर्चे के कभी नहीं बेचता। इससे युवाओं में नशे की लत और गलत दवाओं के सेवन का खतरा बढ़ गया है।
बंदी के दौरान कहाँ मिलेंगी दवाइयाँ? इन दो जगहों को मिली बड़ी राहत
इस विशाल हड़ताल से आम जनता पूरी तरह बेमौत न मरे, इसके लिए केवल सरकारी व्यवस्था और दो चुनिंदा केंद्रों को चालू रखने की अनुमति दी गई है। सरकारी अस्पतालों के अंदरूनी दवा काउंटरों को छोड़कर, खुले बाजार में केवल इन दो जगहों से दवा ली जा सकेगी:
- संजय गांधी अस्पताल परिसर स्थित रेडक्रॉस केंद्र (Red Cross)
- संजय गांधी अस्पताल परिसर का पीएम जन औषधि केंद्र (PM Jan Aushadhi Kendra)
- इन दोनों सरकारी व अर्ध-सरकारी राहत केंद्रों को बंद के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है, ताकि रीवा और मऊगंज आने वाले गंभीर मरीजों को जीवन रक्षक दवाएं मिलती रहें।
आपातकालीन बैकअप प्लान: क्या मेडिकल स्टोर मालिक बिल्कुल मदद नहीं करेंगे?
दवा विक्रेता संघ ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य सरकार की नीतियों का विरोध करना है, न कि किसी बेकसूर की जान लेना।
"यदि किसी मरीज की हालत अत्यंत नाजुक है, वह वेंटिलेटर या आईसीयू सपोर्ट पर है, और उसे कोई ऐसी इमरजेंसी दवा चाहिए जो सरकारी केंद्रों पर नहीं मिल रही है, तो मानवीय आधार पर दवा दुकानदार विशेष रूप से अपनी दुकान का शटर खोलकर मरीज के परिजनों को दवा उपलब्ध कराएंगे।"
कलेक्ट्रेट का घेराव: कलेक्टर को सौंपा जाएगा ज्ञापन
दवा विक्रेता संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष तरुणेन्द्र सिंह ने रणनीति साझा करते हुए बताया कि बुधवार की रात से ही पूर्ण बंदी प्रभावी हो जाएगी। इसके बाद गुरुवार की सुबह रीवा और मऊगंज के सभी दवा विक्रेता व मेडिकल स्टोर संचालक इंदिरा मार्केट में एकत्रित होंगे। वहाँ केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। इसके पश्चात शाम को सभी पदाधिकारियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट कार्यालय कूच करेगा और रीवा कलेक्टर से मुलाकात कर ई-फार्मेसी पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग का ज्ञापन सौंपेगा।