बेटी की मौत के बाद न्याय के लिए पिता के अनशन का 5वां दिन: रीवा में उबाल, डिप्टी सीएम के बंगले में घुसे प्रदर्शनकारी
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) में जच्चा-बच्चा की दर्दनाक मौत का मामला अब बेहद उग्र और संवेदनशील रूप ले चुका है। बैकुंठपुर के हटवा निवासी 25 वर्षीया कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मौत के जिम्मेदार दोषी डॉक्टरों पर पुलिस एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग को लेकर जनाक्रोश भड़क उठा है। रविवार को न्याय की गुहार लगाते हुए प्रदर्शनकारी सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के रीवा स्थित बंगले के परिसर में दाखिल हो गए। इस दौरान बंगले के बाहर और अंदर अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिसके बाद पुलिस बल को मोर्चा संभालना पड़ा।
उपमुख्यमंत्री बंगले में घुसे उग्र प्रदर्शनकारी: पुलिस से तीखी बहस, मची अफरा-तफरी
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के लचर रवैये और डॉक्टरों पर दंडात्मक कार्रवाई न होने से नाराज कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने उपमुख्यमंत्री निवास का अचानक घेराव कर दिया:
परिसर में एंट्री: नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों का एक दल बंगले के मुख्य द्वार से भीतर प्रवेश कर गया, जिससे वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए।
पुलिस संग तीखी नोकझोंक: मौके पर मुस्तैद पुलिस टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद कार्यकर्ताओं को परिसर से बाहर खदेड़ा। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस और झूमा-झटकी हुई।
कठोर कार्रवाई की मांग: प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि संजय गांधी अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाएं आए दिन मरीजों की बलि ले रही हैं और प्रशासनिक खानापूर्ति के बजाय सीधे आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
सिरमौर चौराहे पर पिता के आमरण अनशन का 5वां दिन: 'निलंबन नहीं, हत्यारों पर चाहिए FIR'
अपनी मासूम बेटी और नवजात नाती की मौत से टूटे पिता रामशिरोमणि मिश्रा का दर्द पूरे रीवा शहर को झकझोर रहा है। रीवा के सिरमौर चौराहे पर उनका आमरण अनशन रविवार को लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा।
पिता की बेबस पुकार: "मेरी बेटी को अस्पताल के डॉक्टरों ने तड़पा-तड़पा कर मार डाला। केवल दो डॉक्टरों को निलंबित कर देना या अधिकारियों का तबादला कर देना न्याय नहीं है। जब तक मेरी बेटी के हत्यारों पर आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज कर जेल नहीं भेजा जाता, मेरा यह सत्याग्रह और अनशन जारी रहेगा।"
26 अगस्त की वह खौफनाक रात: 'मां! ये लोग मुझे मार डालेंगे'— रुह कंपा देने वाला वीडियो वायरल
इस समूचे मामले की जड़ में 26 अगस्त की वह दर्दनाक घटना है, जिसने रीवा के शासकीय चिकित्सा तंत्र की कड़वी सच्चाई उजागर कर दी थी:
- अस्पताल में भर्ती: बैकुंठपुर के हटवा की रहने वाली कल्पना मिश्रा को 25 अगस्त को संजय गांधी अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। 26 अगस्त की रात 8:30 बजे उनका सी-सेक्शन (ऑपरेशन) किया गया।
- तीन घंटे में दो मौतें: ऑपरेशन के महज तीन घंटे के भीतर ही कल्पना और उनके नवजात शिशु दोनों ने दम तोड़ दिया।
- रुह कंपा देने वाला वीडियो: मौत से ठीक पहले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें गंभीर हालत में कल्पना महिला वार्ड के बाहर आकर रोती-बिलखती हुई मदद मांग रही थी और कह रही थी— "मां! इस तरह का इलाज जारी रहा तो ये लोग मुझे मार डालेंगे।"
प्रशासनिक कार्रवाई और अब तक के घटनाक्रम का सच
जच्चा-बच्चा की मौत के बाद परिजनों के भारी आक्रोश और अस्पताल गेट पर दिए गए धरने के बाद प्रशासन ने अब तक निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- 28 अगस्त: ड्यूटी डॉक्टर डॉ. सोनल अग्रवाल, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. निधि पांडे और दो ऑन-ड्यूटी नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया।
- 29 अगस्त: मामले की गहराई से जांच के लिए 5-सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन हुआ।
- 1 सितंबर: अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के तहत अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाने का आदेश जारी किया गया।
- 4 सितंबर: मामले की निष्पक्षता जांचने के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए।
प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल के उल्लंघन की स्थिति में आगे की दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।