रीवा में बाढ़ से भयानक तबाही: खतरे के निशान से ढाई मीटर ऊपर बह रही टमस नदी, 400 से ज्यादा गांव जलमग्न!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा जिले में कुदरत के कहर ने करीब एक दशक पुराने बाढ़ के खौफनाक मंजर को फिर से ताजा कर दिया है। बीते 24 घंटों के दौरान जिले भर में 187 मिलीमीटर (लगभग सवा सात इंच) से अधिक मूसलाधार वर्षा दर्ज की गई है, जिसने पूरे जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते जिले के सभी प्रमुख जलस्रोत, नदी-नाले और बराज लबालब भरकर उफान पर पहुंच चुके हैं। ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी कॉलोनियों तक हर जगह केवल पानी का कब्जा दिखाई दे रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार चालू वर्षा सत्र में अब तक कुल 426.8 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। शहर के निचले रिहायशी इलाकों में पानी भर जाने से नागरिकों को भीषण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। जिला प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन कदम उठाए जा रहे हैं।
बांधों के खुले गेट और उफान पर नदियां: टमस-बेलन खतरे के निशान से ऊपर
जिले में अनवरत हो रही मानसूनी बारिश के कारण बाणसागर परियोजना को छोड़कर विंध्य क्षेत्र के लगभग सभी छोटे-बड़े जलाशय और बांध अपनी पूरी जल भंडारण क्षमता तक भर चुके हैं। जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न बैराजों और बांधों से लगातार भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है:
- बीहर नदी बैराज: सभी 18 सुरक्षा गेट पूरी क्षमता से खोल दिए गए हैं।
- बकिया बराज: पानी के अत्यधिक दबाव को देखते हुए 14 गेट खोले गए हैं।
- मेजा एवं अंदवा बांध: मेजा के 5 और अंदवा जलाशय के 4 गेट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है।
वर्षा के तहसीलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो रायपुर कर्चुलियान, गुढ़ और त्योंथर क्षेत्र में सर्वाधिक 120-120 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा मनगवां में 110 मिमी, हुजूर में 105 मिमी, सेमरिया में 85 मिमी, सिरमौर में 70 मिमी और जवा में 45 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई है।
तराई क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी कही जाने वाली टमस (तमसा) नदी पटेहरा घाट के पास खतरे के निशान से करीब ढाई मीटर ऊपर बह रही है। इसी तरह बेलन नदी का जलस्तर भी खतरे के बिंदु को लांघकर लगभग 5 फीट ऊपर जा चुका है। बेलन की प्रमुख सहायक नदियां नैना और गोरमा भी लाल निशान के पार हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में जलप्रलय की स्थिति बन गई है।
तराई के 150 से अधिक गांव जलमग्न: दर्जनों बस्तियों का टूटा सड़क संपर्क
नदियों के उफान और बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण सबसे बुरा प्रभाव तराई अंचल की ग्राम पंचायतों पर पड़ा है। करीब दो दर्जन से अधिक पंचायतों के 50 से ज्यादा गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों और जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट चुका है। जिले भर के लगभग 150 से अधिक गांव इस समय प्रत्यक्ष रूप से बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।
रीवा और सीमावर्ती मऊगंज जिले के ऊपरी क्षेत्रों के करीब 400 से अधिक गांव भी आंशिक और पूर्ण रूप से प्रभावित हुए हैं। कई ग्रामीण इलाकों में मिट्टी के कच्चे मकानों के ढहने, मवेशियों के बहने और फसलों के जलमग्न होने की खबरें सामने आ रही हैं। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित चाकघाट क्षेत्र में भी सड़कों पर कई फीट पानी जमा होने से आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।
युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान: 2200 नागरिक सुरक्षित शिविरों में शिफ्ट
बाढ़ की भयावहता को देखते हुए जिला प्रशासन ने युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। स्थानीय प्रशासन, होमगार्ड और राहत बचाव दलों ने अब तक जलभराव में फंसे 136 से अधिक ग्रामीणों को बोट और लाइफ जैकेट की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला है।
विस्थापित और प्रभावित परिवारों के रहने, खाने-पीने और प्राथमिक चिकित्सा के लिए जिले भर में कुल 27 राहत शिविर (Relief Camps) स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में अब तक 2200 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित ठहराया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए क्लोरीन की गोलियां, ओआरएस पैकेट और जरूरी दवाइयों का वितरण कर रही हैं। प्रशासन द्वारा निचले इलाकों में लगातार मुनादी कराकर लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की हिदायत दी जा रही है।
मौसम विभाग का अलर्ट: आगामी पांच दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी
बुधवार की मध्यरात्रि से प्रारंभ हुआ मूसलाधार बारिश का सिलसिला रुक-रुककर जारी है। लगातार पानी गिरने और तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में बिजली के खंभे और पेड़ गिरने से विद्युत आपूर्ति भी गंभीर रूप से बाधित हुई है, जिससे अंधेरे में राहत कार्यों को संचालित करने में कठिनाई आ रही है।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार आगामी 5 दिनों तक रीवा और आसपास के संभागों में मानसूनी सिस्टम के सक्रिय रहने और भारी से अति भारी बारिश जारी रहने की संभावना जताई गई है। लगातार बारिश के इस पूर्वानुमान ने प्रशासन के लिए बचाव और सुरक्षा प्रबंधों की चुनौती को और अधिक बढ़ा दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे उफनते नदी-नालों, रपटों और जलमग्न पुलों को पार करने का बिल्कुल भी जोखिम न उठाएं।