अमहिया चौड़ीकरण बना 'मजाक': कमिश्नर के अल्टीमेटम को व्यापारियों ने दिखाया ठेंगा; जो दुकानें खाली हुई थीं, वो फिर से सज गईं
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। सिरमौर चौराहा से प्रकाश चौराहा तक की सड़क का चौड़ीकरण अब प्रशासनिक दांव-पेंच और राजनीति का अखाड़ा बन चुका है. पिछले कई महीनों से सीमांकन और नापजोख का खेल चल रहा है, लेकिन धरातल पर नतीजे शून्य नजर आ रहे हैं. जब भी प्रशासन कार्रवाई के लिए कमर कसता है, नेताओं की एंट्री होती है और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है.
कमिश्नर अक्षत जैन की 'वॉर्निंग': 48 घंटे का आखिरी समय
ठंडे पड़े काम में जान फूंकने के लिए मंगलवार को नगर निगम कमिश्नर अक्षत जैन दलबल के साथ सड़क पर उतरे. उन्होंने अमहिया नाला से लेकर प्रकाश चौराहा तक पैदल निरीक्षण किया और व्यापारियों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी. कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि यदि दो दिनों के भीतर अतिक्रमण स्वयं नहीं हटाया गया, तो नगर निगम की जेसीबी बिना किसी रियायत के अवैध निर्माण को जमींदोज कर देगी.
सुपर स्पेशलिटी के सामने फिर सजीं दुकानें: प्रशासन की नाकामी?
हैरानी की बात यह है कि जिन दुकानों को सबसे पहले गिराया जाना था, वे अब फिर से गुलजार हो गई हैं. सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सामने का हिस्सा जो लगभग खाली हो चुका था, वहां व्यापारियों ने दोबारा अपना सामान सजा लिया है. प्रशासन की ढुलमुल कार्यप्रणाली और बार-बार तारीखें बदलने से अतिक्रमणकारियों के मन से कानून का डर खत्म होता दिख रहा है.
मलबे के बीच राहगीरों की जान जोखिम में
इस पूरे अभियान में सबसे बड़ी लापरवाही सुरक्षा मानकों को लेकर दिख रही है. लोग बिना किसी सेफ्टी गियर या बैरिकेडिंग के अपने घरों के हिस्से तोड़ रहे हैं. सड़क पर गिरता मलबा राह चलते लोगों और वाहनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. प्रशासन का ध्यान सिर्फ अल्टीमेटम देने पर है, लेकिन मौके पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं.
क्या इस बार चलेगी जेसीबी?
अमहिया मार्ग अब 'खतरे का मैदान' बन चुका है. नए कमिश्नर के आने के बाद उम्मीद जगी थी कि काम रफ्तार पकड़ेगा, लेकिन अभी भी कार्रवाई सिर्फ कागजी अल्टीमेटम तक सीमित है. अब देखना यह है कि दो दिन बाद नगर निगम वाकई मैदान में उतरता है या एक बार फिर राजनीति के दबाव में प्रशासन के कदम पीछे हट जाएंगे.