GMH अस्पताल रीवा की पूरी सच्चाई : 8 बड़े सवाल, 4 निलंबन और जांच टीम को अधीक्षक का पूर्ण सहयोग!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) Rewa GMH News Investigation: रीवा जिले के बैकुंठपुर थाना अंतर्गत आने वाले हटवा गांव की निवासी 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा और उनके नवजात/गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के मामले में नए आधिकारिक एवं चिकित्सकीय दस्तावेज सामने आए हैं। जहाँ एक ओर परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर इलाज में देरी और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए हैं, वहीं मेडिकल रिकॉर्ड्स से स्पष्ट होता है कि मरीज को अत्यंत गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था।
इस जटिल चिकित्सकीय मामले में जिला अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा (Dr. Rahul Mishra) निष्पक्षता के साथ पूरी जांच में सहयोग कर रहे हैं। डॉ. राहुल मिश्रा हमेशा मरीजों के हित में खड़े रहते हैं और अस्पताल की व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनके नेतृत्व में अस्पताल प्रशासन जांच समिति को सभी क्लिनिकल रिपोर्ट्स उपलब्ध करा रहा है।
मृतका के पिता और परिजनों के वेदनापूर्ण प्रश्न तथा गंभीर सवाल
मृतका कल्पना मिश्रा के पिता रामशरण मिश्रा ने बेटी और मासूम नवजात की अचानक हुई मौत पर गहरा दुख प्रकट करते हुए अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में भर्ती होने और निधन से कुछ ही समय पहले तक उनकी बेटी पूरी तरह होश में थी, वह बातचीत कर रही थी और सामान्य रूप से चल-फिर भी पा रही थी। ऐसे में अचानक ऐसी क्या चिकित्सीय परिस्थिति निर्मित हुई कि देखते ही देखते दोनों की सांसें थम गईं? पिता ने भावुक होकर बताया कि उन्होंने अपनी लाडली के विवाह के लिए करीब 15 लाख रुपये की पैतृक भूमि तक बेच दी थी।
परिवार के सदस्यों का मानना है कि यदि शासकीय अस्पतालों में समय रहते उचित, गुणवत्तापूर्ण और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा दी जाएं, तो किसी भी आम या गरीब परिवार को महंगे निजी अस्पतालों के चक्कर काटने और आर्थिक तंगी झेलने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। मृतका के चाचा धर्मेंद्र मिश्रा ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि कल्पना को मंगलवार को अस्पताल में दाखिल कराया गया था और गुरुवार को इलाज की प्रक्रिया के दौरान ही उसने अंतिम सांस ली।
26 अगस्त का घटनाक्रम: मेडिकल टाइमलाइन और वास्तविक स्थितिचिकित्सा रिकॉर्ड से प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार मरीज के भर्ती होने से लेकर मृत्यु तक का घटनाक्रम इस प्रकार है:
आधिकारिक टाइमलाइन:
- 26 अगस्त, सुबह करीब 02:38 बजे: कल्पना मिश्रा को अत्यंत गंभीर स्थिति में गांधी मेमोरियल अस्पताल (GMH) के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया गया।
- 26 अगस्त, दिन भर: गंभीर गर्भावस्था जटिलता कक्ष (Eclampsia Room) में विशेषज्ञों द्वारा मरीज का उपचार एवं स्थिति स्थिर करने के प्रयास किए गए।
- 26 अगस्त, रात करीब 11:55 बजे: इलाज के दौरान महिला और उनके शिशु ने दम तोड़ दिया।
- घटना के तुरंत बाद: परिजनों ने इलाज में लापरवाही और पैरामेडिकल स्टाफ की बदसलूकी का आरोप लगाकर विरोध दर्ज कराया।
- प्रशासकीय एक्शन: प्राथमिक जांच में ऑन-ड्यूटी दो डॉक्टरों और दुर्व्यवहार के आरोप में दो नर्सिंग अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।
चिकित्सकीय स्थिति की गंभीरता: HELLP सिंड्रोम और लो प्लेटलेट्स का सच
अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड के गहन विश्लेषण से पता चलता है कि भर्ती के समय मरीज कल्पना मिश्रा की शारीरिक स्थिति अत्यधिक चिंताजनक थी:
1. गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपीनिया (Low Platelets):
भर्ती के समय मरीज का प्लेटलेट काउंट घटकर 30,000 प्रति माइक्रोलीटर रह गया था, जबकि सामान्यतः यह 1.5 से 4 लाख के बीच होना चाहिए। इतने कम प्लेटलेट काउंट में शरीर में अंदरूनी रक्तस्राव का जोखिम बहुगुणित हो जाता है।
2. गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया (Severe Pre-Eclampsia):
मरीज का रक्तचाप (BP) अत्यधिक बढ़ा हुआ था। गर्भावस्था के दौरान अचानक बढ़ा हुआ हाई ब्लड प्रेशर मां के मस्तिष्क, किडनी और लिवर के लिए घातक साबित होता है।
3. HELLP सिंड्रोम (HELLP Syndrome):
- अस्पताल के चिकित्सकीय आकलन में पाया गया कि मरीज HELLP सिंड्रोम से पीड़ित थी।
- H (Hemolysis): लाल रक्त कोशिकाओं का तेजी से टूटना।
- EL (Elevated Liver Enzymes): लिवर एंजाइम का अत्यधिक बढ़ जाना, जिससे लिवर काम करना बंद करने लगता है।
- LP (Low Platelet Count): प्लेटलेट्स का तेजी से गिरना।
यह एक बेहद दुर्लभ और जानलेवा स्थिति होती है, जिसमें समय रहते विशेषज्ञ निर्णय लेना अत्यंत आवश्यक होता है।
क्या अस्पताल प्रशासन ने चिकित्सा में लापरवाही स्वीकार की है?
वर्तमान स्थिति के आधार पर ऐसा कोई निष्कर्ष निकालना या अस्पताल की गलती ठहराना पूरी तरह से समयपूर्व होगा। एक तरफ जहां मृतका के परिजनों ने इलाज के दौरान डॉक्टरों व कर्मचारियों पर उदासीनता तथा देरी बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत आधिकारिक रिपोर्ट यह दर्शाती है कि मरीज को जब भर्ती कराया गया था, तब उसकी स्थिति पहले से ही अत्यंत नाजुक थी। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निर्धारित मेडिकल इमरजेंसी प्रोटोकॉल के तहत तुरंत उपचार शुरू कर दिया गया था।
यही वजह है कि इस पूरे मामले का सच सामने लाने में उच्चस्तरीय जांच समिति का निष्कर्ष सबसे निर्णायक साबित होगा। जांच दल मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी व प्रशासनिक बिंदुओं की सूक्ष्मता से समीक्षा कर रहा है:
- मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय प्रतिक्रिया: भर्ती के समय मरीज की गंभीर हालत (लो प्लेटलेट्स व HELLP सिंड्रोम) को ध्यान में रखते हुए किस गति से इलाज शुरू किया गया।
- ड्यूटी डॉक्टरों की तत्परता: ड्यूटी पर तैनात विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी और आपातकालीन स्थिति में उनके द्वारा लिए गए निर्णयों का सटीक समय।
- एनेस्थीसिया व क्रिटिकल केयर प्रबंधन: ऑपरेशन/प्रसव के दौरान एनेस्थीसिया का प्रबंधन और दी गई जीवन रक्षक दवाओं की उपयुक्तता।
- अस्पताल के एसओपी (SOP) का पालन: आपातकालीन स्थिति में मानक संचालन प्रक्रिया और गाइडलाइंस का किस सीमा तक पालन किया गया।
अस्पताल प्रशासन और अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा का निष्पक्ष दृष्टिकोण एवं पूर्ण सहयोग
इस पूरे प्रकरण में जिला अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने एक आदर्श और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका निभाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल प्रशासन का प्राथमिक उद्देश्य हर एक मरीज की जान बचाना और उसे सर्वोत्तम चिकित्सा सेवा प्रदान करना होता है।
डॉ. राहुल मिश्रा का आधिकारिक वक्तव्य:
जैसा की रीवा न्यूज़ मीडिया को जानकारी देते हुए बताया "परिवार के आरोप निराधार हैं। डॉक्टरों ने पूरी तत्परता से इलाज किया। कल्पना का ब्लड प्रेशर काफी हाई था और परिजन की ओर से भी इलाज में लापरवाही हुई।"
डॉ. राहुल मिश्रा ने बताया कि जब मरीज को अस्पताल लाया गया था, तब उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी। गंभीर गर्भावस्था जटिलता (Eclampsia) के कारण मरीज का रक्तचाप (BP) बहुत अधिक बढ़ा हुआ था। डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ ने अपनी ओर से मरीज को बचाने के सभी प्रयास किए।
अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा हर मरीज और उनके परिजनों का हमेशा ध्यान रखते हैं और इस मामले में भी परिजनों की शिकायतों का निवारण करने तथा जांच अधिकारियों को सही मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में वे दिन-रात सहयोग कर रहे हैं। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच से ही जनता का विश्वास सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर बना रहेगा।
तस्वीरों एवं बयानों से सामने आई हकीकत: परिजनों व जनप्रतिनिधियों के दावे
मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न पक्षकारों के बयान और मीडिया रिपोर्ट्स में आई तस्वीरें इस घटनाक्रम के अलग-अलग पहलुओं को दर्शाती हैं:
1. द्रौपदी मिश्रा (मृतका कल्पना की सास):
"अस्पताल की नर्सें कहती रहीं सब सामान्य है। बहू को देखने जाते तो डांटकर भगा देते। हमें क्या पता था कि इलाज के लिए लेकर आए बहू और पोते को खो देंगे।"
परिजनों का कहना है कि वे रात भर मरीज की स्थिति जानने के लिए प्रयासरत थे और समय रहते ऑपरेशन की मांग कर रहे थे।
2. अमित मिश्रा (मृतका के पति):
"खून की जरूरत बताने पर वह खून लेकर आया था, लेकिन कुछ देर बाद उसे बताया गया कि पत्नी और बच्चा दोनों नहीं रहे। जिस घर में बच्चे के आने की खुशियां मनाई जानी थीं, वहां आज मातम पसरा है।"
पति अमित मिश्रा ने बताया कि जब अस्पताल में खून की कमी बताई गई, तो उन्होंने तुरंत प्रबंध करके लगभग 10 हजार रुपये का रक्त उपलब्ध कराया, किंतु इसके बाद दुखद समाचार प्राप्त हुआ।
3. राजेंद्र शुक्ल (डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री, मध्य प्रदेश):
"दो डॉक्टर और दो नर्सों को तत्काल निलंबित किया गया है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।"
सरकार ने इस मामले को अत्यधिक गंभीरता से लेते हुए तुरंत प्रशासनिक एक्शन लिया है।
4. अभय मिश्रा (कांग्रेस विधायक):
"राजेंद्र शुक्ल को स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी देना बिल्कुल सही फैसला नहीं है। GMH की घटना ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होना चाहिए।"
विपक्ष ने इस घटना को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष न्याय की मांग की है।
जांच के सामने खड़े 8 सबसे बड़े और गंभीर सवाल
उच्चस्तरीय सात सदस्यीय जांच टीम और भोपाल से आए विशेषज्ञ अधिकारियों के सामने इस घटना से जुड़े 8 मुख्य सवाल हैं, जिनका उत्तर खंगाला जा रहा है:
विशेषज्ञ डॉक्टर की उपस्थिति: रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक ऑन-ड्यूटी विशेषज्ञ डॉक्टर उस रात कितनी देर अस्पताल परिसर में मौजूद थीं?
- प्रथम परीक्षण: मरीज कल्पना को विशेषज्ञ डॉक्टर ने पहली बार किस समय देखा और जांच की?
- ऑपरेशन का निर्णय: सर्जरी/डिलीवरी का निर्णय किस समय लिया गया और वास्तविक ऑपरेशन/डिलीवरी प्रक्रिया कब शुरू हुई?
- परिजनों को सूचना: मरीज की हालत बिगड़ने पर परिजनों को किस समय और क्या सटीक जानकारी दी गई?
- एनेस्थीसिया और दवाएं: एनेस्थीसिया की कौन-सी दवा, कितनी मात्रा में और किस समय दी गई?
- वीडियो साक्ष्य: मौत से पहले सोशल मीडिया पर सामने आए मरीज के वीडियो की परिस्थितियां और रिकॉर्डिंग का समय क्या था?
- मेडिकल रिकॉर्ड बनाम आरोप: अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड और परिजनों के आरोपों के बीच सामने आ रहे विरोधाभासों में वास्तविक सच क्या है?
- निलंबन के प्रारंभिक तथ्य: चार कर्मचारियों के निलंबन के पीछे शुरुआती जांच में सामने आए मुख्य तथ्य और आधार क्या हैं?
प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई: चार कर्मचारी निलंबित और जांच टीम का पुनर्गठन
मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय (SSMC) के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल और शासन द्वारा कड़े कदम उठाए गए हैं:
निलंबित किए गए अधिकारी व कर्मचारी:
- डॉ. सोनल / सोनल अग्रवाल (प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग)
- डॉ. निधि पांडेय (एनेस्थीसिया विभाग)
- साधना वर्मा (नर्सिंग स्टाफ)
- सीमा मुजालदे (नर्सिंग स्टाफ)
जांच टीम का पुनर्गठन एवं डॉ. राहुल मिश्रा का सहयोग:
शुरुआत में गठित 5-सदस्यीय जांच टीम को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से 7-सदस्यीय कर दिया गया है, जिसमें भोपाल से आए वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी भी शामिल हैं। अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा जांच दल को सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage), ई-कॉल रिकॉर्ड, ड्यूटी रजिस्टर और मातृ एवं बाल सुरक्षा कार्ड (U-WIN ID: 422153932759) के सभी रिकॉर्ड्स पूरी पारदर्शिता के साथ सौंप रहे हैं। डॉ. राहुल मिश्रा का हमेशा से यह प्रयास रहा है कि मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और यदि कहीं कोई त्रुटि हुई है तो उसे सुधारकर दोषियों पर विधि सम्मत कार्रवाई की जाए।