धर्म का अपमान! APSU हॉस्टल में 'पूजा' पर सिगरेट की राख! 2 घंटे बंधक, मारपीट के बाद बंधक बनाने का आरोप, कुलगुरु बोले- जाँच होगी! ABVP ने रीवा में मचाया बवाल!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा के अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (APSU) का कन्या छात्रावास गुरुवार को तब रणक्षेत्र बन गया, जब एक धार्मिक विवाद मारपीट और बंधक बनाने तक पहुँच गया। पीड़ित छात्रा स्मिता ने अपनी रूममेट आयशा परवीन पर न सिर्फ सिगरेट की राख गिराने, बल्कि धार्मिक टिप्पणी कर दो घंटे तक कमरे में बंधक बनाने का आरोप लगाया है। हॉस्टल प्रशासन की चुप्पी के बाद मामला ABVP तक पहुंचा, जिसने विश्वविद्यालय परिसर को घेर लिया है।
धार्मिक टिप्पणी और हाथापाई: APSU हॉस्टल में क्या हुआ?
यह पूरा विवाद हॉस्टल के कमरे में हुई एक निजी घटना से शुरू हुआ, जिसने अब सार्वजनिक रूप ले लिया है। पीड़ित छात्रा स्मिता के अनुसार, वह अपने कमरे में पूजा कर रही थी। तभी उसकी रूममेट आयशा परवीन कथित तौर पर सिगरेट पीते हुए कमरे में आईं और जानबूझकर पूजा स्थल के पास राख गिराने लगीं।
जब स्मिता ने इस आपत्तिजनक कृत्य का विरोध किया, तो आयशा ने कथित तौर पर एक अत्यंत संवेदनशील धार्मिक टिप्पणी की: "ये तुम्हारे भगवान हैं, मेरे नहीं।" इस टिप्पणी के बाद दोनों छात्राओं के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक हाथापाई में बदल गई।
दो घंटे बंधक बनाने का आरोप: हॉस्टल प्रशासन ने क्यों नहीं की कार्रवाई?
विवाद बढ़ने पर, आरोप है कि आयशा परवीन ने अपनी एक बाहरी सहेली को भी कमरे में बुला लिया। इन दोनों ने मिलकर स्मिता के साथ जमकर मारपीट की और उसे करीब दो घंटे तक कमरे में बंधक बनाकर रखा।
पीड़ित छात्रा स्मिता ने इस गंभीर घटना की लिखित शिकायत तुरंत हॉस्टल वार्डन और कुलगुरु (Vice-Chancellor) को दी। बावजूद इसके, शिकायत मिलने के बाद भी तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासनिक स्तर पर हुई इसी 'लापरवाही' के कारण यह मामला अब राजनीतिक और छात्र आंदोलनों की दिशा में मुड़ गया है।
ABVP का 'अल्टीमेटम': कुलगुरु दफ्तर का घेराव, FIR की मांग क्यों?
जब हॉस्टल प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) तक पहुंचा। गुरुवार को एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार नारेबाजी की और प्रशासनिक भवन का घेराव कर दिया। उनका प्रदर्शन उग्र था।
ABVP पदाधिकारियों की मुख्य मांगें निम्न हैं:
- FIR दर्ज करना: आरोपी छात्राओं (आयशा परवीन और उसकी सहेली) के खिलाफ तुरंत पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
- सुरक्षा: पीड़ित छात्रा स्मिता को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए।
- निलंबन: आरोपी छात्राओं को विश्वविद्यालय और हॉस्टल से निलंबित किया जाए।
विद्यार्थी परिषद ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते उनकी मांगों पर कड़ा एक्शन नहीं लिया, तो यह आंदोलन उग्र रूप ले लेगा और पूरे परिसर में शैक्षणिक गतिविधियाँ ठप कर दी जाएँगी।
कुलगुरु का बयान: जांच कमेटी और रिपोर्ट के बाद एक्शन की बात
उधर, विश्वविद्यालय के कुलगुरु राजकुमार कुडारिया ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वीकार किया है कि उन्हें शिकायत प्राप्त हुई है। कुलगुरु ने बताया कि वार्डन से रिपोर्ट मांगी गई है और मामले की सच्चाई जानने के लिए एक जाँच कमेटी का गठन किया जा रहा है।
कुलगुरु का कहना है कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, एबीवीपी और पीड़ित छात्रा के समर्थक, प्रशासनिक प्रक्रिया में हो रही इस देरी को लेकर संतुष्ट नहीं हैं और तत्काल सख्त एक्शन की मांग पर अड़े हुए हैं।