डॉ. केडी सिंह के काले कारनामों का पर्दाफाश! 4 साल की फाइल खुली और उड़ गए होश! आयुष्मान अस्पताल जा रहें तो हो जाए सावधान कही आप भी न बन जाये .........

 
रीवा के आयुष्मान अस्पताल और डॉ. केडी सिंह पर कलेक्टर-एसपी की बड़ी कार्रवाई। जानिए क्यों लगा ताला और जनता क्यों बनाए ऐसे अस्पतालों से दूरी।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ निजी अस्पतालों की आड़ में कथित तौर पर गैरकानूनी और अनैतिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। रीवा के चर्चित आयुष्मान अस्पताल (Ayushman Hospital) और इसके संचालक डॉ. केडी सिंह (Dr. KD Singh) पर जिला प्रशासन ने सख्त शिकंजा कस दिया है। इस खबर के माध्यम से हम जनता को पूरी गहराई से यह बताना चाहते हैं कि कैसे कुछ लोग सफेद कोट की आड़ में स्वास्थ्य व्यवस्था को कलंकित कर रहे हैं। इस लेख को पढ़कर आप समझ जाएंगे कि ऐसे संदिग्ध अस्पतालों से दूरी बनाना आम जनता की सुरक्षा के लिए कितना जरूरी है।

कलेक्टर और एसपी की अचानक दबिश और आयुष्मान अस्पताल पर ताला 
मध्य रात्रि में हुई एक गोपनीय कार्रवाई ने पूरे रीवा शहर में सनसनी फैला दी। रीवा कलेक्टर और एसपी ने अचानक आयुष्मान अस्पताल पर धावा बोल दिया। इस औचक निरीक्षण के दौरान प्रशासन ने अस्पताल के अंदर रखे दस्तावेजों और सीसीटीवी के डीवीआर (DVR) को अपने कब्जे में ले लिया। खास बात यह है कि जिस डॉक्टर के केबिन से लेकर ऑपरेशन थिएटर तक के सभी राज अब प्रशासन के पास कैद हैं, उस कार्रवाई के ठीक दूसरे ही दिन अस्पताल में अनिश्चितकालीन ताला लटका दिया गया।

अचानक अस्पताल बंद होने से वहां भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में अफरा-तफरी मच गई। लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए कि आखिर वे अपने मरीजों को लेकर कहां जाएं। कई लोग अपने मरीजों को तुरंत दूसरे निजी नर्सिंग होम में शिफ्ट करने लगे। यह स्थिति दिखाती है कि कैसे अचानक की गई प्रशासनिक कार्रवाई से रातों-रात मरीजों की जान को खतरे में डाला गया।

4 साल पुरानी गुमनाम शिकायत और प्रशासन की नींद टूटना 
इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू यह है कि कार्रवाई अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे लंबी पृष्ठभूमि है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, मप्र भोपाल में चार साल पहले एक गुमनाम शिकायत दर्ज कराई गई थी, जो फाइलों में दबकर रह गई थी।

चर्चा यह है कि इस गुमनाम शिकायतकर्ता के पीछे ऐसे रसूखदार अधिकारी हैं जो कभी रीवा में पदस्थ रहे थे और वर्तमान में राजधानी भोपाल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्हीं के दबाव और भोपाल के पत्राचार के बाद रीवा प्रशासन हरकत में आया। 24 सितंबर की रात को भोपाल के पत्राचार क्रमांक/विनियमन/2021/133 (दिनांक 15.06.2021) के आधार पर अंतिम कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

सीएमएचओ का नोटिस और 8 गंभीर बिंदु 
निरीक्षण के अगले ही दिन जिला प्रशासन के आदेश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने डॉ. केडी सिंह को एक कड़ा नोटिस जारी किया। इस नोटिस में डॉ. केडी सिंह पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं और उनसे मात्र तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।

मुख्य आरोप निम्नलिखित बिंदुओं पर आधारित हैं:

  • अस्पताल परिसर में अनैतिक और असामाजिक गतिविधियों का संचालन।
  • स्वास्थ्य मानकों और नियमों का खुला उल्लंघन।
  • मरीजों की जान और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना।
  • बिना पुख्ता व्यवस्थाओं के अस्पताल का संचालन जारी रखना।

चर्चा यह भी है कि डॉ. केडी सिंह के किसी बेहद करीबी ने ही उनके काले कारनामों का भंडाफोड़ किया है और शिकायत पत्र के साथ सीडीआर (CDR) संचालनालय को भेजी थी, जिसके कारण आज यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

वायरल वीडियो और डॉक्टर केडी सिंह के निजी विवाद 
डॉ. केडी सिंह का विवादों से पुराना नाता रहा है। कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हुआ था, जिसमें डॉ. केडी सिंह को उनकी पत्नी प्रियंका सिंह ने एक महिला के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया था। उस दौरान मौके पर काफी हंगामा हुआ था।

सूत्रों का दावा है कि वह मामला पूरी तरह नियोजित था ताकि डॉक्टर की छवि को धूमिल किया जा सके। हालांकि, इस वायरल वीडियो के कारण डॉ. केडी सिंह काफी दिनों तक मीडिया और शहर के चर्चाओं के केंद्र में बने रहे। अब ताजा प्रशासनिक कार्रवाई ने उनकी मुश्किलों को और अधिक बढ़ा दिया है।

जनता के लिए चेतावनी: फर्जी और अनैतिक अस्पतालों से दूरी क्यों जरूरी है? 
रीवा की यह घटना हर आम नागरिक के लिए एक बड़ी चेतावनी है। जब अस्पताल ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो मरीज कहां जाएंगे?

  • सावधानी बरतें: किसी भी निजी अस्पताल में इलाज करवाने से पहले उसके लाइसेंस, डॉक्टरों की योग्यता और वहां की व्यवस्थाओं की पूरी जांच जरूर कर लें।
  • दूरी बनाए रखें: आयुष्मान अस्पताल जैसे संस्थान, जिन पर अनैतिक गतिविधियों और गंभीर प्रशासनिक आरोप लगे हैं, उनसे पूरी तरह दूरी बनाकर रखें ताकि आपका जीवन खतरे में न पड़े।
  • प्रशासन का सहयोग करें: यदि आपके आसपास भी किसी अस्पताल में इस प्रकार की अवैध गतिविधियां चल रही हैं, तो तुरंत इसकी शिकायत प्रशासन से करें।