महिला प्रताड़ना, वित्तीय हेराफेरी और फ़र्ज़ी वरिष्ठता... जानिए कौन हैं रीवा 'रमसा' के नए साहब, जिनकी एंट्री से मचा हड़कंप!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) स्कूल शिक्षा विभाग का जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय रीवा एक बार फिर गंभीर विवादों और सुर्खियों के घेरे में आ गया है। भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के लिए पहले से चर्चित इस कार्यालय में एक बार फिर नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गई हैं।
हाल ही में हुए 28 लाख रुपए के चर्चित 'अनुरक्षण मद (फर्जी रंगाई-पुताई) घोटाले' की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि विभाग ने उसी विवादित 'रमसा' (राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान) की महत्वपूर्ण और बजट से लबालब कुर्सी पर एक ऐसे अफसर को बैठा दिया है, जो खुद योग्यता में कमतर हैं और जिन पर महिला कर्मचारी के उत्पीड़न से लेकर फर्जी वरिष्ठता, वित्तीय हेराफेरी व संदिग्ध विकलांगता प्रमाण पत्र तक के गंभीर दाग लग चुके हैं।
28 लाख का रंगाई-पुताई घोटाला: बिना काम दिए ही ठेकेदार का कर दिया था भुगतान
रीवा जिले में शिक्षा विभाग के तहत संचालित 'रमसा' (RAMSA) विभाग ही वह मुख्य ढांचा है, जिसके पास स्कूलों के निर्माण, जीर्णोद्धार और रखरखाव के लिए करोड़ों रुपए का बजट आवंटित होता है। इसी विभाग की कारस्तानी के कारण पूरे मध्यप्रदेश में रीवा की भारी फजीहत हुई थी।
- घोटाले का तरीका: बिना कोई काम कराए ही 28 लाख रुपए का बजट कागजों पर रंगाई-पुताई के नाम पर डकार लिया गया।
- सांठगांठ और बंदरबांट: खटखरी के एक चहेते ठेकेदार को 6 स्कूलों के जीर्णोद्धार और पुताई का टेंडर दिया गया। पहले से तय सेटिंग के तहत बिना धरातल पर काम हुए ही तत्कालीन डीईओ द्वारा राशि का भुगतान कर दिया गया।
- जांच में लीपापोती: इस महाघोटाले में तत्कालीन डीईओ, रमसा प्रभारी, एडीपीसी, प्राचार्य और लेखा अधिकारी तक की संलिप्तता सामने आई थी। कार्रवाई के नाम पर केवल दो कर्मचारियों को निलंबित किया गया, लेकिन बाद में वे भी बहाल हो गए और समूचे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
नियम ताक पर: 10+2 कैडर का पद, लेकिन हाई स्कूल के जूनियर प्राचार्य को जिम्मेदारी
आकांक्षा सोनी के शहडोल स्थानांतरण के बाद से रमसा प्रभारी का पद खाली पड़ा था। नियमानुसार, रमसा प्रभारी का पद हायर सेकेंडरी (10+2) प्राचार्य स्तर का होता है, जिसके लिए वरिष्ठ और योग्य प्रशासनिक अधिकारी की आवश्यकता होती है।
लेकिन शिक्षा विभाग ने सभी प्रशासनिक मापदंडों और वरिष्ठता सूची को दरकिनार करते हुए हाई स्कूल भुंडहा के प्राचार्य प्रवीण शुक्ला को रमसा का नया प्रभारी बना दिया है। इनके आदेश जारी होते ही विभाग के भीतर असंतोष और भ्रष्टाचार की नई बहस छिड़ गई है।
वरिष्ठता सूची में हेरफेर: 2400 रैंक पीछे होने के बाद भी कैसे बने प्राचार्य?
प्रवीन शुक्ला की पदोन्नति का मामला शुरुआत से ही विवादों में रहा है:
- संविलयन और वरिष्ठता की विसंगति: मूल रूप से निपटनिया में उच्च माध्यमिक शिक्षक रहे प्रवीन शुक्ला जब अंतरजिला निकाय तबादला कराकर रीवा आए, तो नियमानुसार उनकी वरिष्ठता रीवा में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से जोड़ी जानी थी। लेकिन मिलीभगत से उनकी वरिष्ठता संविलयन व मूल पदस्थापना से जोड़ दी गई।
- रैंक में भारी गड़बड़ी: विभाग द्वारा जारी प्रारंभिक वरिष्ठता सूची में उनका नाम करीब 2800वें स्थान के बाद था। बाद में संशोधित सूची में भी उनकी रैंक लगभग 2400 के आसपास थी।
- विवादित प्रमोशन: जब शासन द्वारा केवल 1000 शिक्षकों की पदोन्नति सूची जारी की गई, तो 2400 से अधिक रैंक होने के बावजूद प्रवीन शुक्ला को हाई स्कूल का प्राचार्य बना दिया गया। इसकी शिकायत लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और कमिश्नर रीवा संभाग से भी की गई, लेकिन राजनीतिक व प्रशासनिक रसूख के चलते पदोन्नति निरस्त नहीं हुई।
गंभीर आरोप: महिला जनशिक्षक ने लगाया था चरित्र व मानसिक प्रताड़ना का आरोप
- रीवा बीआरसीसी (BRCC) के पद पर रहते हुए प्रवीन शुक्ला पर बेहद गंभीर नैतिक आरोप लगे थे।
- तत्कालीन महिला जनशिक्षक रीना मिश्रा ने सीधे कलेक्टर से प्रवीन शुक्ला की लिखित शिकायत की थी।
- शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रवीन शुक्ला महिला कर्मचारियों पर गलत नीयत रखते हैं, उन्हें अनुचित मैसेज भेजते हैं और उनका मानसिक उत्पीड़न करते हैं।
- इस गंभीर शिकायत और बवाल के बाद तत्कालीन प्रशासन ने उन्हें बीआरसीसी रीवा के पद से हटा दिया था।
मऊगंज और रीवा में वित्तीय अनियमितता: वेतनवृद्धि रोकने व वसूली की हुई थी कार्रवाई
प्रवीन शुक्ला जहाँ-जहाँ पदस्थ रहे, वहाँ वित्तीय अनियमितताओं के आरोप उनके साथ चलते रहे:
- मऊगंज बीआरसीसी कार्यकाल: मऊगंज में बीआरसीसी रहते हुए वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायत आयुक्त लोक शिक्षण भोपाल तक पहुंची थी। जांच के बाद उन्हें आर्थिक अनियमितता का दोषी पाया गया था, जिसके चलते उन्हें पद से हटाया गया, राशि की वसूली निकाली गई और एक वेतनवृद्धि (Increment) रोकने की अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
- 50 लाख का घोटाला: रीवा में बीआरसीसी पद पर रहने के दौरान (2016 से 2019 तक) उन पर 50 लाख रुपए से अधिक की वित्तीय गड़बड़ी करने का आरोप उर्रहट निवासी चिंतामणि मिश्रा ने लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी।
भाई के अस्पताल से फर्जी 'विकलांगता प्रमाण पत्र' बनाने की शिकायत
- प्रवीन शुक्ला की शिकायतों की फेहरिस्त में सबसे चौकाने वाला पहलू उनका 'दिव्यांगता प्रमाण पत्र' है।
- तत्कालीन रीवा संभाग आयुक्त अशोक भार्गव से शिकायत दर्ज कराई गई थी कि प्रवीन शुक्ला ने अपना दिव्यांग प्रमाण पत्र शहडोल जिले से जारी करवाया है।
- शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि शहडोल के जिला अस्पताल में प्रवीन शुक्ला के सगे भाई पदस्थ थे, जिनकी मदद से यह फर्जी/संदिग्ध प्रमाण पत्र तैयार कराया गया ताकि सेवा लाभ और पदोन्नति में इसका अनुचित फायदा उठाया जा सके। हालांकि, इस जांच की रिपोर्ट भी आज तक सार्वजनिक नहीं की गई।
प्रशासनिक सवाल: क्या रीवा कलेक्टर उठाएंगे कोई कड़ा कदम?
जिस विभाग में करोड़ों के निर्माण कार्य, मेंटेनेंस और विकास मद का पैसा आता है, वहाँ लगातार वित्तीय घोटालों, महिला उत्पीड़न और फर्जीवाड़े के आरोपों से घिरे अधिकारी को फिर से सबसे महत्वपूर्ण पद सौंप दिया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या रीवा कलेक्टर इस मामले का संज्ञान लेते हुए इस विवादास्पद और नियम-विरुद्ध पदस्थापना पर कोई कड़ा प्रशासनिक कदम उठाएंगे, या फिर शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का यह खेल इसी तरह निर्बाध चलता रहेगा?