अपर कलेक्टर सपना त्रिपाठी का अल्टीमेटम; रीवा में खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर डिफाल्टरों के प्रतिष्ठान सीलिंग के साथ लाइसेंस होंगे निरस्त

 
रीवा में खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर प्रशासन सख्त। अपर कलेक्टर सपना त्रिपाठी ने 181 मामलों में लगाया भारी जुर्माना, डिफाल्टरों की दुकानें होंगी बंद।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिला प्रशासन ने जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले और खाद्य पदार्थों की शुद्धता से समझौता करने वाले व्यवसायियों के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जिले में मिलावटखोरी के मामलों में जिन दुकानदारों और प्रतिष्ठानों पर आर्थिक दंड लगाया गया था, यदि उन्होंने तय समय सीमा के भीतर उस राशि को सरकारी कोष में जमा नहीं किया, तो उनके व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को हमेशा के लिए सील (तालाबंदी) कर दिया जाएगा।

विंध्य क्षेत्र में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और नकली व दूषित खाद्य सामग्रियों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रशासन लंबे समय से अभियान चला रहा है। इसी सिलसिले में न्यायालयीन प्रक्रियाओं को तेज करते हुए कई बड़े फैसले सुनाए गए हैं। लेकिन देखने में आया है कि कई रसूखदार और छोटे-बड़े व्यापारी अदालती आदेशों के बाद भी जुर्माने की रकम जमा करने में ढिलाई बरत रहे हैं। इस प्रशासनिक सुस्ती और व्यापारियों की मनमानी को समाप्त करने के लिए अब सीधे जब्ती और सीलिंग की कार्रवाई का आदेश जारी हो चुका है।

खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत 181 मामलों का निपटारा कैसे किया गया?
रीवा जिले की अपर कलेक्टर एवं न्याय निर्णायक अधिकारी सपना त्रिपाठी की अदालत ने एक लंबी और विस्तृत न्यायिक प्रक्रिया के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत लंबित पड़े मामलों पर ऐतिहासिक फैसले दिए हैं। फरवरी 2024 से लेकर जून 2026 तक की अवधि के बीच, विभाग द्वारा दर्ज किए गए कुल 181 मामलों की गहन समीक्षा की गई। इन सभी मामलों में खाद्य पदार्थों के नमूने (सैंपल) अमानक, दूषित या प्रतिबंधित पाए गए थे।

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और प्रयोगशाला की रिपोर्टों का मिलान करने के बाद, न्याय निर्णायक अधिकारी सपना त्रिपाठी ने दोषियों पर कुल 41 लाख 60 हजार रुपये का तगड़ा आर्थिक दंड (जुर्माना) अधिरोपित किया। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि मुनाफाखोरी के चक्कर में नागरिकों की सेहत से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी भी स्तर पर नहीं दी जा सकती।

वसूल की गई राशि और बकाया का पूरा लेखा-जोखा
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कुल अधिरोपित जुर्माने में से एक बड़ा हिस्सा वसूल किया जा चुका है, लेकिन अभी भी लाखों रुपये की रिकवरी होना बाकी है। सांख्यिकीय आंकड़ों को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका को देखें:

            विवरण                                                         कुल आंकड़े (रुपये में)

  • कुल अधिरोपित अर्थदंड की राशि                 ₹41,60,000 (41 लाख 60 हजार)
  • अब तक की जा चुकी कुल वसूली                ₹30,68,600 (30 लाख 68 हजार 600)
  • लंबित/बकाया जुर्माना राशि                        ₹10,91,400 (10 लाख 91 हजार 400)
  • कुल निराकृत प्रकरणों की संख्या                      181 मामले

इस डेटा से स्पष्ट है कि लगभग 30.68 लाख रुपये से अधिक की राशि सरकारी खजाने में चालान के माध्यम से जमा हो चुकी है। परंतु शेष बची हुई करीब 11 लाख रुपये की राशि को वसूलने के लिए अब संबंधित व्यापारियों को अंतिम नोटिस के साथ कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी गई है।

तहसीलदारों और खाद्य निरीक्षकों को मिले कड़े दिशा-निर्देश: वसूली न होने पर दुकान कैसे सीज करें?
लंबित पड़े अर्थदंड की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करने के लिए जिला मुख्यालय से जिले के सभी तहसीलदारों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officers) को सामूहिक रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई है। अपर कलेक्टर न्यायालय ने सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित अधिकारी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले डिफाल्टर व्यापारियों की सूची तैयार करें।

प्रशासनिक आदेश का मुख्य अंश:
"जिन भी व्यावसायिक संस्थानों ने अब तक न्यायालय द्वारा तय की गई पेनल्टी की राशि को सरकारी खाते में जमा नहीं किया है, उनके खिलाफ राजस्व वसूली अधिनियम (RRC) के तहत तत्काल कुर्की और सीलिंग की कार्रवाई शुरू की जाए। इसके साथ ही, वसूले गए जुर्माने के चालान की एक प्रति अनिवार्य रूप से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए ताकि प्रकरणों को पूर्ण रूप से बंद किया जा सके।"

इस निर्देश के बाद रीवा के शहरी और ग्रामीण इलाकों के तहसीलदारों ने राजस्व अमले के साथ मिलकर रूपरेखा तैयार कर ली है। अब बिना किसी पूर्व सूचना के उन दुकानों पर ताले लटकाए जाएंगे जिन्होंने अदालती आदेशों का सम्मान नहीं किया है।

व्यापारियों के लिए कानूनी चेतावनी: सीलिंग से कैसे बचें?
रीवा के व्यापारिक संगठनों और सभी छोटे-बड़े दुकानदारों के लिए प्रशासन ने एक अंतिम अवसर प्रदान किया है। यदि किसी भी प्रतिष्ठान का कोई मामला अपर कलेक्टर कोर्ट में चल रहा था और उस पर अर्थदंड का फैसला आया है, तो उन्हें निम्नलिखित बातों का तुरंत पालन करना चाहिए:

  • चालान की स्थिति जांचें: सबसे पहले अपने खाद्य सुरक्षा अधिकारी या संबंधित तहसील कार्यालय से संपर्क कर अपनी बकाया राशि की सही जानकारी लें।
  • तय समय सीमा में भुगतान: बिना किसी देरी के निर्धारित बैंक या ट्रेजरी के माध्यम से चालान की राशि जमा करें।
  • न्यायालय में पावती जमा करना: केवल बैंक में पैसा जमा कर देना काफी नहीं है; उस चालान की प्रमाणित प्रति को न्याय निर्णायक अधिकारी (अपर कलेक्टर न्यायालय) के कार्यालय में पेश कर अपनी रसीद दर्ज कराएं।

यदि कोई व्यवसाई इस प्रक्रिया में लापरवाही बरतता है, तो उसकी दुकान को न केवल सीज किया जाएगा, बल्कि खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा उसका व्यापारिक लाइसेंस भी हमेशा के लिए निरस्त (Cancel) किया जा सकता है।