"सावधान! "रीवा के जेंटल शेफर्ड स्कूल में बच्चों की जान को खतरा: हैवान बनी टीचर मनीषा विश्वकर्मा ने स्टील बोतल से किया जानलेवा हमला, स्कूल प्रबंधन ने छिपाया खून!"

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य की धरा पर शिक्षा के मंदिर को कलंकित करने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने अभिभावकों की रूह कपा दी है। रीवा के एक निजी स्कूल में अनुशासन के नाम पर अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी गईं। महज कुछ चैप्टर होमवर्क पूरा न होने पर एक महिला शिक्षिका इस कदर आगबबूला हुई कि उसने नन्हे छात्र का सिर फोड़ दिया। यह घटना न केवल शारीरिक हिंसा है, बल्कि शिक्षा प्रणाली और बच्चों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान है।

स्टील की बॉटल लगने से छात्र के सिर में चोट आई है।

जेंटल शेफर्ड स्कूल की अमानवीयता: होमवर्क बना मासूम के लिए काल
रीवा शहर के जेंटल शेफर्ड हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई कर रहे 11 साल के मासूम को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि होमवर्क अधूरा रहना उसे अस्पताल पहुँचा देगा। स्कूल की शिक्षिका मनीषा विश्वकर्मा ने कक्षा के दौरान छात्र की कॉपी चेक की और काम पूरा न पाकर अपना आपा खो दिया।

चश्मदीदों और पीड़ित के अनुसार, शिक्षिका ने पहले छात्र को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और फिर मेज पर रखी स्टील की भारी पानी की बोतल उठाकर छात्र के सिर पर दे मारी। चोट इतनी गहरी थी कि बच्चे का सिर तुरंत फट गया और खून की धार बहने लगी।

छात्र के कान पर भी चोट के निशान मिले हैं।

स्टील की बोतल से प्रहार और दीवार पर पटकने का आरोप
परिजनों ने जो आरोप लगाए हैं, वे किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को विचलित कर सकते हैं। बताया गया कि बोतल से सिर फोड़ने के बाद भी शिक्षिका का मन नहीं भरा। उन्होंने लहूलुहान बच्चे को कॉलर से पकड़ा और उसे दीवार पर कई बार पटका।

बहन के साथ भी बदसलूकी
जब छात्र की छोटी बहन, जो उसी स्कूल में पढ़ती है, अपने भाई को चीखते-चिल्लाते देख बचाने दौड़ी, तो आरोप है कि शिक्षिका ने उसे भी नहीं बख्शा। उसके साथ भी धक्का-मुक्की और अभद्रता की गई। पूरी कक्षा के बच्चे इस खौफनाक मंजर को देखकर सहम गए और अपनी अपनी सीटों पर दुबक गए।

स्कूल प्रबंधन की लापरवाही: खून बहता रहा, इलाज नहीं कराया
इस पूरी घटना का सबसे शर्मनाक पहलू स्कूल प्रशासन का रवैया रहा। जब बच्चे के सिर से खून बह रहा था, तब कायदे से उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए था और माता-पिता को सूचित करना चाहिए था।

आरोप हैं कि:

  • स्कूल प्रबंधन ने घटना को दबाने के लिए बच्चे को प्राथमिक उपचार तक नहीं दिया।
  • परिजनों को फोन करना तो दूर, उन्हें जानकारी तक नहीं दी गई।
  • लहूलुहान बच्चा किसी तरह खुद लड़खड़ाते हुए घर पहुँचा, तब जाकर परिवार को इस हैवानियत का पता चला।

पीड़ित पिता का भावुक बयान: "क्या इसी दिन के लिए फीस भरते हैं?"
छात्र के पिता पुष्पेंद्र पांडेय ने नम आंखों से अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा, "मैं दिन-रात मेहनत करके अपनी हैसियत से अधिक फीस इस उम्मीद में भरता हूँ कि मेरा बच्चा सुरक्षित रहकर शिक्षित बनेगा। क्या हमने पैसा इसलिए दिया है कि शिक्षिका मेरे बेटे का सिर फोड़ दे?"

पिता ने बताया कि स्कूल प्रबंधन की ओर से उन पर मामले को रफा-दफा करने और पुलिस में शिकायत न करने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी शिक्षिका पर कड़ी कार्रवाई हो ताकि किसी और मासूम के साथ ऐसा न हो।

गहरे मानसिक सदमे (Trauma) में बच्चा: स्कूल के नाम से कांप रहा मासूम
शारीरिक चोट से कहीं अधिक गहरा घाव बच्चे के मन पर लगा है। परिजनों के मुताबिक, घटना के बाद से ही बच्चे को तेज बुखार है। वह डरा-सहमा है और उसने खाना-पीना पूरी तरह छोड़ दिया है।

हीन भावना: सहपाठियों के सामने हुई बर्बर पिटाई और अपमान से बच्चा हीन भावना का शिकार हो गया है।
डर का साया: अब वह स्कूल जाने के नाम से ही कांपने लगता है। डॉक्टरों का कहना है कि उसे इस सदमे से बाहर निकलने में लंबा समय लग सकता है।

ABVP का आक्रोश और प्रशासन को 3 दिन की चेतावनी
इस घटना की खबर मिलते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) मैदान में उतर आई है। छात्र संगठन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को 3 दिन का अल्टीमेटम दिया है।
ABVP नेताओं का कहना है कि रीवा के निजी स्कूलों में मनमानी चरम पर है। यदि 72 घंटों के भीतर दोषी शिक्षिका और प्रबंधन के खिलाफ ठोस कार्रवाई (जैसे स्कूल की मान्यता रद्द करना और गिरफ्तारी) नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।

जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) का एक्शन और कानूनी स्थिति
मामला सुर्खियों में आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने जांच टीम गठित कर स्कूल को नोटिस जारी करने की बात कही है।

  • कानूनी प्रावधान (Section 17 - RTE Act): भारत के कानून के अनुसार, स्कूलों में किसी भी प्रकार का शारीरिक या मानसिक दंड (Corporal Punishment) पूरी तरह प्रतिबंधित है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 17 के तहत बच्चों को मारना-पीटना एक दंडनीय अपराध है। दोषी शिक्षिका पर IPC (अब BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज हो सकता है।

निष्कर्ष: समाज और शिक्षा तंत्र के लिए एक सबक
रीवा की यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का मानसिक रूप से स्वस्थ और धैर्यवान होना कितना अनिवार्य है। अनुशासन के नाम पर हिंसा को कभी भी उचित नहीं ठहराया जा सकता। अब देखना यह होगा कि रीवा पुलिस और शिक्षा विभाग इस पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. रीवा के किस स्कूल में छात्र के साथ मारपीट हुई? उत्तर: यह घटना रीवा के 'जेंटल शेफर्ड हायर सेकेंडरी स्कूल' में हुई है।
Q2. शिक्षिका ने छात्र को क्यों पीटा? उत्तर: बताया गया है कि छात्र का एक-दो चैप्टर होमवर्क पूरा नहीं था, इसी बात पर शिक्षिका ने उसे स्टील की बोतल से मारा।
Q3. आरोपी शिक्षिका का नाम क्या है? उत्तर: परिजनों और शिकायतों के अनुसार आरोपी शिक्षिका का नाम मनीषा विश्वकर्मा है।
Q4. क्या स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है? उत्तर: जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं और पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। ABVP ने 3 दिन के भीतर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
Q5. अगर स्कूल में बच्चे को पीटा जाए तो अभिभावक क्या करें? उत्तर: सबसे पहले बच्चे का मेडिकल कराएं, फिर स्थानीय पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएं और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को लिखित शिकायत दें।