"कलेक्टर साहब देख लीजिए अपनी रीवा का हाल! सरपंच पुत्र ने ट्रांसपोर्टर के बिल लगाकर साफ किए लाखों रुपए, भ्रष्टाचारियों पर कब होगी FIR?"
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले के जवा जनपद की ग्राम पंचायत अंतरैला में शासकीय धन के खुलेआम बंदरबांट का एक बेहद संगीन मामला प्रकाश में आया है। ग्राम पंचायत अंतरैला के वर्तमान सरपंच रामभुवन पांडेय और उनके मास्टरमाइंड पुत्र पंकज पांडेय (जो स्वयं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, इकाई रीवा में संविदा डेटा एंट्री ऑपरेटर हैं) पर पद और रसूख का दुरुपयोग कर मनरेगा और पंचायत निधि में लाखों रुपये के गबन का आरोप लगा है। ग्राम पंचायत अंतरैला के जागरूक नागरिक बाबूलाल पाण्डेय ने इस महाघोटाले के पुख्ता दस्तावेजी सबूत और तस्वीरें जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर और रीवा के नए कलेक्टर को सौंपकर आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने की मांग की है।
मास्टरमाइंड पुत्र और सरपंच पिता की जुगलबंदी: कैसे हुआ घोटाला?
इस पूरे घोटाले का मुख्य सूत्रधार सरपंच का पुत्र पंकज पांडेय बताया जा रहा है। पंकज पांडेय खुद एक सरकारी कर्मचारी (संविदा डेटा एंट्री ऑपरेटर) है, जिसे शासकीय सेवा आचरण नियमों का पालन करना चाहिए। लेकिन, उसने अपने पिता के सरपंच पद का फायदा उठाकर पूरी पंचायत को अपनी जागीर बना लिया। तकनीकी रूप से सक्षम होने के कारण उसने ऑनलाइन पोर्टल में ऐसी सेंधमारी की कि असली गरीब मजदूर देखते रह गए और सरकारी राशि सीधे इनके करीबियों के खातों में ट्रांसफर हो गई।
घोटाले के 4 बड़े सबूत: फोटो किसी की, पैसा किसी और के खाते में
शिकायतकर्ता द्वारा अधिकारियों को सौंपे गए दस्तावेजों में भ्रष्टाचार के चार ऐसे पुख्ता प्रमाण हैं, जिन्हें देखकर किसी के भी होश उड़ जाएं:
मनरेगा में खुद की फोटो लगाकर निकाली मजदूरी
घोटाले की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि डेटा एंट्री ऑपरेटर पंकज पांडेय ने मनरेगा योजना के अंतर्गत लगभग 10 फर्जी श्रमिकों के नाम पर मस्टर रोल जारी करवाए। हद तो तब हो गई जब उसने ऑनलाइन मस्टर रोल में स्वयं की फोटो (शासकीय कर्मचारी की लाइव फोटो) अपलोड कर दी, जबकि राशि का आहरण किसी अन्य नाम के बैंक खातों से किया गया। यह मनरेगा अधिनियम की सरेआम धज्जियां उड़ाने जैसा है।
70 किलोमीटर दूर के 'PMGSY' वेंडरों से खरीदी सामग्री
पंचायत के निर्माण कार्यों में फर्जीवाड़ा करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के पंजीकृत बड़े ठेकेदारों को वेंडर दर्शा दिया गया।
ये वेंडर अंतरैला पंचायत से 60-70 किलोमीटर दूर स्थित हैं।
पंचायत स्तर पर सामग्री बेचने के लिए इन वेंडरों की कोई दुकान या प्रतिष्ठान स्थानीय क्षेत्र में मौजूद ही नहीं है।
सिर्फ लेटर पैड का इस्तेमाल कर फर्जी बिल लगाए गए और सरकारी खजाने से लाखों रुपये साफ कर दिए गए।
ट्रांसपोर्टर के लेटर पैड पर बिक गई 'सीमेंट-सरिया'
भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा देखिए—ऑनलाइन पोर्टल पर 'पाक लॉजिस्टिक्स' नामक एक फर्म का बिल अपलोड किया गया है, जो मूल रूप से केवल ट्रांसपोर्टेशन (माल ढुलाई) का कार्य करने के लिए अधिकृत है। इस ट्रांसपोर्टर के लेटर पैड पर फर्जी तरीके से सीमेंट और सरिया की खरीदी दर्शाकर ₹1,90,000 (एक लाख नब्बे हजार रुपये) का फर्जी आहरण कर लिया गया।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बेहद घटिया
कागजों पर लाखों रुपये की सामग्री खरीदना दिखाकर जमीन पर जो भी इक्का-दुक्का निर्माण कार्य कराए गए हैं, उनकी गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की है। पहली ही बारिश में इन निर्माण कार्यों के ढहने की पूरी संभावना है, जो शासकीय धन की बर्बादी को सीधे तौर पर बयां कर रहा है।
कानूनी फंदे में फंसेगा 'पांडेय परिवार': इन धाराओं में दर्ज होगा केस
शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि सरपंच रामभुवन पांडेय और उनके पुत्र पंकज पांडेय का यह कृत्य सीधे तौर पर आपराधिक कदाचार की श्रेणी में आता है। इनके विरुद्ध निम्नलिखित अधिनियमों के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की गई है:
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की सुसंगत धाराएं।
- भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409 (शासकीय धन का गबन), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (फर्जी दस्तावेज तैयार करना और उनका असली के रूप में उपयोग)।
- मनरेगा अधिनियम, 2005 एवं म.प्र. पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के वित्तीय नियमों का उल्लंघन।
रीवा न्यूज़ मीडिया का तीखा सवाल: आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार अधिकारी?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर जिले के जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी और तकनीकी अमला अब तक क्या कर रहा था? क्या जनपद स्तर के अधिकारियों की साठगांठ के बिना इतना बड़ा घोटाला मुमकिन है?
"रीवा न्यूज़ मीडिया सीधे तौर पर जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर और रीवा के नए कलेक्टर से यह सवाल पूछता है कि इतने पुख्ता सबूत, तस्वीरें और बिल सामने आने के बाद भी भ्रष्ट ऑपरेटर पंकज पांडेय और सरपंच पर अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन ऐसे भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रहा है या फिर नए साहबान रीवा की इस जमीनी हकीकत से बेखबर हैं?"
हमारा संकल्प: रीवा न्यूज़ मीडिया अंतरैला ग्राम पंचायत के इस भ्रष्ट तंत्र और इसके मास्टरमाइंड पंकज पांडेय के खिलाफ लगातार आवाज उठाता रहेगा। यह तो सिर्फ एक शुरुआत है, आने वाले दिनों में इस पंचायत के और भी कई बड़े काले कारनामों और छिपे हुए चेहरों को सबूतों के साथ बेनकाब किया जाएगा।
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