लाखों की फीस... और संस्कार के नाम पर शून्य! सिरमौर चौराहे के 'नामी गिरामी' स्कूलों की पोल खुली, रमा गोविंद पैलेस के पीछे लगा नशे का अड्डा!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य की सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक राजधानी माने जाने वाले रीवा शहर से एक बेहद चिंताजनक और आंखें खोल देने वाली तस्वीर सामने आई है। शहर के सबसे व्यस्ततम व्यावसायिक एवं शैक्षणिक केंद्र सिरमौर चौराहा के आसपास संचालित कई नामचीन व बड़े निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की बिगड़ती जीवनशैली और खतरनाक राह पकड़ने का खुलासा हुआ है।
हाल ही में एक स्थानीय अभिभावक ने सिरमौर चौराहा स्थित रमा गोविंद पैलेस (भवन) के ठीक पीछे स्कूली ड्रेस पहने कुछ बच्चों को आपत्तिजनक स्थिति में नशा करते हुए देखा। अभिभावक ने जब बच्चों को निर्भीक होकर कानून और समाज की परवाह किए बिना गलत राह पर चलते देखा, तो दूर से ही उनकी गतिविधियों को अपने कैमरे में कैद कर लिया। यह फोटो अब शहर के अभिभावकों और प्रशासनिक तंत्र के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी बनकर उभरी है।
महंगी फीस और खोखली मॉनीटरिंग: क्या केवल पैसे वसूलने तक सीमित हैं बड़े स्कूल?
हर माता-पिता का एक ही सपना होता है कि वे अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च करके अपने बच्चों को शहर के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े स्कूलों में पढ़ाएं, ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके।
अभिभावकों का भरोसा: परिजन भारी-भरकम फीस चुकाकर बच्चों को इस उम्मीद के साथ स्कूल भेजते हैं कि वहाँ उन्हें बेहतर संस्कार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।
प्रबंधन की लापरवाही: सिरमौर चौराहा और उसके आसपास स्थित कई बड़े स्कूल संचालक मोटी फीस तो वसूल रहे हैं, लेकिन स्कूल परिसर के बाहर कदम रखते ही बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन पर ध्यान देना पूरी तरह से बंद कर देते हैं।
शिक्षकों व प्रशासन की खामोशी: छुट्टी के समय या स्कूल बंक करके बाहर निकलने वाले विद्यार्थियों पर न तो स्कूल के गार्ड्स की नजर रहती है और न ही प्रबंधन इस बात की सुध लेता है कि बच्चे स्कूल आवर में कहाँ घूम रहे हैं।
यूनिफॉर्म से खुली पहचान: बेखौफ होकर सिगरेट का धुआं उड़ा रहे थे छात्र-छात्राएं
जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे काफी विचलित करने वाली हैं। तस्वीर में साफ नजर आ रहा है कि 11वीं और 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले किशोर उम्र के विद्यार्थी, जिनमें लड़कों के साथ-साथ लड़कियां भी शामिल हैं, स्कूल की यूनिफॉर्म पहने हुए खुलेआम सिगरेट का धुआं उड़ा रहे थे।
स्थान का दुरुपयोग: रमा गोविंद पैलेस के पीछे का शांत और कम आवाजाही वाला इलाका इन भटके हुए विद्यार्थियों के लिए अड्डा बनता जा रहा है।
बेखौफ रवैया: सार्वजनिक स्थान होने के बावजूद इन विद्यार्थियों के चेहरे पर न तो पुलिस का कोई खौफ था और न ही अपने परिजनों या अध्यापकों द्वारा पकड़े जाने का डर।
पहचान का आधार: यद्यपि खबर में किसी विशेष संस्थान का नाम उजागर नहीं किया जा रहा है, लेकिन विद्यार्थियों द्वारा पहनी गई खास ड्रेस (यूनिफॉर्म) से यह स्पष्ट तौर पर पता चलता है कि ये बच्चे सिरमौर चौराहा क्षेत्र के ही स्थापित प्राइवेट स्कूलों से ताल्लुक रखते हैं।
रीवा न्यूज़ मीडिया का सामाजिक सरोकार: क्यों धुंधली की गई है तस्वीर?
'रीवा न्यूज़ मीडिया' एक जिम्मेदार और निष्पक्ष समाचार संस्थान होने के नाते पत्रकारिता के उच्च नैतिक मूल्यों का पूरी तरह पालन करता है। हमारा उद्देश्य किसी भी बच्चे या उसके परिवार को समाज में नीचा दिखाना या बदनाम करना बिल्कुल नहीं है।
इसी सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए रीवा न्यूज़ मीडिया ने इस तस्वीर को पूरी तरह धुंधला (Blur) करके प्रकाशित किया है, ताकि किसी भी नाबालिग छात्र या छात्रा की व्यक्तिगत पहचान उजागर न हो। हमारा मुख्य मकसद किसी पर कीचड़ उछालना नहीं, बल्कि सोए हुए स्कूल प्रबंधन, पुलिस प्रशासन और अभिभावकों को जगाना (Wake-up call) है। यदि आज इन शुरुआती आदतों पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में ये बच्चे नशे के गहरे दलदल में फंस सकते हैं।
अभिभावक और शिक्षक ध्यान दें: समय रहते जागरूक होना क्यों बेहद जरूरी है?
वर्तमान समय में रीवा शहर में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और युवाओं में बढ़ती नशे की लत पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और प्रशासन द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारी समय-समय पर विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में जाकर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर इसका असर सीमित नजर आ रहा है।
- अभिभावकों के लिए सलाह: केवल स्कूल की फीस जमा कर देना ही आपकी जिम्मेदारी खत्म नहीं करता। बच्चा स्कूल से कब निकल रहा है, उसके दोस्त कौन हैं, उसकी जेब में क्या है और वह घर किस मानसिक स्थिति में लौट रहा है—इन सब पर बारीकी से नजर रखें।
- स्कूल प्रबंधन का कर्तव्य: केवल पढ़ाई करा देना ही काफी नहीं है। छुट्टी के वक्त परिसर के आसपास सिक्योरिटी गार्ड्स की तैनाती की जाए और आसपास के उन प्वाइंट्स पर निगरानी रखी जाए जहाँ बच्चे इकट्ठा होते हैं।
- संयुक्त प्रयास की जरूरत: यदि माता-पिता और शिक्षक समय रहते सतर्क नहीं हुए, तो बच्चों का भविष्य अंधकारमय होते देर नहीं लगेगी।