रीवा में नगर निगम कमिश्नर और भ्रष्ट कर्मचारियों की सांठगांठ से सज रहा अवैध गुमटी सिंडिकेट; पुराने कोर्ट परिसर से वेंकट भवन तक भू-माफिया हावी
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक साख को बट्टा लगाने में खुद नगर निगम का अमला कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। विंध्य का केंद्र कहे जाने वाले रीवा शहर में आज सार्वजनिक और सरकारी जमीनों की जो दुर्दशा है, उसकी सीधी जिम्मेदारी नगर निगम कमिश्नर और उनके मातहत काम करने वाले उड़नदस्ते (अतिक्रमण विरोधी दस्ते) की है। शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाकों—जैसे पुराना न्यायालय भवन परिसर, कोठी शिव मंदिर के सामने, और शिल्पी प्लाजा के पीछे—लोहे की भारी-भरकम गुमटियां रातों-रात आकर सज जाती हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की आंखें बंद रहती हैं।
अतिक्रमण प्रभारी की मेहनत पर पानी फेर रहे निगम के ही कुछ जयचंद!
"अतिक्रमण प्रभारी सुखेन्द्र चतुर्वेदी की कार्रवाई पर भ्रष्ट कर्मचारियों का ग्रहण: चंद रुपयों के लिए बेच रहे शहर का सुकून"
इस पूरे मामले में एक और हैरान करने वाला पहलू सामने आया है। नगर निगम के अतिक्रमण प्रभारी सुखेन्द्र चतुर्वेदी द्वारा शहर को व्यवस्थित करने और इन अवैध कब्जों को हटाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन निगम के ही कुछ भ्रष्ट और बिके हुए कर्मचारी उनके इन अभियानों की पीठ में छुरा घोंप रहे हैं। सुखेन्द्र चतुर्वेदी का दस्ता जैसे ही कार्रवाई करके आगे बढ़ता है, वैसे ही ये भ्रष्ट कर्मचारी पर्दे के पीछे से अवैध दुकानदारों से सांठगांठ कर, मोटी रकम (रिश्वत) की वसूली कर उन्हें दोबारा दुकान लगाने की खुली शह दे देते हैं।
इस अंदरूनी भ्रष्टाचार का सीधा खामियाजा रीवा की जनता भुगत रही है। चूंकि यह शहर का मुख्य बाजार क्षेत्र है, इसलिए शाम होते ही यहाँ पैर रखने तक की जगह नहीं बचती। चंद भ्रष्ट कर्मचारियों की शह पर मुख्य सड़कों तक पसरे इन अवैध ठेले और गुमटियों के कारण पूरी यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाती है, जिससे शाम के वक्त राहगीरों और वाहन चालकों को भीषण जाम और दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
"जानकारी के बाद भी आयुक्त अक्षत जैन की चुप्पी: क्या अपनी जिम्मेदारी भूल गए साहब?"
रीवा नगर निगम के मुखिया और निगम आयुक्त अक्षत जैन को जागरूक नागरिकों और पीड़ितों द्वारा पुराने कोर्ट परिसर के अंशु फोटोकॉपी, पंडित जी एमपी ऑनलाइन के अवैध निर्माणों और वेंकट भवन के सामने सड़क घेरकर सजे मेवाड़ आइसक्रीम-फालूदा सिंडिकेट की एक-एक लिखित और मौखिक जानकारी दी जा चुकी है। लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी कमिश्नर अक्षत जैन के दफ्तर से भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों पर एक भी बुलडोजर नहीं चला।
अब जनता सोशल मीडिया और चौक-चौराहों पर यह पूछ रही है कि क्या रीवा के नगर निगम आयुक्त अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को पूरी तरह भूल चुके हैं? या फिर उनके नीचे काम करने वाले उड़नदस्ते के भ्रष्ट कर्मचारी अपनी 'मंथली' की ताकत से कमिश्नर साहब की फाइलों और फैसलों को भी दबाने में कामयाब हो गए हैं? जब शहर की सबसे बड़ी कुर्सी पर बैठा जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानकर भी अनजान बना रहे, तो फिर रीवा की कानून व्यवस्था और सुगम यातायात भगवान भरोसे ही है।
यह अंधापन प्राकृतिक नहीं, बल्कि पूरी तरह प्रायोजित है। आरोप हैं कि नगर निगम के संरक्षण में एक ऐसा समानांतर सिंडिकेट फल-फूल रहा है, जो सरकारी जमीनों को जागीर समझकर बेच रहा है। जब आम नागरिक या जागरूक पत्रकार इस संबंध में शिकायत करते हैं, तो कमिश्नर कार्यालय से केवल 'जांच का आश्वासन' मिलता है। सवाल यह उठता है कि क्या नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों को इस बात की भनक नहीं है कि उनके नाक के नीचे सरकारी जमीन की दलाली हो रही है? या फिर इस मलाईदार सिंडिकेट के तार ऊपर तक जुड़े हुए हैं?
ऐतिहासिक धरोहर पर दाग: वेंकट भवन के सामने मुख्य रोड पर मेवाड़ आइसक्रीम और फालूदा सिंडिकेट का अवैध कब्जा किसके इशारे पर फल-फूल रहा है?
रीवा के गौरवशाली इतिहास के प्रतीक वेंकट भवन के सामने से गुजरने वाली मुख्य सड़क इन दिनों नगर निगम के भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बन चुकी है। इस मुख्य मार्ग पर मेवाड़ आइसक्रीम और फालूदा के ठेले और दुकानों वालों ने पूरी की पूरी रोड को ही अपनी बपौती समझकर उस पर अवैध कब्जा जमा लिया है। व्यस्ततम सड़क होने के बावजूद यहाँ सरेआम फुटपाथ से लेकर आधी सड़क तक दुकानें फैला दी गई हैं, जिससे हर वक्त यहाँ ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मार्ग पर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ न तो नगर निगम का कोई चालानी दस्ता पहुंचता है और न ही कभी इनकी गुमटियों को जब्त करने की हिम्मत दिखाई जाती है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यहाँ से हर महीने नगर निगम के कर्मचारियों के लिए एक मोटी रकम (फिक्स मंथली) तय है। इसी "महीना सेट" होने का नतीजा है कि इस सड़क पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होती, बल्कि इसके विपरीत हर दूसरे दिन टीन का शेड डालकर नई-नई गुमटियां खुलती जा रही हैं। रीवा की ऐतिहासिक धरोहर के सामने इस तरह सरेआम सड़क घेरकर दुकान चलाना और उड़नदस्ते का मूकदर्शक बने रहना साफ़ इशारा करता है कि रिश्वतखोरी का यह खेल कितने बड़े पैमाने पर खेला जा रहा है।
Ground Report - पुराना कोर्ट परिसर: बार-बार शिकायत के बाद भी अंशु फोटोकॉपी और पंडित जी एमपी ऑनलाइन पर मेहरबानी क्यों की जा रही है?
अगर इस भ्रष्टाचार का जीवंत प्रमाण देखना हो, तो पुराने कोर्ट परिसर का रुख कीजिए। यहाँ अंशु फोटोकॉपी और पंडित जी एमपी ऑनलाइन जैसे रसूखदार अतिक्रमणकारियों ने पूरी व्यवस्था को अपनी जेब में रख लिया है। स्थानीय दुकानदारों और पीड़ितों के अनुसार, इन दोनों के खिलाफ नगर निगम प्रशासन, जोन कार्यालय और यहाँ तक कि सीधे कमिश्नर से लिखित में कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं। लेकिन हर बार कार्रवाई की फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
अंशु फोटोकॉपी के संचालक ने न केवल खुद के लिए जगह घेरी है, बल्कि आसपास की सार्वजनिक भूमि को भी प्रभावित कर रखा है। वहीं, पंडित जी एमपी ऑनलाइन के नाम पर मंदिर के ठीक बगल की संवेदनशील जमीन को घेरकर व्यावसायिक गतिविधियां धड़ल्ले से संचालित की जा रही हैं। यह आस्था और कानून दोनों का सीधा मखौल है। रसूख का आलम यह है कि जब भी अतिक्रमण विरोधी दस्ता शहर में घूमता है, तो इन दुकानों के पास आकर उनकी गाड़ियां यू-टर्न ले लेती हैं। इन विशिष्ट दुकानदारों पर रीवा नगर निगम की यह विशेष 'कृपा' साबित करती है कि यहाँ नियम सबके लिए समान नहीं हैं।
बिजली विभाग के पास लैंड ग्रैबिंग: टीन का शेड डालकर 2-3 अवैध दुकानों का समानांतर कारोबार कैसे स्थापित हो गया?
पुराने कोर्ट परिसर की अराजकता यहीं खत्म नहीं होती। इसी सिंडिकेट के पैर इतने पसार चुके हैं कि मंदिर के बगल से होते हुए सीधे बिजली विभाग के पास की बेशकीमती जमीन पर डाका डाला जा चुका है। पंडित जी एमपी ऑनलाइन और उनके सहयोगियों द्वारा बिजली विभाग के ठीक पास कंक्रीट और टीन का शेड डालकर रातों-रात 2 से 3 नई अवैध दुकानें खड़ी कर ली गई हैं।
सरकारी जमीनों पर इस तरह का पक्का या अर्ध-पक्का कब्जा बिना स्थानीय इंजीनियरों, पटवारियों और नगर निगम के बाजार विभाग की मिलीभगत के असंभव है। मजेदार बात यह है कि इन अवैध दुकानों को न केवल स्थापित होने दिया गया, बल्कि इन्हें आगे भारी-भरकम किराए पर देकर हर महीने लाखों रुपये कमाए जा रहे हैं। सरकारी जमीन, सरकारी संसाधन, लेकिन मुनाफा कुछ चुनिंदा भू-माफियाओं और भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों की जेब में! रीवा नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी इस लैंड ग्रैबिंग पर धृतराष्ट्र बने बैठे हैं।
कोर्ट कैंपस पार्किंग का काला सच: सुरक्षा घेरे के नीचे नशे (Corex) का अंबार और प्रशासनिक अंधापन रीवा को कहाँ ले जा रहा है?
इस पूरे अतिक्रमण घोटाले का सबसे डरावना और सामाजिक रूप से घातक पहलू पुराना कोर्ट कैंपस की पार्किंग के नीचे देखने को मिलता है। जहाँ एक तरफ अवैध गुमटियों से रास्ते रोके गए हैं, वहीं दूसरी तरफ इसी अव्यवस्था की आड़ में असामाजिक तत्वों का डेरा बन चुका है। कोर्ट कैंपस की पार्किंग के निचले हिस्से में प्रतिबंधित नशीली सीरप (Corex) की खाली बोतलों का पूरा अंबार लगा हुआ है।
यह इस बात का सबूत है कि यह क्षेत्र केवल अवैध व्यापार का केंद्र नहीं है, बल्कि अपराधियों और नशेड़ियों की सुरक्षित पनाहगाह बन चुका है। जिस कोर्ट परिसर से न्याय की उम्मीद की जाती है, उसकी पार्किंग के नीचे नशे का यह समानांतर साम्राज्य नगर निगम और स्थानीय पुलिस प्रशासन की घोर विफलता को दर्शाता है। अतिक्रमणकारी इन असामाजिक तत्वों को संरक्षण देते हैं और बदले में ये तत्व यहाँ आने वाले आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं को डराते-धमकाते हैं। क्या नगर निगम कमिश्नर किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं?
उड़नदस्ता या अवैध वसूली दस्ता?: सरकारी गाड़ी की आड़ में हर महीने लाखों रुपये की फिक्स मंथली कैसे वसूली जा रही है?
रीवा नगर निगम का उड़नदस्ता, जिसका मूल काम शहर को अतिक्रमण मुक्त रखना और यातायात सुगम बनाना है, वह अब पूरी तरह से "अवैध वसूली दस्ता" बन चुका है। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और नाम न छापने की शर्त पर कुछ छोटे दुकानदारों ने जो खुलासे किए हैं, वे चौकाने वाले हैं। आरोप है कि उड़नदस्ता की जो पीली-सफेद सरकारी गाड़ी रोज शहर में हूटर बजाते हुए घूमती है, उसका उद्देश्य अतिक्रमण हटाना नहीं, बल्कि अपनी 'मंथली' (हफ्ता वसूली) की किस्त तय करना है।
उड़नदस्ते के कर्मचारी हर महीने इन अवैध दुकानदारों के पास आते हैं, गाड़ी रुकती है, 'लेन-देन' की रस्म पूरी होती है और गाड़ी आगे बढ़ जाती है। जो दुकानदार पैसे देने से मना करता है, उसकी गुमटी को जब्त कर लिया जाता है और जो सिंडिकेट का हिस्सा बन जाता है, उसे मनचाही जगह पर कब्जा करने की खुली छूट दे दी जाती है। यह पूरी तरह से संगठित अपराध की श्रेणी में आता है।
जनता के तीखे सवाल और निष्कर्ष: क्या रीवा की जनता को भ्रष्ट तंत्र से मुक्ति मिलेगी या फाइलों में दबेगा यह महाघोटाला?
रीवा की जागरूक जनता अब इस गुंडागर्दी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब एक गरीब ठेले वाले को सड़क किनारे फल बेचने पर नगर निगम का डंडा सहना पड़ता है, उसका सामान जब्त कर लिया जाता है, तो फिर अंशु फोटोकॉपी, पंडित जी एमपी ऑनलाइन और वेंकट भवन के सामने मुख्य मार्ग को घेरने वाले मेवाड़ आइसक्रीम सिंडिकेट पर बुल्डोजर क्यों नहीं चलता?
यह पूरी रिपोर्ट रीवा नगर निगम के कमिश्नर, उड़नदस्ते के प्रभारी और बाजार विभाग के मुंह पर एक करारा तमाचा है। यदि प्रशासन में थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो तत्काल प्रभाव से:
- वेंकट भवन मार्ग और पुराने कोर्ट परिसर की सभी अवैध टीन शेड दुकानों को ध्वस्त किया जाए।
- अंशु फोटोकॉपी और पंडित जी एमपी ऑनलाइन के कब्जों की निष्पक्ष जांच कराकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो।
- उड़नदस्ते के उन कर्मचारियों को चिह्नित किया जाए जो हर महीने वसूली की गाड़ी दौड़ाते हैं।
रीवा न्यूज़ मीडिया इस पूरे मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है। जब तक रीवा की जनता को इन भ्रष्ट अधिकारियों और अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्ति नहीं मिलती, हमारी कलम रुकने वाली नहीं है।