गृह जिले में ही बेअसर हुए डिप्टी सीएम के तेवर: राजेंद्र शुक्ला के आदेश को डीन ने दिखाया ठेंगा, SGMH की बर्न यूनिट में अब भी गर्मी से तड़प रहे झुलसे मरीज
ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और कद्दावर नेता राजेंद्र शुक्ला के गृह जिले रीवा में प्रशासनिक बेलगाम नौकरशाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकार के इकबाल पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रीवा के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र— संजय गांधी स्मृति अस्पताल (SGMH) और मेडिकल कॉलेज में खुद डिप्टी सीएम का प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह से लड़खड़ाता नजर आ रहा है। अस्पताल के बर्न यूनिट (झुलसे हुए मरीजों का वार्ड) का औचक निरीक्षण करने पहुंचे डिप्टी सीएम को जब आम जनता और तड़पते मरीजों के गुस्से का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से डीन को कड़ी फटकार लगाते हुए 24 घंटे के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। लेकिन बेहद शर्मनाक स्थिति यह है कि इस कड़े आदेश के बीत जाने के कई दिन बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने बंद पड़े एयर कंडीशनर (AC) को सुधराने की जहमत तक नहीं उठाई। यह सीधे तौर पर एक कैबिनेट मंत्री और सूबे के उपमुख्यमंत्री के आदेशों की खुली नाफरमानी है।
संजय गांधी अस्पताल में प्रशासनिक अराजकता: जब डिप्टी सीएम के आदेश ही हो गए 'हवा'
विंध्य क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले संजय गांधी अस्पताल में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। साफ-सफाई की बदहाली से लेकर बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर खुद उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला कई बार जनरल काउंसिल (GC) की बैठकों में अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत बदलने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में जब डिप्टी सीएम जीएमएच (GMH) परिसर में मातृ मृत्यु दर पर आयोजित एक गंभीर कार्यशाला के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंचे थे, तो कार्यक्रम के बाद वे अस्पताल की जमीनी हकीकत जानने के लिए अचानक बर्न यूनिट की तरफ मुड़ गए।
डिप्टी सीएम के इस औचक कदम से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप तो मचा, लेकिन जैसे ही वे वार्ड के भीतर दाखिल हुए, वहां का नजारा बेहद भयावह था। भीषण गर्मी के इस मौसम में, जहां सामान्य इंसान का बैठना दूभर है, वहां आग से बुरी तरह झुलसे हुए मरीज बिना एसी और कूलर के इलाज कराने को मजबूर थे। वार्ड में वेंटिलेशन और कूलिंग सिस्टम पूरी तरह ठप पड़ा हुआ था, जिससे मरीजों के जख्मों में असहनीय जलन और संक्रमण का खतरा बना हुआ था।
बर्न यूनिट की ग्राउंड रिपोर्ट: जब भड़के परिजनों ने डिप्टी सीएम को सीधे सुनाई खरी-खोटी
अस्पताल के भीतर का दृश्य देखकर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला खुद असहज हो गए। जैसे ही मरीजों के तीमारदारों ने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री को अपने बीच देखा, उनका सब्र का बांध टूट गया। दर्जनों परिजनों ने डिप्टी सीएम को घेर लिया और अस्पताल की बदहाली की पोल खोलनी शुरू कर दी। कुछ परिजनों ने रोते हुए अपने मरीजों के लिए बेहतर इलाज की गुहार लगाई, तो कुछ ने सीधे राजनैतिक नेतृत्व पर ही सवाल दाग दिए।
मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ तीमारदारों ने दो टूक शब्दों में कहा:
"आप प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं और आपके ही रहते हुए आपके अपने जिले के सबसे बड़े अस्पताल में हमारे मरीज गर्मी से तड़प रहे हैं। अगर आपके पावर में होने के बाद भी यहां कूलर और एसी नहीं चल सकते, तो फिर हम किससे उम्मीद करें? क्या यही विंध्य का विकास है?"
जनता के इस सीधे और तीखे आक्रोश को सुनकर डिप्टी सीएम का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने तत्काल मौके पर मौजूद मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल की क्लास लगा दी। भरे वार्ड में डिप्टी सीएम ने डीन को पिल पड़ते हुए कहा, "क्या आप लोग मुझे यही सब सुनवाने के लिए कार्यक्रमों में आमंत्रित करते हैं? जनता यहां त्राहि-त्राहि कर रही है और आपका प्रबंधन सोया हुआ है। इस बंद पड़े एसी को तुरंत मैकेनिक बुलाकर दुरुस्त करवाइए।" लेकिन विडंबना देखिए कि इस हाई-प्रोफाइल फटकार के दो दिन बीत जाने के बाद भी बर्न यूनिट के एयर कंडीशनर जस के तस बंद पड़े हैं, और मरीज इस भीषण तपिश में सांसें गिनने को मजबूर हैं।
डीन बनाम डिप्टी सीएम: नौकरशाही की ऊंची चाल के आगे क्यों बेबस हैं राजेंद्र शुक्ला?
रीवा के राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि आखिर एक हलका पटवारी या डॉक्टर की ट्रांसफर-पोस्टिंग की ताकत रखने वाले डिप्टी सीएम के आदेश को डीन डॉ. सुनील अग्रवाल इतनी आसानी से हवा में कैसे उड़ा रहे हैं? इसके पीछे की अंदरूनी कहानी बेहद दिलचस्प और प्रशासनिक खींचतान से भरी है।
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, डीन डॉ. सुनील अग्रवाल अब डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला की आंखों में खटकने लगे हैं। शुरुआती दिनों में डीन को स्थानीय राजनैतिक नेतृत्व का पूरा संरक्षण प्राप्त था, लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों और तानाशाही रवैये के बाद अब दोनों के बीच दूरियां बढ़ चुकी हैं। डिप्टी सीएम चाह कर भी डीन को उनके पद से हटा नहीं पा रहे हैं। इसके पीछे की वजह यह बताई जा रही है कि डीन ने प्रशासनिक बिसात पर बहुत ऊंची चाल चल दी है। स्थानीय स्तर पर घिरने के बाद डीन ने सीधे भोपाल का रुख किया और प्रदेश के मुखिया (मुख्यमंत्री) के दरबार में अपनी सीधी पैठ बना ली। मुख्यमंत्री सचिवालय से मिले सीधे अभयदान के कारण अब डीन स्थानीय स्तर पर डिप्टी सीएम के किसी भी दबाव या आदेश को मानने के लिए खुद को बाध्य नहीं समझ रहे हैं, जिससे राजेंद्र शुक्ला की अपनी ही जमीन पर किरकिरी हो रही है।
सिर्फ स्वास्थ्य नहीं, भ्रष्टाचार पर भी ढुलमुल रवैया: साइकिल स्टैंड का ठेका अब तक निरस्त नहीं
यह पहला मौका नहीं है जब डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने उपमुख्यमंत्री के आदेश को ठंडे बस्ते में डाला हो। इससे पहले जब राजेंद्र शुक्ला सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का मुआयना करने पहुंचे थे, तब भी उन्हें भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ा था। अस्पताल के साइकिल स्टैंड और पार्किंग ठेकेदार द्वारा मरीजों के परिजनों से की जा रही अवैध और अतिरिक्त वसूली की शिकायत सीधे डिप्टी सीएम के हाथों में सौंपी गई थी।
अवैध वसूली का पुराना ढर्रा: स्टैंड ठेके पर भी नहीं हुआ एक्शन
यह पहला मौका नहीं है जब डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने उपमुख्यमंत्री के आदेश को ठंडे बस्ते में डाला हो। इससे पहले जब राजेंद्र शुक्ला सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का मुआइना करने पहुंचे थे, तब भी उन्हें भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ा था। अस्पताल के साइकिल स्टैंड और पार्किंग ठेकेदार द्वारा मरीजों के परिजनों से की जा रही अवैध और अतिरिक्त वसूली की शिकायत सीधे डिप्टी सीएम के हाथों में सौंपी गई थी।
पार्किंग स्थल पर मचे इस गदर को शांत करने के लिए डिप्टी सीएम ने मौके पर ही डीन को उक्त भ्रष्ट ठेकेदार का टेंडर (ठेका) तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का कड़ा आदेश थमाया था। लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी डीन कार्यालय इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले पाया है। ठेकेदार आज भी बेखौफ होकर अपनी मनमानी वसूली चला रहा है और डीन हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस हमलावर: 'अस्पताल के भीतर जाने से डरते हैं डिप्टी सीएम'
इस पूरे प्रशासनिक गतिरोध और अस्पताल की बदहाली को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राजेंद्र शुक्ला को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि डिप्टी सीएम रीवा में केवल पब्लिसिटी बटोरने और फीता काटने के लिए अस्पतालों का दौरा करते हैं। वे कभी भी वार्डों के भीतर जाकर आम मरीजों की वास्तविक स्थिति नहीं देखते, क्योंकि उन्हें पता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर है।
कांग्रेस प्रवक्ताओं ने तंज कसते हुए कहा कि डिप्टी सीएम केवल अपने चिर-परिचित या वीआईपी (VIP) मरीजों का हालचाल जानने के लिए अस्पताल के केबिनों तक सीमित रहते हैं। इस बार वे गलती से बर्न यूनिट चले गए, जिससे उनके ही दावों की पोल खुल गई। विपक्ष का कहना है कि जब एक डिप्टी सीएम के आदेश की कीमत उनके अपने जिले का एक डीन नहीं समझ रहा, तो आम जनता की सुनवाई इस सिस्टम में कैसे हो सकती है? बर्न यूनिट की यह तपिश दरअसल रीवा के उस खोखले प्रशासनिक दावों की हकीकत है, जिसे विकास का नाम दिया जा रहा है।