सरकारी पैसा हजम, जमीन भी बेच दी! रीवा में PM आवास का पैसा डकारने वाले 34 लोगों पर FIR, देखें पूरी लिस्ट
ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बड़ी और कड़क प्रशासनिक कार्रवाई की खबर सामने आ रही है। रीवा नगर निगम ने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत सरकारी सहायता राशि प्राप्त करने के बावजूद अपने घरों का निर्माण न कराने वाले और सरकारी धन का निजी हितों के लिए दुरुपयोग करने वाले 34 डिफाल्टर हितग्राहियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। नगर निगम प्रशासन ने इन सभी 34 लोगों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी है।
यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी योजनाओं को मुफ्त का धन समझकर उसका अनुचित लाभ उठाते हैं और वास्तविक जरूरतमंदों के हक पर डाका डालते हैं। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं कि आखिर वर्ष 2017 से चला आ रहा यह मामला आज इस मुकाम पर कैसे पहुंचा।
बीएलसी घटक योजना 2017: क्या था पूरा मामला?
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 'बेनेफिशियरी लेड कंस्ट्रक्शन' (BLC) यानी हितग्राही आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ऐसे गरीब परिवार जिनके पास खुद की कच्ची जमीन या कच्चा मकान है, वे सरकारी अनुदान की मदद से अपने लिए एक पक्का और सुरक्षित आशियाना बना सकें।
वर्ष 2017 में रीवा नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न वार्डों के 34 आवेदकों को इस योजना के लिए पात्र पाया गया था। नगर निगम ने पूरी पारदर्शिता बरतते हुए इन सभी 34 हितग्राहियों के बैंक खातों में योजना की पहली किस्त के रूप में ₹70,000 से लेकर ₹1,00,000 तक की राशि सीधे ट्रांसफर (DBT) कर दी थी। नियम के मुताबिक, इस राशि का उपयोग तुरंत मकान की नींव डालने और प्राथमिक निर्माण कार्य शुरू करने के लिए किया जाना था, ताकि इसके बाद अगली किस्त जारी की जा सके।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा: पैसे लेकर बेच दी जमीन
जैसे-जैसे समय बीतता गया, नगर निगम के अधिकारियों ने पाया कि इन 34 स्वीकृत आवासों की भौतिक प्रगति (Physical Progress) शून्य बनी हुई है। जब इस मामले की गहराई से विभागीय जांच कराई गई, तो जो तथ्य सामने आए उन्होंने नगर निगम प्रशासन के होश उड़ा दिए।
चौंकाने वाली बात: जांच दल को पता चला कि कुल 34 डिफाल्टरों में से 6 शातिर हितग्राहियों ने सरकार से पहली किस्त की मोटी रकम डकारने के बाद अपनी वह जमीन ही बेच दी, जिस पर मकान बनाया जाना प्रस्तावित था। यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने के साथ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला है।
इसके अलावा, शेष बचे अधिकांश हितग्राहियों ने सरकारी पैसे को अपने अन्य निजी कार्यों, शादियों, कर्ज चुकाने या ऐशो-आराम की चीजों में खर्च कर दिया। उन्होंने न तो जमीन पर एक ईंट रखी और न ही नगर निगम को इस संबंध में कोई संतोषजनक जवाब दिया।
प्रशासनिक चेतावनी और नोटिस की अनदेखी का अंजाम रीवा नगर निगम ने इस लापरवाही को शुरुआत में सुधारात्मक अवसर देने का प्रयास किया। तत्कालीन निगमायुक्त डॉ. सौरभ सोनवणे के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बाद विभाग ने सभी संबंधित 34 हितग्राहियों को एक के बाद एक कई कानूनी नोटिस जारी किए।
इन नोटिसों के माध्यम से हितग्राहियों को दो अंतिम विकल्प दिए गए थे:
- या तो वे प्राप्त की गई सरकारी राशि को तुरंत ब्याज सहित नगर निगम के खाते में वापस जमा करें।
- अथवा वे अविलंब अपने आवास का निर्माण कार्य शुरू कर उसे पूरा करें।
इन कड़े नोटिसों और राजस्व वसूली (Revenue Recovery) व जेल भेजने की चेतावनियों का असर केवल 5 हितग्राहियों पर हुआ। इन 5 सजग नागरिकों ने डरकर या अपनी भूल सुधारते हुए आंशिक राशि नगर निगम में सरेंडर की। इनमें से तीन हितग्राहियों ने ₹20-20 हजार और दो हितग्राहियों ने ₹10-10 हजार की राशि जमा कराई। लेकिन शेष 29 लोगों ने इस प्रशासनिक चेतावनी को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया, जिसका नतीजा आज एफआईआर के रूप में सामने आया है।
नगर निगम की सख्त कार्रवाई: एफआईआर और वसूली की तैयारी
सोमवार को रीवा नगर निगम ने पुलिस प्रशासन से समन्वय स्थापित कर सभी 34 डिफाल्टरों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और सरकारी राशि के गबन की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया है। नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना समाज के अंतिम पायदान पर खड़े उस गरीब व्यक्ति के लिए है, जिसके सिर पर छत नहीं है।
इस तरह की धोखाधड़ी से न केवल सरकारी धन की हानि होती है, बल्कि उन वास्तविक हकदारों का अवसर भी मारा जाता है जो वर्षों से एक पक्के मकान की आस में कतार में खड़े हैं। नगर निगम ने साफ कर दिया है कि अब केवल एफआईआर पर ही बात नहीं रुकेगी, बल्कि भू-राजस्व बकाया (Land Revenue Dues) की तरह इन सभी आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क करके सरकारी पैसे की पाई-पाई वसूल की जाएगी।
दोषी हितग्राहियों की वार्ड-वार सूची
नगर निगम द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, जिन 34 हितग्राहियों पर कानूनी डंडा चला है, उनके नाम और संबंधित वार्ड नीचे सारणीबद्ध किए गए हैं:
- वार्ड 15 – संदीप सेन
- वार्ड 15 – शुभांगी शुक्ला
- वार्ड 38 – नारायण बख्शी
- वार्ड 38 – बबली चौधरी
- वार्ड 43 – राजेन्द्र प्रसाद विश्वकर्मा
- वार्ड 34 – सुशीला कुशवाहा
- वार्ड 39 – मोहम्मद सिद्दीकी
- वार्ड 05 – तेरसिया सोनी
- वार्ड 17 – नाजनीन मंसूरी
- वार्ड 31 – मनीष श्रीवास्तव
- वार्ड 31 – शाहिद अंसारी
- वार्ड 35 – गीता पासी
- वार्ड 35 – गुरुप्रसाद पासी
- वार्ड 35 – महावीर पासी
- वार्ड 35 – बेवा शांति पासी
- वार्ड 36 – नंद गोपाल सोनी
- वार्ड 37 – आशुतोष खरे
- वार्ड 03 – धर्मेंद बसोर
- वार्ड 03 – नटवर लाल बसोर
- वार्ड 40 – राकेश बंसल
- वार्ड 03 – निर्मल बसोर
- वार्ड 37 – भागवत प्रसाद चौरसिया
- वार्ड 41 – बेवा एमुनिशा
- वार्ड 40 – रामकुमार बंसल
- वार्ड 02 – वंशपति साकेत
- वार्ड 15 – मोहनलाल विश्वकर्मा
- वार्ड 08 – विजय पाल सिंह
- वार्ड 24 – ललिता शुक्ला
- वार्ड 05 – राजकुमार साकेत
- वार्ड 43 – सुदर्शन कोल
- वार्ड 16 – सुरेन्द्र वर्मा
- वार्ड 16 – सुशील कुमार वर्मा