एक्सपोज: 500 का कलेक्शन, 5 हजार की कमाई! पार्किंग में चल रहे इस 'अवैध खेल' में नगर निगम के बाबूओं की मोटी मलाई, ड्यूटी पर प्राइवेट लड़के, सरकारी कर्मचारी गायब

 

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। रीवा शहर में नगर निगम की पार्किंग व्यवस्था इन दिनों 'अव्यवस्था' और 'भ्रष्टाचार' का दूसरा नाम बन गई है। प्रकाश चौराहा के पास अशोक मिष्ठान भंडार के बगल में संचालित पार्किंग स्थल पर जो हुआ, उसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यहाँ सरकारी कर्मचारी की कुर्सी पर प्राइवेट लड़का बैठकर 'अवैध वसूली' कर रहा है, और जब जनता की गाड़ियाँ चोरी होती हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी पल्ला झाड़ लेते हैं।

कैसे नगर निगम के कर्मचारी कर रहे 'अवैध वसूली' का खेल?
यहाँ खुलेआम मिलीभगत का खेल चल रहा है। निगम द्वारा तैनात कर्मचारी शुभम सिंह परिहार को ड्यूटी पर रहना था, लेकिन वे घर पर आराम कर रहे थे। उनकी जगह एक प्राइवेट लड़का प्रमोद शर्मा अवैध रूप से गाड़ियों से वसूली कर रहा था।
हैरानी की बात यह है कि दिनभर में हजारों रुपये का कलेक्शन करने के बाद निगम के खाते में मात्र 300 से 500 रुपये ही जमा किए जा रहे हैं। शेष राशि का बंदरबांट निगम के कर्मचारी और उनके प्राइवेट गुर्गों के बीच हो रहा है। यह सीधे तौर पर नगर निगम के राजस्व को चूना लगाने का मामला है।

बाइक चोरी की घटना और जिम्मेदारों की चुप्पी
मुन्ना लाल साकेत नाम के व्यक्ति ने अपनी बाइक पार्किंग में खड़ी की, जिसके बदले उन्हें रसीद दी गई। रसीद होने के बावजूद जब वे वापस आए, तो गाड़ी गायब थी। हंगामा होने पर प्राइवेट कर्मचारी ने बड़ी ही बेशर्मी से कहा कि "मैं तो प्राइवेट लड़का हूँ, कर्मचारी घर खाना खाने गए हैं।"

जब 'रीवा न्यूज मीडिया' ने जिम्मेदारों से सवाल किया, तो किसी ने भी जिम्मेदारी लेने की जहमत नहीं उठाई। सब गोल-मोल जवाब देकर बचते नजर आए। क्या प्रशासन को ये नहीं दिखता कि शहर की पार्किंग के नाम पर जनता के साथ लूट और डकैती हो रही है?

क्या है निगम पार्किंग की असल हकीकत?
नगर निगम द्वारा बनाई गई पार्किंग का उद्देश्य सुव्यवस्थित प्रबंधन था, लेकिन अब यह 'अवैध वसूली का अड्डा' बन गया है।

  • सुरक्षा शून्य: न सीसीटीवी, न सुरक्षा गार्ड।
  • रसीद का नाटक: रसीद देकर भी गाड़ी सुरक्षित नहीं है।
  • ठेकेदारी का खेल: निगम के कर्मचारी खुद ठेकेदार बने बैठे हैं।

सरकारी नियमों की सरेआम धज्जियां
पार्किंग संचालन के स्पष्ट नियम हैं:

  • नियम 1: ड्यूटी पर सरकारी कर्मचारी या अधिकृत ठेकेदार ही रह सकता है।
  • नियम 2: किसी भी प्राइवेट व्यक्ति को वसूली का अधिकार नहीं है।
  • नियम 3: रसीद पर दर्ज राशि का मिलान बैंक डिपॉजिट से होना अनिवार्य है।

यहां इन सभी नियमों का उल्लंघन हो रहा है। यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत धोखाधड़ी और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का मामला बनता है।

रसीद जेब में और बाइक गायब: पार्किंग में चल रहा 'लूट का नंगा नाच'
नगर निगम की पार्किंग में मुन्ना लाल साकेत के साथ जो हुआ, वह केवल एक चोरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित धोखाधड़ी है। मुन्ना लाल साकेत ने अपनी बाइक अधिकृत पार्किंग में खड़ी की और विधिवत रसीद भी प्राप्त की। जब वे वापस लौटे, तो गाड़ी गायब थी। हैरानी की बात यह है कि वहां मौजूद प्राइवेट कर्मचारी ने बड़ी ही बेशर्मी से स्वीकार किया कि उसने रसीद की जांच किए बिना ही बाइक किसी और को सौंप दी!

सबसे भयावह पहलू यह है कि जब मुन्ना लाल ने विरोध किया, तो रसीद छीनने की कोशिश की गई, ताकि साक्ष्य (Proof) मिटाया जा सके। यह स्पष्ट करता है कि पार्किंग स्थल अब सुरक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि 'वाहन चोरी का सुरक्षित ठिकाना' बन चुका है।

500 का दिखावा, 5000 की कमाई: नगर निगम को लग रहा 'दीमक'
सब्जी मंडी, फोर्ट रोड और गुड़हाई बाजार के बीच स्थित यह पार्किंग स्थल दिन-भर हजारों लोगों की आवाजाही का केंद्र है। यहाँ से हर दिन कम से कम 5,000 रुपये तक का राजस्व प्राप्त होना स्वाभाविक है, लेकिन नगर निगम के 'भ्रष्ट तंत्र' का गणित देखिए—संग्रहण रजिस्टर (Collection Register) में 12 जून को मात्र 500 रुपये ही जमा दिखाए गए हैं!

यह अंतर महज कागजी गड़बड़ी नहीं, बल्कि नगर निगम के राजस्व की सीधी चोरी है। 5,000 रुपये की कमाई में से 500 रुपये सरकारी खाते में डालना और शेष 4,500 रुपये अपनी जेब में भरना—यह सीधे तौर पर गबन (Embezzlement) का मामला है। नगर निगम के कर्मचारी अपनी 'अवैध कमाई' को सुरक्षित रखने के लिए प्राइवेट गुर्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि पकड़े जाने पर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जा सके।

  • रीवा न्यूज मीडिया की जनता से अपील: क्या आप अपनी मेहनत की कमाई और संपत्ति को इन 'पार्किंग माफियाओं' के हवाले करने को मजबूर हैं? प्रशासन का यह 'मौन' क्या उनकी इस लूट में मौन सहमति है?

प्रशासन और आयुक्त से तीखे सवाल
रीवा नगर निगम आयुक्त को जनता को जवाब देना होगा:

  • सरकारी पार्किंग में प्राइवेट व्यक्ति को वसूली करने की अनुमति किसने दी?
  • दिनभर के 5,000 रुपये के कलेक्शन के बदले सिर्फ 500 रुपये सरकारी खाते में क्यों जमा हो रहे हैं?
  • चोरी हुई बाइक का हर्जाना कौन भरेगा?
  • क्या ऐसे कर्मचारियों पर तत्काल प्रभाव से निलंबन (Suspension) और एफआईआर (FIR) की कार्रवाई होगी?