विंध्य के चिकित्सा जगत में महा-रिकॉर्ड: रीवा के मिनर्वा हॉस्पिटल में धड़कते दिल पर 8 घंटे तक चली बेहद जटिल और ऐतिहासिक सर्जरी सफल

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रीवा जिले ने स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने बड़े महानगरों के सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों को भी हैरान कर दिया है। रीवा के प्रसिद्ध मिनर्वा हॉस्पिटल (Minerva Hospital Rewa) में पहली बार 'वेटिंग हार्ट फोटन कंप्लीशन कार्डियक सर्जरी' (Waiting Heart Fontan Completion Cardiac Surgery) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है।

चिकित्सा जगत में इस बेहद दुर्लभ और अत्यधिक जोखिम भरे ऑपरेशन को डॉक्टरों ने पूरे 8 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित रूप से पूरा किया। सबसे बड़ी और अभूतपूर्व बात यह रही कि यह पूरी शल्य चिकित्सा (सर्जरी) मासूम बच्ची के धड़कते हुए दिल पर की गई। आमतौर पर ऐसी जटिल प्रक्रियाओं के दौरान दिल की गतिविधियों को मशीनों के जरिए रोक दिया जाता है, लेकिन रीवा की अनुभवी टीम ने धड़कनों को बिना रोके, चलते हुए दिल पर इस सर्जरी को मुकम्मल कर एक नया इतिहास रच दिया है।

मासूम पूर्वी साहू की दर्दभरी केस हिस्ट्री: नागपुर से रीवा तक का जीवन संघर्ष क्या है?
यह पूरी कहानी रीवा की रहने वाली नन्हीं पूर्वी साहू की है, जो जन्म से ही एक बेहद गंभीर और जटिल हृदय रोग (Congenital Heart Disease) से पीड़ित थी। पूर्वी का बचपन आम बच्चों की तरह सामान्य नहीं था। जन्म के बाद से ही उसे लगातार सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ होती थी, शरीर में कमजोरी बनी रहती थी और वह अन्य बच्चों की तरह दौड़ने-भागने या खेलने-कूदने में पूरी तरह असमर्थ थी। थोड़ा सा चलने पर भी उसका दम फूलने लगता था।

पूर्वी के माता-पिता ने अपनी लाडली को ठीक करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। साल 2020 में वे उसे महाराष्ट्र के बड़े मेडिकल हब 'नागपुर' लेकर गए, जहां उसका पहला ऑपरेशन कराया गया। हालांकि, नागपुर में हुई उस सर्जरी के बाद भी पूर्वी की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी और उसकी जान पर लगातार खतरा मंडराता रहा। साल 2026 की शुरुआत में जब उसकी स्थिति फिर बिगड़ने लगी, तब परिवार ने मिनर्वा हॉस्पिटल रीवा के डॉक्टरों से संपर्क किया, जहां गहन जांच के बाद इस ऐतिहासिक सर्जरी का फैसला लिया गया।

समझें तकनीकी भाषा: क्या होती है 'वेटिंग हार्ट फोटन कंप्लीशन कार्डियक सर्जरी'?
चिकित्सा विज्ञान की भाषा में 'वेटिंग हार्ट फोटन कंप्लीशन कार्डियक सर्जरी' बच्चों में होने वाले सबसे गंभीर जन्मजात हृदय विकारों को ठीक करने की एक उन्नत और अंतिम चरण की प्रक्रिया है। जब किसी बच्चे के दिल का एक हिस्सा (वेंट्रिकल) पूरी तरह विकसित नहीं होता, तो शरीर में शुद्ध और अशुद्ध खून आपस में मिलने लगता है। इससे फेफड़ों और पूरे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई गंभीर रूप से प्रभावित होती है।

इस बीमारी को ठीक करने के लिए 'फोटन प्रोसीजर' (Fontan Procedure) अपनाया जाता है, जिसके तहत नसों के रास्ते को इस तरह री-रूट किया जाता है कि अशुद्ध खून बिना दिल के कमजोर हिस्से में जाए, सीधे फेफड़ों तक साफ होने पहुंच सके। जब इसे 'वेटिंग या बीटिंग हार्ट' (धड़कते दिल) पर किया जाता है, तो यह तकनीक डॉक्टरों के लिए अग्निपरीक्षा जैसी बन जाती है, क्योंकि धड़कते हुए अंग पर टांके लगाना और रक्त प्रवाह को नियंत्रित करना अत्यधिक बारीक काम है।

8 घंटे की मैराथन सर्जरी: डॉक्टरों ने धड़कते दिल पर कैसे हासिल की जीत?
मिनर्वा हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर (OT) में जब पूर्वी साहू को ले जाया गया, तो डॉक्टरों के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती थी। यह ऑपरेशन पूरे 8 घंटे तक बिना रुके चला। सर्जरी के हर एक सेकंड पर पूरी टीम की सांसें थमी हुई थीं।

ऑपरेशन के दौरान की मुख्य चुनौतियाँ:
लगातार धड़कता दिल: सर्जरी के दौरान पूर्वी का दिल लगातार धड़क रहा था। डॉक्टरों को उसी गतिशील स्थिति में ही दिल की नसों की मरम्मत और री-रूटिंग करनी थी।
वाइटल्स की निगरानी: 8 घंटे के इस लंबे समय में एनेस्थीसिया विभाग और कार्डियक मॉनिटरिंग टीम लगातार बच्ची के ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन लेवल और मस्तिष्क की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी। एक भी चूक जानलेवा साबित हो सकती थी।
शारीरिक स्थिरता: धड़कते दिल पर काम करते समय शरीर के बाकी हिस्सों में रक्त परिसंचरण (Blood Circulation) को सुचारू बनाए रखना सबसे मुश्किल काम था, जिसे डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ से नियंत्रित किया।

मिनर्वा हॉस्पिटल के जांबाज डॉक्टर्स: विंध्य की इस विशेषज्ञ टीम में कौन-कौन शामिल थे?
इस नामुमकिन से दिखने वाले ऑपरेशन को मुमकिन बनाने का पूरा श्रेय मिनर्वा हॉस्पिटल की अनुभवी और समर्पित कार्डियक टीम को जाता है। इस टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों का पालन करते हुए इस सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया।

सर्जरी का नेतृत्व करने वाले मुख्य चिकित्सक:
डॉ. श्यामवीर सिंह (प्रमुख कार्डियक सर्जन): इनके कुशल हाथों और अनुभव ने इस हाई-रिस्क ऑपरेशन को सफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाई।
डॉ. धर्मेश पटेल (हृदय रोग विशेषज्ञ): ऑपरेशन के पूर्व की जांचों से लेकर सर्जरी के दौरान दिल की गतिविधियों को नियंत्रित करने में इनका विशेष योगदान रहा।
डॉ. विधि गुप्ता पटेल: क्रिटिकल केयर और पीडियाट्रिक कार्डियक मैनेजमेंट में इनकी भूमिका सराहनीय रही।

सहयोगी चिकित्सक और स्टाफ:
इस मैराथन सर्जरी में सहयोगी डॉक्टर के रूप में डॉ. अभिषेक मिंजा और डॉ. अभिषेक नामदेव ने अपनी सेवाएं दीं। इसके अलावा, अस्पताल के अत्याधुनिक कार्डियक ओटी स्टाफ, आईसीयू (ICU) बैकअप टीम, एनस्थीसिया विभाग और समर्पित नर्सिंग स्टाफ के कड़े टीम वर्क के बिना यह सफलता हासिल करना नामुमकिन था।

आयुष्मान भारत योजना: लाखों रुपए का ऑपरेशन बिना एक पैसा खर्च किए कैसे हुआ मुफ्त?
पूर्वी साहू के परिवार के लिए यह बीमारी जितनी बड़ी शारीरिक प्रताड़ना थी, उतनी ही बड़ी आर्थिक विपत्ति भी थी। महानगरों के निजी अस्पतालों में इस तरह की 'हाई रिस्क बीटिंग हार्ट फोटन कंप्लीशन कार्डियक सर्जरी' का कुल खर्च कई लाख रुपयों में आता है, जो किसी भी मध्यमवर्गीय या गरीब परिवार की कमर तोड़ने के लिए काफी है।

लेकिन, भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojana) इस परिवार के लिए संकटमोचक बनकर आई। मिनर्वा हॉस्पिटल प्रबंधन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इस पूरी बेहद महंगी और जटिल सर्जरी को आयुष्मान कार्ड के तहत पूरी तरह से निशुल्क (Free of Cost) किया। पूर्वी के माता-पिता को इस इलाज के लिए अपनी जेब से एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ा। यह इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे सरकारी योजनाएं और निजी अस्पतालों का मानवीय दृष्टिकोण मिलकर देश के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचा सकते हैं।

विंध्य क्षेत्र में स्वास्थ्य क्रांति: अब बड़े शहरों की दौड़ लगाने से कैसे मिलेगी मुक्ति?
रीवा के मिनर्वा हॉस्पिटल की यह कामयाबी केवल एक अस्पताल की सफलता नहीं है, बल्कि यह पूरे विंध्य क्षेत्र (रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल) के लाखों नागरिकों के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर है। अब तक दिल की गंभीर बीमारियों या बच्चों की जन्मजात हार्ट डिफेक्ट की सर्जरी के लिए यहाँ के लोगों को मजबूरी में दिल्ली, मुंबई, नागपुर या चेन्नई जैसे बड़े महानगरों की दौड़ लगानी पड़ती थी, जिससे समय और पैसा दोनों अत्यधिक बर्बाद होते थे।

मिनर्वा हॉस्पिटल अब तक 100 से अधिक बच्चों की सफल कार्डियक सर्जरी कर चुका है, लेकिन धड़कते दिल पर यह विशिष्ट और अपनी तरह का पहला बेहद जटिल ऑपरेशन है। अत्याधुनिक चिकित्सा बुनियादी ढांचे (Medical Infrastructure) और कुशल डॉक्टरों की उपलब्धता के कारण अब रीवा खुद एक बड़ा मेडिकल हब बनने की ओर अग्रसर है।