रीवा SGMH में हादसों की हैट्रिक: सुरक्षा जीरो, लापरवाही हीरो! संजय गांधी अस्पताल में लगातार दूसरे कांड से मचा हड़कंप, सवालों के घेरे में प्रबंधन, आखिर कब जागेगा प्रशासन?
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल (SGMH), रीवा से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। सोमवार की सुबह करीब 11:30 बजे अस्पताल परिसर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक 25 वर्षीय युवक ने अस्पताल की चौथी मंजिल से अचानक छलांग लगा दी।
हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद परिजनों, राहगीरों और अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों में भगदड़ मच गई। आनन-फानन में युवक को गंभीर अवस्था में कैजुअल्टी (इमरजेंसी वार्ड) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उसका इलाज कर रही है, हालांकि उसकी स्थिति बेहद नाजुक बताई जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर संजय गांधी अस्पताल के सुरक्षा दावों और प्रशासनिक सतर्कता की पोल खोलकर रख दी है।
कैसे घटी घटना? चश्मदीदों के सामने चौथी मंजिल से लगा दी छलांग
प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 11:15 बजे एक युवक अस्पताल की ऊपरी मंजिल (चौथी मंजिल) की मुंडेर पर दिखाई दिया। युवक को संदिग्ध स्थिति में हवा में लटकते और छलांग लगाने की मुद्रा में देखकर नीचे खड़े मरीज के परिजन और आम लोग चिल्लाने लगे।
लोगों ने की रोकने की कोशिश: नीचे जमा भीड़ ने लगातार चिल्लाकर युवक को समझाने और पीछे हटने का आग्रह किया।
- अचानक छलांग: युवक काफी देर तक चौथी मंजिल पर उहापोह की स्थिति में खड़ा रहा। इससे पहले कि कोई ऊपर जाकर उसे पकड़ पाता या सुरक्षाकर्मी उस तक पहुंच पाते, उसने अचानक नीचे छलांग लगा दी।
- अस्पताल में हड़कंप: जमीन पर गिरते ही युवक गंभीर रूप से लहूलुहान हो गया। घटना के बाद पूरे अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया।
सफाईकर्मी मां की आंखों के सामने घटा हादसा: अस्पताल में पसरा मातम
घटना के बाद जब प्राथमिक पहचान की प्रक्रिया शुरू हुई, तो पता चला कि छलांग लगाने वाले युवक का नाम अर्जुन रावत (उम्र 25 वर्ष) है।
सबसे दुखद पहलू यह रहा कि अर्जुन की मां इसी संजय गांधी अस्पताल में सफाई कर्मचारी (Safai Karmi) के रूप में पदस्थ हैं। घटना के समय वे अस्पताल के ही एक वार्ड में अपनी ड्यूटी पर तैनात थीं। जैसे ही उन्हें यह सूचना मिली कि चौथी मंजिल से कूदने वाला युवक उनका ही बेटा है, वे बदहवास होकर रोने लगीं।
मां का रो-रोकर बुरा हाल है और वे यह समझ नहीं पा रही हैं कि आखिर उनके बेटे ने इतना खौफनाक कदम क्यों उठाया। अर्जुन की मां और परिजनों ने बताया कि वह सुबह अस्पताल परिसर में ही घूम रहा था, लेकिन उसके मन में क्या चल रहा था, इसका किसी को अंदाजा नहीं था।
सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल: छत का दरवाजा कैसे खुला था?
इस दर्दनाक हादसे ने संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के प्रबंधन और वहां तैनात निजी सुरक्षा एजेंसी के ऊपर संगीन सवाल खड़े कर दिए हैं।
- छत का एक्सेस खुला क्यों था? किसी भी बहुमंजिला सरकारी या निजी अस्पताल की छतों और ऊपरी मंजिलों के दरवाजों को हमेशा बंद या लॉक रखा जाना चाहिए। सवाल यह उठता है कि चौथी मंजिल का दरवाजा खुला कैसे था?
- सुरक्षाकर्मी क्या कर रहे थे? करोड़ों रुपये का सालाना बजट अस्पताल की सुरक्षा पर खर्च किया जाता है। अस्पताल परिसर में जगह-जगह गार्ड्स तैनात रहते हैं।
- जब युवक काफी देर तक ऊपरी मंजिल पर संदिग्ध रूप से खड़ा था, तब सुरक्षाकर्मियों की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी?
सीसीटीवी और सर्विलांस सिस्टम: क्या अस्पताल की सुरक्षा निगरानी (CCTV Monitoring) इतनी कमजोर है कि कोई भी अवांछित व्यक्ति या मरीज आसानी से प्रतिबंधित क्षेत्रों तक पहुंच सकता है?
अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों का कहना है कि प्रबंधन की ढिलाई के कारण ही आए दिन संजय गांधी अस्पताल में इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
विवादों का केंद्र बनता संजय गांधी अस्पताल: लगातार हादसों से हड़कंप
रीवा का संजय गांधी अस्पताल पिछले कुछ समय से लगातार नकारात्मक वजहों से सुर्खियों में बना हुआ है। हाल ही में अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में हुई मौतों के मामले ने तूल पकड़ा था, जिसकी जांच के लिए राज्य स्तर की टीम ने दौरा किया था।
जांच टीम के जाते ही कुछ ही दिनों के भीतर यह दूसरी बड़ी घटना घट गई। पूर्व में भी इस अस्पताल की इमारतों से छलांग लगाने के मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिसके कारण स्थानीय लोग और मीडिया इसे "हादसों का अस्पताल" कहने लगे हैं। लगातार हो रही मौतों और हादसों से न सिर्फ डॉक्टरों की कार्यशैली बल्कि पूरे अस्पताल प्रशासन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई: क्या है अब तक की स्थिति?
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और चश्मदीदों के बयान दर्ज किए।
- कारणों का खुलासा नहीं: अर्जुन रावत ने आत्महत्या का प्रयास क्यों किया, इसका कोई स्पष्ट कारण (Suicide Note or Immediate Cause) अभी सामने नहीं आ पाया है।
- मानसिक तनाव या पारिवारिक कारण? पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। परिजनों से पूछताछ की जा रही है कि क्या अर्जुन किसी तरह के मानसिक अवसाद (Depression) या पारिवारिक विवाद से गुजर रहा था।
- सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं: पुलिस अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अर्जुन किस रास्ते से चौथी मंजिल तक पहुंचा था और उस समय आसपास कौन लोग मौजूद थे।
सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा और मेंटल हेल्थ प्रोटोकॉल की आवश्यकता
रीवा का यह हादसा सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह देश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की बुनियादी सुरक्षा खामियों को उजागर करता है।
जरूरी सुरक्षा सुधार:
- टेरेस और बालकनी लॉकिंग: अस्पताल की सभी ऊपरी मंजिलों और छतों पर मजबूत ग्रिल और बायोमेट्रिक या लॉक दरवाजे अनिवार्य किए जाएं।
- 24x7 गार्ड पेट्रोलिंग: संवेदनशील स्थानों जैसे लिफ्ट एरिया, सीढ़ियों और छतों के पास लगातार राउंड लगाने वाले सुरक्षाकर्मी तैनात हों।
- मेंटल हेल्थ हेल्पडेस्क: अस्पतालों में तनावग्रस्त मरीजों या उनके परिजनों के लिए काउंसिलिंग और सहायता केंद्र की व्यवस्था होनी चाहिए।