'कालोनाइजरों की जमीनें करो कुर्क, दर्ज करो FIR!' रीवा कलेक्ट्रेट में गूंजे नारे; जानिए क्यों बेहाल हैं अनंतपुर सुदर्शन नगर के लोग

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्यप्रदेश के रीवा जिले में भू-माफियाओं और अवैध कालोनाइजरों के खिलाफ जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई ने पूरे शहर में खलबली मचा दी है। हाल ही में गड़रिया क्षेत्र में पनपी अवैध कालोनी के खिलाफ रीवा कलेक्टर ने कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 12 भू-स्वामियों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही, कालोनाइजरों की शेष बची जमीनों को कुर्क (राजसात) कर उन्हें नीलाम करने और उस राशि से कालोनी में बुनियादी सुविधाएं विकसित करने का ऐतिहासिक आदेश दिया था।

गड़रिया में हुए इस बड़े एक्शन का सीधा असर अब शहर की अन्य बदहाल कालोनियों पर दिखने लगा है। जिला प्रशासन के इस सख्त रुख के बाद बरसों से ठगे महसूस कर रहे आम नागरिकों के दिलों में इंसाफ की आस जगी है। इसी कड़ी में गड़रिया जैसी ही प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर अनंतपुर क्षेत्र के सुदर्शन नगर और निराला नगर के दर्जनों परिवार भारी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंच गए और कलेक्ट्रेट का घेराव करते हुए कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई।

अनंतपुर सुदर्शन नगर और निराला नगर की पीड़ा: 20 फीट की सड़क हुई गायब
रीवा के अनंतपुर (वार्ड क्रमांक 9) स्थित सुदर्शन नगर और निराला नगर तालाब क्षेत्र के निवासियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। पीड़ितों का आरोप है कि साल 2010 के आसपास जब कालोनाइजरों ने उन्हें प्लाट बेचे थे, तो नक्शे और ब्रोशर में 20 फीट चौड़ा मुख्य संपर्क मार्ग दिखाया गया था।

  • मुख्य मार्ग पर अवैध कब्जा: कालोनी पूरी तरह बस जाने के बाद अब मुख्य रास्ते पर किसी तीसरे पक्ष ने अपना मालिकाना हक जताते हुए उसे पूरी तरह बंद कर दिया है।
  • रास्ते की चौड़ाई घटाई: जो आंतरिक सड़कें कालोनी के भीतर दी भी गई थीं, उनकी चौड़ाई 20 फीट से घटाकर 10 से 15 फीट कर दी गई।
  • नक्शे से सड़क गायब: राजस्व रिकॉर्ड (खसरा और नक्शे) में सड़क को विधिवत दर्ज न कराने के कारण अब जमीन मालिक राहगीरों को निकलने से रोक रहे हैं।

कालोनाइजरों के वादों का सच: प्लाट बिके, लेकिन नाली व सड़कें नदारद
रीवा शहर के लगभग हर वार्ड में अवैध कालोनाइजरों का जाल फैला हुआ है। प्रलोभन देकर और सुनहरे सपने दिखाकर कालोनाइजरों ने आम मध्यमवर्गीय परिवारों की गाढ़ी कमाई से प्लाट तो बेच दिए, लेकिन बुनियादी नागरिक सुविधाएं देना भूल गए।
नगर निगम और नगर निवेश (T&CP) के नियमों को दरकिनार कर बसाई गई इन कालोनियों में न तो डामर या कंक्रीट की सड़कें बनाई गईं और न ही गंदे पानी की निकासी के लिए नालियों का निर्माण किया गया। अब आलम यह है कि प्लाट बेचकर कालोनाइजर करोड़ों रुपये समेटकर चंपत हो गए और सजा वहां रहने वाले निर्दोष परिवार भुगत रहे हैं।

बारिश में दलदल बनी सड़कें: बंद हुआ बच्चों का स्कूल और दफ्तर जाना
वर्तमान मानसूनी बारिश के मौसम में अनंतपुर सुदर्शन नगर के हालात बेहद नारकीय हो चुके हैं। मुख्य संपर्क मार्ग बंद होने और वैकल्पिक रास्तों के पूरी तरह मिट्टी और कीचड़ के दलदल में तब्दील हो जाने से रहवासियों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है।

दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त: स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव और गहरे कीचड़ की वजह से छोटे बच्चों का स्कूल जाना पूरी तरह बंद हो चुका है। बुजुर्ग और महिलाएं घरों में कैद होने को मजबूर हैं, वहीं नौकरीपेशा और दफ्तर जाने वाले लोग रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर इन खस्ताहाल रास्तों से गुजर रहे हैं। आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड का कालोनी के अंदर पहुंचना भी नामुमकिन हो गया है।

पीड़ित रहवासियों का पक्ष: कानूनी कार्रवाई और एफआईआर की पुरजोर मांग
कलेक्ट्रेट पहुंचे सुदर्शन नगर के निवासियों में से त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि उन्होंने निलेश मिश्रा, अजीत मिश्रा और सोहगौरा जी से प्लाट खरीदे थे। जो रास्ता उन्हें बिक्री के समय दिखाया गया था, अब उस जमीन पर स्थानीय सोनी परिवार अपनी आपत्ति दर्ज करा रहा है और आने-जाने से रोक रहा है।

वहीं स्थानीय निवासी रीनू सिंह बघेल ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि कालोनी में करीब 50 से अधिक परिवार रहते हैं और सभी पिछले कई वर्षों से इस त्रासदी को झेल रहे हैं। 2010 में प्लाटिंग के समय जो रास्ते का वादा किया गया था, उसे अब बंद कर दिया गया है।

कलेक्टर से निवासियों की प्रमुख मांगें:

  • गड़रिया जैसी कठोर कार्रवाई: कालोनाइजरों के खिलाफ धोखाधड़ी का आपराधिक मामला (FIR) दर्ज किया जाए।
  • संपत्ति कुर्की व विकास: कालोनाइजरों की बची हुई जमीनों को कुर्क कर नीलाम किया जाए और उससे प्राप्त राशि से सड़क व नाली का निर्माण कराया जाए।
  • रास्ता अतिक्रमण मुक्त: बंद किए गए मुख्य मार्ग को तुरंत अतिक्रमण से मुक्त कराकर सरकारी खसरा-नक्शा में दर्ज किया जाए।