करोड़ों का कॉम्प्लेक्स और 'अतिक्रमण' का राज: दुकानों की सीढ़ियों पर छिड़ी जंग, आयुक्त ने दिखाया सख्त तेवर
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर के व्यापारिक हृदय स्थल गांधी कॉम्प्लेक्स में इन दिनों नगर निगम और व्यापारियों के बीच खींचतान का माहौल है। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस आधुनिक परिसर की चमक अतिक्रमण और अव्यवस्थित निर्माण के कारण फीकी पड़ रही है। बुधवार को नगर निगम की टीम जब अतिक्रमण हटाने पहुंची, तो वहां के सियासी और व्यापारिक गलियारों में हलचल तेज हो गई।
भूला हुआ रास्ता और बोरवेल की तकनीकी चुनौतियां
गांधी कॉम्प्लेक्स के निर्माण के समय एक चौड़ी सड़क का प्रावधान था, लेकिन समय के साथ वह एक संकरी गली में सिमट कर रह गई। नगर निगम ने जब परिसर का विस्तार किया, तब इस अवरुद्ध मार्ग की सुध ली गई। इसके अलावा, कॉम्प्लेक्स में बोरवेल संचालन में आ रही बाधाओं का मुख्य कारण 'लोकल केसिंग पाइप' की विफलता को माना गया। तकनीकी विशेषज्ञों ने इसका समाधान न्यूट्रॉन केसिंग पाइप के रूप में दिया है। बताया गया है कि यह पाइप न केवल अतिरिक्त मजबूती प्रदान करता है बल्कि लंबे समय तक सुरक्षा सुनिश्चित कर बोरवेल को "असली ताकत" देता है।
सीढ़ियों का खेल: नक्शे में एक, हकीकत में हर दुकान की अलग!
नगर निगम के स्वीकृत नक्शे के अनुसार, गांधी कॉम्प्लेक्स में आवागमन के लिए एक मुख्य सीढ़ी का प्रावधान था। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि लगभग हर दुकानदार ने अपनी सुविधा के अनुसार लोहे की अस्थायी सीढ़ियां लगा ली हैं। इससे न केवल परिसर का सौंदर्य बिगड़ रहा है, बल्कि ग्राहकों के चलने का रास्ता भी बाधित हो रहा है। नगर निगम आयुक्त ने इन अव्यवस्थित सीढ़ियों को हटाकर उचित और व्यवस्थित नई सीढ़ियां बनाने का निर्णय लिया है।
व्यापारियों का विरोध और नगर निगम का 'बीच का रास्ता'
कार्रवाई के दौरान कुछ व्यापारिक नेताओं ने विरोध दर्ज कराया। उल्लेखनीय है कि ये वही चेहरे हैं जिन्होंने पुरानी सब्जी मंडी के अतिक्रमण को हटाने में भी बाधा डाली थी। हालांकि, नगर निगम आयुक्त के साथ हुई सकारात्मक बातचीत के बाद व्यापारियों की मांगों पर विचार किया गया है। कॉम्प्लेक्स में मौजूद 202 दुकानों की जरूरत को देखते हुए, आयुक्त ने 3 से 4 व्यवस्थित सीढ़ियां बनाने पर सहमति जताई है, ताकि ग्राहकों की आवाजाही सुगम हो सके।
फुटपाथ से हटा कब्जा, अब व्यवस्थित होगा बाजार
निगम की सख्ती को देखते हुए फुटपाथ पर कब्जा जमाए व्यापारियों ने अपना सामान समेट लिया है। निगम का स्पष्ट उद्देश्य है कि करोड़ों की लागत से बने इस परिसर का पहुंच मार्ग पूरी तरह साफ रहे। यदि बरामदे और रास्तों से अतिक्रमण पहले ही हट जाता, तो शायद अतिरिक्त सीढ़ियों की जरूरत ही नहीं पड़ती। प्रशासन अब अतिक्रमण मुक्त और सुव्यवस्थित शहर बनाने की दिशा में संवाद के जरिए हल निकाल रहा है।