3 साल पहले सेवा से हटाई गई डॉक्टर से कराया प्रसव, SGMH विवाद में दिग्विजय सिंह की एंट्री से गरमाई राजनीति : पढ़िए पूरी रिपोर्ट 

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े शासकीय चिकित्सालय, संजय गांधी स्मृति अस्पताल (SGMH) में 25 वर्षीया प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मौत के मामले में एक ऐसा खौफनाक और प्रशासनिक तंत्र को हिला देने वाला खुलासा हुआ है, जिसने समूचे मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

जिस ऑन-ड्यूटी चिकित्सक डॉ. सोनल अग्रवाल पर लापरवाही का आरोप लगाकर प्रसूति के बाद 28 अगस्त को निलंबित किया गया, उसे मध्य प्रदेश शासन द्वारा 3 साल पहले ही सेवा से बर्खास्त (हटाने) का कड़ा आदेश जारी किया जा चुका था। सवाल यह उठ रहा है कि जिस डॉक्टर को शासन ने 2023 में ही हटाने का हुक्म दे दिया था, वह आखिरकार इतने सालों से रीवा के सबसे संवेदनशील शासकीय अस्पताल में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कैसे कर रही थी?

कल्पना के पिता राम शिरोमणि मिश्रा पांच दिन से अनशन पर बैठे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में चरमराई व्यवस्था: व्यापमं घोटाले से जुड़ी भर्तियों पर उठाए गंभीर सवाल
जयस्तंभ चौराहे पर एकत्रित जनसमूह और मीडिया को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने राज्य सरकार और विशेष रूप से स्वास्थ्य मंत्री को सीधे आड़े हाथों लिया।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग भी की।

गृह जिले में बदहाली: पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पूरे मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुकी हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि खुद स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल अपने गृह जिले रीवा में ही अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधारने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।

व्यापमं से कनेक्शन का संदेह: अस्पताल में लगातार हो रही चिकित्सीय लापवाहियों और अप्रशिक्षित कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए दिग्विजय सिंह ने एक बड़ा सियासी शगुफा छोड़ा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "अस्पतालों में जिस तरह का इलाज मरीजों को दिया जा रहा है, कहीं यह व्यापमं के जरिए हुई विवादित और फर्जी भर्तियों का दुष्परिणाम तो नहीं है?"

विपक्ष के तेवर सख्त: रीवा से भोपाल तक गर्माया स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का मुद्दा
रीवा के जयस्तंभ चौराहे पर देर रात तक चले इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। दिग्विजय सिंह के इस आक्रामक रुख से साफ है कि कांग्रेस अब रीवा के मेडिकल कॉलेज और अस्पताल विवाद को लेकर सीधे राज्य सरकार की घेराबंदी करने के मूड में है। धरना स्थल से उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक अस्पतालों में जिम्मेदार अफसरों और लापरवाह डॉक्टरों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती और आम जनता को सुरक्षित इलाज की गारंटी नहीं मिलती, तब तक सड़कों पर यह संग्राम जारी रहेगा।

2023 का वह गोपनीय आदेश: अपर मुख्य सचिव ने दिए थे डॉ. सोनल अग्रवाल को बर्खास्त करने के निर्देश
प्रशासनिक फाइलों से बाहर आए दस्तावेजों के मुताबिक, मध्य प्रदेश शासन के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) मोहम्मद सुलेमान ने 7 मार्च 2023 को एक अत्यंत कड़ा आदेश जारी किया था।

2023 के इस आदेश में डॉ. सोनल अग्रवाल को हटाने की बात शामिल है।
  • क्या था मामला: एक महिला मरीज को सरकारी अस्पताल के नियमों के खिलाफ जाकर निजी नर्सिंग होम में ले जाकर डिलीवरी कराने का संगीन आरोप सिद्ध हुआ था।
  • शासकीय कार्रवाई: इस मामले में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. बीनू सिंह की तीन वेतनवृद्धियां रोकने और सह प्राध्यापक डॉ. सोनल अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक (हटाने) करने का अंतिम आदेश पारित किया गया था।
  • संभागायुक्त को निर्देश: तत्कालीन अपर मुख्य सचिव ने यह आदेश रीवा संभागायुक्त अनिल सुचारी को भेजकर 9 मार्च 2023 तक पालन प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तलब किया था।

अब 2026 में कल्पना मिश्रा और उसके बच्चे की बलि चढ़ जाने के बाद यह सवाल गर्मा गया है कि 2023 का वह बर्खास्तगी आदेश फाइलों में कैसे दबा रह गया? क्या डॉ. सोनल अग्रवाल को किसी रसूखदार का संरक्षण प्राप्त था या फिर रीवा संभागायुक्त कार्यालय और अस्पताल प्रशासन ने आदेश को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया?

सिरमौर चौराहे पर पिता का 5वां दिन अनशन: '10 करोड़ भी दोगे तो नहीं मानूंगा, मुझे मौत का सच चाहिए'
अस्पताल की इस संगठित लापरवाही और ढर्रे के खिलाफ मृत पीड़िता के पिता रामशिरोमणि मिश्रा का आक्रोश ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा है। रीवा के सिरमौर चौराहे पर उनका आमरण अनशन लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा। भूख-प्यास से ढलते शरीर के बावजूद उनके हौसले अडिग हैं।

पीड़ित पिता की बेबस व हुंकारभरी पुकार:
"अगर शासन-प्रशासन मुझे 10 करोड़ रुपये का मुआवजा भी लाकर दे देगा, तब भी मैं पीछे हटने वाला नहीं हूँ। मुझे सरकार से पैसा नहीं चाहिए, मुझे मेरी मासूम बेटी और नाती की मौत का सच चाहिए। जिन डॉक्टरों की लापरवाही ने मेरे हँसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया, जब तक उन पर हत्या का केस (FIR) दर्ज कर जेल नहीं भेजा जाता, मेरा यह अनशन जारी रहेगा।"

26 अगस्त का खौफनाक सच: 'मां! ये लोग मुझे मार डालेंगे'— रुह कंपा देने वाला वीडियो
यह समूचा बवाल 25 और 26 अगस्त की दरमियानी रात का है, जब बैकुंठपुर के हटवा निवासी 25 वर्षीया कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए अस्पताल लाया गया था:

डिलेवरी से पहले अस्पताल से कल्पना का वीडियो सामने आया था। इसमें वह कह रही थी- ये लोग मुझे मार डालेंगे।
  • सी-सेक्शन और मौत: 26 अगस्त की रात 8:30 बजे कल्पना का ऑपरेशन (C-Section) किया गया। इसके महज तीन घंटे के भीतर ही कल्पना और उसके नवजात शिशु दोनों ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
  • अस्पताल के गलियारे में बिलखती प्रसूता: मौत से चंद घंटे पहले का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल चुका है। इसमें गंभीर रूप से तड़प रही कल्पना महिला वार्ड से बाहर आकर रोते-चिल्लाते हुए परिजनों से गुहार लगा रही है— "मां! इस तरह का इलाज जारी रहा तो ये लोग मुझे मार डालेंगे।"
  • डॉक्टरों की बेरुखी: वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि मरीज दर्द से कराह रहा था लेकिन ड्यूटी पर तैनात स्टाफ और डॉक्टर तमाशबीन बने रहे।

मजिस्ट्रियल जांच और NHRC की एंट्री: 5 पर हो चुका है एक्शन
जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अस्पताल परिसर से लेकर सड़कों तक शुरू हुए आंदोलनों के बाद प्रशासन अब तक निम्नलिखित बैकफुट कार्रवाइयां कर चुका है:

  • 28 अगस्त: ड्यूटी डॉक्टर डॉ. सोनल अग्रवाल, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. निधि पांडे और दो ऑन-ड्यूटी नर्सिंग स्टाफ को निलंबित कर दिया गया।
  • 29 अगस्त: मामले की परतें खोलने के लिए 5-सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनाई गई।
  • 1 सितंबर: अस्पताल की प्रशासनिक नाकामी को देखते हुए SGMH अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटा दिया गया।
  • 4 सितंबर: कलेक्टर रीवा द्वारा पूरे मामले की विस्तृत मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की नजर: मामले की गंभीरता को देखते हुए अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें भी 2023 के बर्खास्तगी आदेश के क्रियान्वयन और 2026 की चिकित्सकीय लापरवाही के समानांतर रिकॉर्ड्स खंगाल रही हैं।