SP से लेकर चौकी तक के रेट फिक्स! रीवा में नशे के काले कारोबार का बड़ा भंडाफोड़, हिला देने वाले आरोप

 
रीवा के सेमरिया, बरौ और बीड़ा में परचून की तरह बिक रहा नशा। आम आदमी पार्टी ने आबकारी विभाग और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, दी आंदोलन की चेतावनी।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा में अवैध शराब की शिकायत कहाँ करें, मध्य प्रदेश में प्रतिबंधित कोरेक्स सिरप कैसे बिक रही है, सेमरिया और बरौ में नशे के खिलाफ आंदोलन कब है, आबकारी अधिकारी पर भ्रष्टाचार के क्या आरोप हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब कैसे रोकें, रीवा पुलिस प्रशासन पर हफ्ता वसूली के आरोप क्या हैं, युवाओं में बढ़ते नशे के दुष्परिणाम क्या हैं, अवैध नशा माफिया के खिलाफ कोर्ट की क्या गाइडलाइन है

रीवा में नशे का बढ़ता संजाल और जनाक्रोश
विंध्य क्षेत्र का केंद्र बिंदु माना जाने वाला रीवा जिला इन दिनों एक बेहद गंभीर और संवेदनशील समस्या से जूझ रहा है। जिले के शहरी और विशेष रूप से ग्रामीण अंचलों में नशीले पदार्थों और अवैध शराब का कारोबार इस कदर फैल चुका है कि इसने अब एक संगठित उद्योग का रूप ले लिया है। युवाओं की रगों में घुलता यह धीमा जहर न केवल उनकी शारीरिक और मानसिक क्षमता को नष्ट कर रहा है, बल्कि हजारों परिवारों को आर्थिक और सामाजिक रूप से बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर चुका है। स्थानीय स्तर पर उठ रही विरोध की आवाजें यह स्पष्ट करती हैं कि यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो स्थिति हाथ से बाहर निकल जाएगी।

सेमरिया, बरौ और बीड़ा क्षेत्र में हालात चिंताजनक
ग्रामीण क्षेत्रों में किराना सामान की तरह उपलब्धता
राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा साझा की गई जानकारियों के अनुसार, जिले के सेमरिया, बरौ और बीड़ा जैसे विकासखंड व ग्रामीण क्षेत्र इस अवैध धंधे के सबसे बड़े गढ़ बन चुके हैं। इन इलाकों के हालात इस कदर बदतर हैं कि जहाँ एक ओर शासन-प्रशासन बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने में विफल साबित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर अवैध देशी-विदेशी शराब और अत्यधिक नशीली व प्रतिबंधित कोरेक्स (Corex) सिरप की उपलब्धता बेहद आसान हो गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन क्षेत्रों में नशा इस तरह धड़ल्ले से मिल रहा है, मानो किसी परचून (किराने) की दुकान पर दैनिक राशन का सामान बिक रहा हो। बिना किसी विधिक परमिट या लाइसेंस के, खुलेआम चौराहों और बस्तियों में इस अवैध कारोबार का संचालन किया जा रहा है।

प्रशासनिक तंत्र और आबकारी विभाग पर संगीन आरोप
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे स्याह पहलू यह है कि यह सब कुछ बंद कमरों में नहीं, बल्कि सार्वजनिक रूप से हो रहा है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद शर्मा ने एक प्रेस वार्ता के माध्यम से सीधे तौर पर कानून व्यवस्था और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है। उनका आरोप है कि इस समानांतर काले साम्राज्य को खाकी और प्रशासनिक अमले का कथित रूप से मूक और सक्रिय संरक्षण प्राप्त है।

भ्रष्टाचार का कथित सिंडिकेट ढांचा (मासिक अनुमान):
├── पुलिस नेतृत्व (जिला स्तर) ──► ₹50 लाख फिक्स बंधी
├── थाना प्रभारी (TI स्तर)     ──► ₹02 लाख प्रति थाना क्षेत्र
└── स्थानीय पुलिस चौकी       ──► ₹50 हजार प्रति चौकी क्षेत्र

आबकारी विभाग की कार्यशैली पर सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान जिला आबकारी अधिकारी अनिल जैन की भूमिका पर भी तीखे प्रहार किए गए। आरोप लगाया गया है कि जिन कंधों पर जिले में अवैध मदिरा के निर्माण, परिवहन और बिक्री को रोकने का कानूनी दायित्व है, वे स्वयं पर्दे के पीछे से बड़े शराब सिंडिकेट और ठेकेदारों के साथ हितों के टकराव (Conflict of Interest) व कथित साझेदारी में संलिप्त हैं। जब नियामक संस्थाओं के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारी ही जांच के दायरे में आ जाएं, तो निचले अमले से निष्पक्ष और कड़क कार्रवाई की अपेक्षा करना बेमानी हो जाता है। यही कारण है कि समय-समय पर होने वाली छोटी-मोटी गिरफ्तारियां केवल कागजी खानापूर्ति और दिखावा बनकर रह गई हैं, जबकि मुख्य सरगना हमेशा पुलिस की पहुंच से दूर रहते हैं।

सामाजिक ताने-बाने पर प्रहार और घरेलू हिंसा में इजाफा
नशे के इस बेकाबू तांडव का सबसे दर्दनाक असर ग्रामीण समाज की महिलाओं और बच्चों पर देखने को मिल रहा है। सेमरिया, बरौ और बीड़ा के गांवों से आ रही रिपोर्ट बताती हैं कि हर गली-कूचे में शराब की उपलब्धता के कारण घरेलू हिंसा के मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है।

पारिवारिक विघटन: दैनिक मजदूरी और खेती से होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा पुरुष वर्ग नशे में उड़ा रहा है, जिससे परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो रही है।
सुरक्षा पर खतरा: शाम ढलते ही गांवों के मुख्य मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर पियक्कड़ों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है, जिससे माताओं-बहनों का घर से निकलना दूभर हो गया है।
भविष्य पर संकट: रीवा का स्कूल और कॉलेज जाने वाला युवा वर्ग महंगी नशीली दवाओं और प्रतिबंधित कफ सिरप के चंगुल में फंसकर अपराध की दुनिया की ओर कदम बढ़ा रहा है।

विपक्षी दल की मुख्य मांगें और सीबीआई जांच की पैरवी
इस गंभीर जनहित के मुद्दे को लेकर राजनीतिक और नागरिक संगठनों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। प्रेस वार्ता के माध्यम से मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें शासन के समक्ष रखी गई हैं:

उच्च स्तरीय न्यायिक या केंद्रीय जांच: रीवा जिले में फैले इस अंतःप्रांतीय नशे के नेटवर्क और उसमें शामिल सफेदपोशों व अधिकारियों के गठजोड़ की जांच माननीय हाईकोर्ट के सिटिंग जज या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए।

तत्काल निलंबन व आय से अधिक संपत्ति की जांच: जिला आबकारी अधिकारी अनिल जैन सहित उन तमाम संदिग्ध पुलिस अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जाए, जिनकी सरपरस्ती में यह धंधा फल-फूल रहा है। साथ ही, इनके कार्यकाल के दौरान अर्जित संपत्तियों की 'आय से अधिक संपत्ति' (Disproportionate Assets) के कोण से जांच हो।

विशेष टास्क फोर्स (STF) का गठन: सेमरिया, बरौ और बीड़ा क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से आबकारी और पुलिस की संयुक्त पैरामिलिट्री या विशेष टास्क फोर्स भेजकर चिन्हित अड्डों को जमींदोज किया जाए।

प्रशासन को 7 दिनों का अल्टीमेटम: उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रेस विज्ञप्ति के अंत में आम आदमी पार्टी के प्रादेशिक नेतृत्व ने जिला प्रशासन रीवा और मध्य प्रदेश सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है। प्रशासन को तथ्यों पर विचार करने और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने के लिए 7 दिनों का समय (अल्टीमेटम) दिया गया है।

चेतावनी संदेश: "यदि आगामी सात दिवस के भीतर इस संगठित नशा माफिया और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध धरातल पर कोई ठोस और दमनकारी कार्रवाई नहीं दिखाई दी, तो संगठन आम जनता, पीड़ित माताओं-बहनों और युवाओं को साथ लेकर सड़कों पर उतरने के लिए विवश होगा। इसके तहत पूरे जिले में व्यापक चक्काजाम, उग्र प्रदर्शन और 'जेल भरो आंदोलन' शुरू किया जाएगा, जिसकी कानून-व्यवस्था संबंधी समस्त जिम्मेदारी और जवाबदेही सीधे तौर पर रीवा जिला प्रशासन की होगी।"