"पुलिस की नाकामी या रसूखदारों का संरक्षण? नोटिस के बाद भी बंद नहीं हुआ जयस्तंभ का संदिग्ध अड्डा, अब ज्वैलरी शॉप लुट गई!"

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर में अपराधियों और चोरों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसकी बानगी एक बार फिर सामने आई है। शहर के सबसे व्यस्ततम और वीआईपी माने जाने वाले सिविल लाइन थाना क्षेत्र में बेखौफ चोरों ने आधी रात को धावा बोलकर एक प्रसिद्ध ज्वैलरी शॉप का ताला तोड़ दिया और लाखों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण समेटकर चंपत हो गए।

लगातार हो रही सिलसिलेवार चोरियों से रीवा के व्यापारी और आम नागरिक गहरे खौफ में हैं। एक तरफ पुलिस नशे की छोटी-मोटी खेप पकड़कर प्रेस नोट जारी करने और अपनी पीठ थपथपाने में मस्त है, वहीं दूसरी तरफ चोर हर रात किसी न किसी घर या दुकान का ताला तोड़कर लोगों की जीवन भर की गाढ़ी कमाई उड़ा रहे हैं। शहर के किसी भी थाना क्षेत्र में नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर रीवा पुलिस के ढीले गश्त तंत्र और असफल खुफिया विभाग की पोल खोलता है।

पद्मधर कॉलोनी में सिद्धि विनायक ज्वेलर्स का ताला टूटा: उड़ा ले गए लाखों का सोना-चांदी
ताजा मामला सिविल लाइन थाना अंतर्गत आने वाली पद्मधर कॉलोनी (वार्ड क्रमांक 5) का है। कॉलोनी के कोने पर स्थित सिद्धि विनायक ज्वेलर्स नामक दुकान को चोरों ने निशाना बनाया। घटना गुरुवार और शुक्रवार की मध्य रात्रि लगभग 3:00 से 4:00 बजे के बीच अंजाम दी गई। शातिर अपराधियों ने सबसे पहले दुकान के मुख्य शटर में लगे भारी-भरकम तालों को काटा या तोड़ा, जिसके बाद अंदर लगे कांच के दरवाजे को तोड़कर दुकान के भीतर प्रवेश किया।

दुकान के भीतर रखे सोने और चांदी के तमाम जेवरात समेटने के बाद चोर आराम से फरार हो गए। सुबह जब स्थानीय निवासियों ने दुकान का शटर उठा और ताला टूटा देखा, तो उन्होंने तत्काल दुकान संचालक संतोष सोनी और उनके पुत्र ओम सोनी को सूचना दी। सूचना मिलते ही परिजन और पुलिस मौके पर पहुंचे। पुलिस की फॉरेंसिक टीम और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट्स ने साक्ष्य जुटाने की कवायद शुरू कर दी है, लेकिन अपराधियों का अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका है।

'रीवा न्यूज मीडिया' की चेतावनी सच साबित: कबाड़ी मोहल्ले के संदिग्धों पर ही निकला शक
इस पूरी वारदात में सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 'रीवा न्यूज मीडिया' ने अपनी पूर्व की खोजी रिपोर्टों में रीवा पुलिस और जिला प्रशासन को स्पष्ट रूप से आगाह किया था। रीवा न्यूज मीडिया ने पहले ही चेताया था कि जयस्तंभ चौक और उससे सटे कबाड़ी मोहल्ले में देर रात तक असामाजिक तत्वों, नशेड़ियों और संदिग्ध चरित्र के लोगों का जमावड़ा रहता है, जो किसी भी समय शहर में किसी बड़ी वारदात या चोरी की घटना को अंजाम दे सकते हैं।

आज वही चेतावनी शत-प्रतिशत सच साबित हुई है। चोरी की घटना के बाद दुकान में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिसमें तड़के लगभग 3:20 बजे एक संदिग्ध युवक दुकान के आसपास मंडराता और भीतर चोरी करता हुआ साफ दिखाई दे रहा है। पीड़ित दुकान संचालक के पुत्र ओम सोनी का साफ कहना है कि फुटेज में दिख रहे संदिग्ध युवक कबाड़ी मोहल्ले के ही रहने वाले लग रहे हैं। यदि समय रहते 'रीवा न्यूज मीडिया' की चेतावनी पर पुलिस ध्यान देती और कबाड़ी मोहल्ले तथा जयस्तंभ चौक पर देर रात जुटने वाले असामाजिक तत्वों पर शिकंजा कसती, तो शायद सर्राफा व्यापारी की जिंदगी भर की कमाई लुटने से बच जाती।

जयस्तंभ चौक का वैष्णो फ्रूट: फल की आड़ में नशा और अपराधियों का देर रात अड्डा
शहर के मुख्य हृदय स्थल जयस्तंभ चौक पर स्थित 'वैष्णो फ्रूट कंपनी' पिछले काफी समय से संदिग्ध गतिविधियों का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का आरोप है कि फल बेचने के नाम पर देर रात तक खुली रहने वाली इस दुकान की आड़ में मादक पदार्थों और अवैध नशे की सप्लाई का काला कारोबार संचालित होता है।

देर रात तक दुकान खुली रहने के कारण यहाँ कबाड़ी मोहल्ला और आसपास के आपराधिक प्रवृत्ति के युवाओं का जमावड़ा लगा रहता है। ये असामाजिक तत्व न केवल नशा करते हैं, बल्कि जयस्तंभ चौक जैसे चौराहे पर अवैध अतिक्रमण करके गाड़ियों और सामान से पूरी सड़क को घेर लेते हैं। इसके चलते रोज जाम लगता है, राहगीरों और महिलाओं से गाली-गलौज, छींटाकशी और झपटमारी जैसी घटनाएं आम बात हो चुकी हैं।

पुलिसिया लाचारी: नोटिस जारी करने के बावजूद क्यों नहीं सील हुई दुकान?
प्रशासनिक नाकामी का इससे बड़ा सबूत क्या होगा कि स्वयं सिविल लाइन थाना पुलिस ने वैष्णो फ्रूट कंपनी के संचालकों को एक आधिकारिक नोटिस जारी कर यह स्वीकार किया था कि इस दुकान के कारण क्षेत्र की कानून-व्यवस्था बिगड़ रही है। नोटिस में स्पष्ट लिखा गया था कि देर रात तक दुकान खुली रहने से संदिग्ध और आपराधिक किस्म के लोगों को संरक्षण मिलता है।

अब सवाल यह उठता है कि जब खुद पुलिस के पास इस बात का लिखित प्रमाण और स्वीकारोक्ति है कि वैष्णो फ्रूट कंपनी अपराधियों का गढ़ बन चुकी है, तो फिर इस दुकान का लाइसेंस निरस्त कर इसे सील क्यों नहीं किया गया? पुलिस टीम सिर्फ रात 12 बजे आकर दुकान की लाइटें बंद करवाकर औपचारिकता पूरी कर लेती है, जबकि सड़क पर अतिक्रमण और अपराधियों का मजमा देर रात तक लगा रहता है। आखिर किस रसूखदार के दबाव में पुलिस इस दुकान पर बुल्डोजर या सीलिंग की कार्रवाई करने से कतरा रही है?

कमजोर पुलिसिंग से ध्वस्त हुई कानून व्यवस्था: नशीले कारोबार के आगे लाचार रीवा पुलिस
रीवा में कानून का इकबाल पूरी तरह से खत्म नजर आ रहा है। एक दिन पहले ही सगरा थाना क्षेत्र के हरिहरपुर में चोरों ने एक सेवानिवृत्त शिक्षक के घर की दीवार तोड़कर पूरी जमा पूंजी पार कर दी थी। उस घटना की स्याही सूखी भी नहीं थी कि चोरों ने सिविल लाइन में सर्राफा दुकान उड़ा दी। शहर में चोरी की एक भी घटना का खुलासा करने में रीवा पुलिस पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। चोर बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि पुलिस सिर्फ खानापूरी करेगी। नशे के काले कारोबार पर पुलिस की मौन सहमति या नाकामी का खामियाजा शहर के आम व्यापारियों और नागरिकों को अपनी सुरक्षा गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।

जब रसूखदारों और लापरवाही के आगे लाचार हो कानून, तब जिम्मेदार कब लेंगे संज्ञान?
सिद्धि विनायक ज्वेलर्स में हुई यह बड़ी चोरी केवल एक दुकान का नुकसान नहीं है, बल्कि यह रीवा पुलिस प्रशासन की साख पर करारा तमाचा है। 'रीवा न्यूज मीडिया' द्वारा पहले दिए गए अलर्ट के बावजूद पुलिस का हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना यह साबित करता है कि शहर में आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है।

यदि जिला प्रशासन और पुलिस कप्तान तुरंत जयस्तंभ चौक के अतिक्रमण, अवैध नशे के अड्डों और वैष्णो फ्रूट जैसी विवादित दुकानों पर कठोर कार्रवाई नहीं करते हैं, तो रीवा में अपराध की यह आग और विकराल रूप ले लेगी। अब देखना यह होगा कि सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस कबाड़ी मोहल्ले के इन संदिग्धों को कब तक गिरफ्तार कर माल बरामद कर पाती है।