चाय की चुस्की के पीछे अवैध जाम का कारोबार: रीवा में 'सुरेश टी-स्टॉल' पर पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक, 2 दबोचे
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य अंचल के मुख्य व्यावसायिक और शैक्षणिक केंद्र रीवा में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले असामाजिक तत्वों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बेलहा मोड़ क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ रोजाना की तरह चाय और नाश्ते की आड़ में बेखौफ तरीके से अवैध शराब बेचने का गोरखधंधा संचालित किया जा रहा था।
सोमवार की देर रात विश्वविद्यालय थाना पुलिस की एक विशेष टीम ने सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए बेलहा मोड़ स्थित "सुरेश टी-स्टॉल" पर अचानक छापेमारी की। इस गुप्त सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस द्वारा बारीकी से ली गई तलाशी में दुकान परिसर और गुप्त ठिकानों से बड़ी मात्रा में देशी व अंग्रेजी शराब का जखीरा बरामद किया गया। पुलिस ने मौके से दो शातिर संचालकों को रंगे हाथों हिरासत में लिया है और अवैध बिक्री से प्राप्त नकदी भी जब्त की है।
चाय की चुस्की के पीछे अवैध जाम छलकाने का रैकेट
बेलहा मोड़ पर स्थित यह चाय की दुकान बाहरी तौर पर आम राहगीरों और छात्रों के लिए सिर्फ चाय-नाश्ते का केंद्र दिखती थी, लेकिन अंदर ही अंदर यहाँ आबकारी नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए अवैध मयखाने का संचालन हो रहा था।
पुलिस को काफी समय से यह भनक मिल रही थी कि शहर के कुछ प्रमुख मार्गों और तिराहों पर स्थित खान-पान की छोटी दुकानों का इस्तेमाल असामाजिक तत्वों द्वारा अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। सोमवार (10 अगस्त) को थाना प्रभारी निरीक्षक हितेन्द्रनाथ शर्मा को एक विश्वसनीय मुखबिर के माध्यम से ठोस सूचना प्राप्त हुई कि बेलहा मोड़ के पास संचालित सुरेश टी-स्टॉल में भारी मात्रा में अवैध शराब बिक्री के उद्देश्य से छिपाकर रखी गई है।
पुलिसिया कार्रवाई और जब्त की गई शराब का पूरा ब्योरा
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी के मार्गदर्शन में उप-निरीक्षकों और आरक्षकों की एक संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने बिना कोई समय गंवाए चिन्हित दुकान की घेराबंदी कर दबिश दी। तलाशी अभियान के दौरान पुलिस को दुकान के भीतर से देशी प्लेन मसाला शराब की 95 शीशियां और अंग्रेजी शराब की 21 बोतलें बरामद हुईं।
इस तरह पुलिस ने कुल मिलाकर 116 शीशियां अवैध शराब जब्त कीं, जिसकी बाजार में कुल अनुमानित कीमत 13 हजार 400 रुपए आंकी गई है। इसके अलावा दुकान के काउंटर से शराब की अवैध बिक्री से अर्जित की गई 3 हजार 800 रुपए की नकद राशि भी बरामद की गई है। पुलिस ने मौके से बरामद सभी मदिरा बोतलों और नकदी को आबकारी जब्ती पत्रक तैयार कर अपने कब्जे में ले लिया है।
गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक इतिहास और तफ्तीश
छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से दो युवकों को दबोचा जो उस समय ग्राहकों को अवैध रूप से शराब उपलब्ध करा रहे थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पहला आरोपी धीरज सिंह (उम्र 27 वर्ष) पिता अखिलेश सिंह है, जो करदा गाँव (थाना मनगवां) का निवासी है। वहीं दूसरा आरोपी अजय कुमार बंसल (उम्र 26 वर्ष) पिता राकेश बंसल है, जो रतहरा स्थित बंसल कॉलोनी (थाना समान) का रहने वाला है।
थाना प्रभारी हितेन्द्रनाथ शर्मा ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की सुसंगत धाराओं (धारा 34) के तहत प्रकरण पंजीकृत कर लिया गया है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में चाय की दुकान का कवर लेकर रात के समय महंगे दामों पर शराब बेचते थे। पुलिस मंगलवार को दोनों आरोपियों को सक्षम न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की विधिक प्रक्रिया पूरी कर रही है।
विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में आदतन अपराध और प्रशासनिक चुनौतियाँ
यह कोई पहला मौका नहीं है जब विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में किसी वैध व्यावसायिक प्रतिष्ठान की आड़ में अवैध नशीले पदार्थों या शराब का कारोबार पकड़ा गया हो। इससे पूर्व भी इसी थाना क्षेत्र में एक कोल्ड ड्रिंक और मिनरल वॉटर की दुकान पर दबिश देकर पुलिस ने भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की थी।
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से एक ओर जहाँ पुलिस की सक्रियता नजर आती है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा होता है कि पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद अपराधी इतने बेखौफ कैसे हैं?
शैक्षणिक संस्थानों और आवासीय कॉलोनियों के निकट इस प्रकार के अवैध अड्डों का फलना-फूलना युवाओं और छात्रों के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस को केवल छिटपुट विक्रेताओं पर ही नहीं, बल्कि उन्हें शराब की सप्लाई देने वाले मुख्य आपूर्तिकर्ताओं पर भी कड़ा प्रहार करना होगा।
स्थानीय निवासियों की चिंताएँ: चोरहटा और बेला रोड पर बढ़ता नेटवर्क
सुरेश टी-स्टॉल पर हुई इस सफल कार्रवाई के बाद क्षेत्र के नागरिकों ने राहत की सांस तो ली है, लेकिन साथ ही नए नेटवर्क को लेकर अपनी चिंताएँ भी जाहिर की हैं।
प्राप्त जानकारियों और स्थानीय शिकायतों के अनुसार, केवल बेलहा मोड़ ही नहीं, बल्कि चोरहटा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बेला रोड, बाईपास और हाईवे के किनारे स्थित कई छोटे-छोटे टी-स्टॉल, ढाबे और गुमटियों में देर रात तक अवैध रूप से शराब की उपलब्धता बनी रहती है।
नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि हाईवे से सटे ढाबों और टी-स्टॉलों की नियमित सघन चेकिंग की जाए। साथ ही किराना, चाय और कोल्ड्रिंक की आड़ में चल रही गुमटियों के मालिकों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य किया जाए और आबकारी एक्ट में बार-बार पकड़े जाने वाले अपराधियों की जमानत रद्द करने जैसे कठोर कदम उठाए जाएँ।
आबकारी अधिनियम के तहत सख्त कानूनी प्रावधान
मध्यप्रदेश शासन द्वारा अवैध मदिरा के परिवहन, संग्रहण और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आबकारी कानून के तहत बिना लाइसेंस के किसी भी परिसर में शराब रखना अथवा बेचना गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध है।
आबकारी अधिनियम की धारा 34(1) के तहत बिना लाइसेंस के मदिरा का संग्रहण अथवा विक्रय करने पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं धारा 34(2) के तहत यदि जब्त की गई शराब की मात्रा 50 बल्क लीटर से अधिक होती है, तो यह गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है, जिसमें न्यूनतम 1 वर्ष से लेकर 3 वर्ष तक की कैद हो सकती है।
विश्वविद्यालय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में यह भी जाँच की जा रही है कि आरोपियों को यह शराब किसी लाइसेंसी दुकान से सप्लाई की जा रही थी या यह अवैध तरीके से दूसरे जिलों से लाकर बेची जा रही थी। यदि इसमें किसी लाइसेंसधारी ठेकेदार की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।