रीवा ढेकहा रोड में सड़क की चौड़ाई पर बड़ा 'खेल'! रिकॉर्ड में दर्ज थी 26 मीटर, भाजपा नेता का मकान फंसा तो घटाकर कर दी 20 मीटर! 

 

मध्यप्रदेश के रीवा शहर में ढेकहा तिराहा से लेकर बनकुइयां और सेमरिया मोड़ तक चल रहे सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के दौरान अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई लगातार विवादों में घिरती जा रही है। शासकीय रिकॉर्ड और भू-अभिलेखों के अनुसार, इस पूरे मार्ग पर सड़क निर्माण के लिए कुल 26 मीटर शासकीय भूमि दर्ज उपलब्ध है।

मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) ने पूर्व में ठेका कंपनी को 24 मीटर चौड़ाई की कंक्रीट सड़क बनाने का अनुबंध सौंपा था। लेकिन सड़क किनारे हुए व्यापक अवैध कब्जों के कारण ठेकेदार ने काम बीच में ही रोक दिया था। हाल ही में उप मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद नगर निगम और जिला प्रशासन हरकत में आया, लेकिन सड़क की चौड़ाई को 24 मीटर से घटाकर 20 मीटर कर दिया गया। इस बदलाव के बाद स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में प्रशासन की मंशा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

एकतरफा बुलडोजर कार्रवाई पर भड़का जनआक्रोश: एक तरफ नरमी, दूसरी तरफ तबाही
बुधवार को दूसरे दिन भी भारी पुलिस बल और नगर निगम अमले की मौजूदगी में जेसीबी (JCB) से दुकानों और मकानों की बाउंड्रीवॉल को ध्वस्त करने की कार्रवाई जारी रही। लेकिन इस पूरी मुहिम में सबसे बड़ा विवाद एकतरफा कार्रवाई को लेकर खड़ा हुआ है।

  • एक ही तरफ चला बुलडोजर: ढेकहा से बनकुइयां मार्ग पर सड़क के दोनों तरफ अवैध कब्जे मौजूद हैं, परंतु प्रशासनिक दस्ता केवल एक ही दिशा में दुकानों और बाउंड्रीवॉल को ढहा रहा है।
  • दूसरी तरफ के कब्जे सुरक्षित: सड़क के दूसरे छोर पर मौजूद रसूखदार अतिक्रमणकारियों पर कोई आंच न आने से पीड़ित दुकानदार आक्रोशित हैं।
  • समान कार्रवाई की मांग: जिन व्यापारियों के व्यावसायिक निर्माण तोड़े गए हैं, उनका कहना है कि यदि कार्रवाई हो तो निष्पक्ष रूप से सड़क के दोनों तरफ समान नापजोख के आधार पर होनी चाहिए।

भाजपा नेता का ड्रामा और बदला सुर: धरने से तारीफ तक का सफर
कार्रवाई के दौरान राजनीतिक ड्रामा भी देखने को मिला। ढेकहा क्षेत्र में भाजपा नेता शुलभ पांडेय के मकान की बाउंड्रीवॉल भी सड़क सीमा में आ रही थी। मंगलवार को जब बुलडोजर उनकी दीवार गिराने पहुंचा, तो वे उग्र हो गए और प्रशासनिक अमले के विरोध में धरने पर बैठ गए।

पुलिस और प्रशासनिक अफ़सर उन्हें मनाने की कोशिश करते रहे, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। हालांकि, कुछ ही देर में जैसे ही पार्टी के उच्च स्तरीय नेताओं के फोन पहुंचे, भाजपा नेता का रुख अचानक बदल गया। वे न केवल धरने से उठ खड़े हुए, बल्कि प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करने लगे। इसके बाद वे मीडिया के सामने डिप्टी सीएम की तारीफ करते हुए नजर आए कि उन्होंने सड़क की चौड़ाई कम करवा दी, जिससे लोगों का कम नुकसान हुआ।

मुआवजे का अता-पता नहीं और ढहा दी दुकानें: व्यापारियों का छलका दर्द
कार्रवाई के दूसरे दिन 12 से 13 दुकानें और कई बाउंड्रीवॉल जमींदोज कर दी गईं। एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी की दीवार को हटाने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया था, जिसे तय समय सीमा बीतते ही बुधवार को ध्वस्त कर दिया गया।

पीड़ित दुकानदारों का गंभीर आरोप: "प्रशासन ने बिना पूर्व नियोजन और मुआवजे के हमारी रोजी-रोटी छीन ली है। नियमतः अतिक्रमण हटाने या भूमि अधिग्रहण से पहले क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान किया जाना चाहिए था। कागजों पर मुआवजा स्वीकृत होने की बात कही जाती है, लेकिन हकीकत में हमें एक रुपये की राहत राशि भी नहीं मिली है।"

अमहिया मॉडल की पुनरावृत्ति: मास्टर प्लान के मनमाने फैसलों पर उठे सवाल
रीवा शहर में यह पहला मौका नहीं है जब मास्टर प्लान और सड़क चौड़ीकरण के मानकों में अचानक बदलाव किया गया हो। इससे पहले शहर के व्यस्त अमहिया मार्ग पर भी अतिक्रमण हटाने के नाम पर इसी तरह का खेल देखने को मिला था।

अमहिया में भी शुरुआती योजना के तहत सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में प्रशासनिक स्तर पर उसे घटाकर 12 मीटर कर दिया गया। अब ठीक वही पैटर्न ढेकहा-सेमरिया मार्ग पर दोहराया जा रहा है। नागरिकों का आरोप है कि रसूखदारों और प्रभावशालियों के निर्माण बचाने के लिए मास्टर प्लान के नक्शों से खिलवाड़ किया जाता है, जबकि आम व्यापारी और नागरिक इसकी बलि चढ़ जाते हैं।