अंधेर नगरी, 'शराबी' राजा: बिछिया पुलिस की नाक के नीचे चल रही अवैध शराब की मंडी, क्या साहिब को भी पहुँच रहा हिस्सा?

 
रीवा के बिछिया थाना क्षेत्र में पुलिस और आबकारी विभाग की साठगांठ से फल-फूल रहा अवैध शराब का धंधा। स्टिंग ऑपरेशन में तस्करों ने खोले राज। (Illegal liquor trade exposed in Rewa)

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले में इन दिनों 'सफेदपोश' संरक्षण में 'काले' जाम का कारोबार अपनी चरम सीमा पर है। कहने को तो प्रशासन और आबकारी विभाग हर दिन नशा मुक्ति के दावे करता है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की धज्जियां उड़ा रही है। रीवा मीडिया की टीम ने एक साहसिक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए उस काले सच को उजागर किया है, जिसे रसूखदार और भ्रष्ट अधिकारी दबाने की कोशिश कर रहे थे।

स्टिंग ऑपरेशन: बाइक पर जा रही मौत की खेप और तस्करों का कबूलनामा
रीवा के बिछिया थाना क्षेत्र में हमारी टीम ने जब तस्करों का पीछा किया, तो रोंगटे खड़े कर देने वाला नजारा सामने आया। गड्डी रोड पर खुलेआम बाइक पर शराब की पेटियां लादकर ले जाई जा रही थीं। जब इन तस्करों को बीच रास्ते में रोका गया, तो उन्होंने बेखौफ होकर स्वीकार किया कि यह माल बिछिया शराब दुकान से उठाया गया है और इसे लक्ष्मणपुर के प्रकाश नामक व्यक्ति के ठिकाने पर पहुँचाया जा रहा है।

बिछिया थाने से महज चंद कदमों की दूरी पर 'शराब का खेल'
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जिस दुकान से अवैध खेप निकाली जा रही थी, वह बिछिया थाने के बिल्कुल सामने है। बीच में केवल एक सड़क का फासला है। यह कैसे संभव है कि पुलिस की नाक के नीचे से दिन भर तस्कर गुजरते हैं और खाकी को इसकी भनक तक नहीं लगती? क्या यह महज लापरवाही है या फिर हर महीने पहुँचने वाला 'मोटा कमीशन' पुलिस की आँखों पर पट्टी बांधे हुए है?

घंटों इंतजार के बाद भी नहीं पहुँची पुलिस, संरक्षण के पुख्ता प्रमाण
जब हमारी टीम ने मौके पर अवैध शराब को पकड़ा और स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी, तो उम्मीद थी कि तुरंत कार्रवाई होगी। लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी पुलिस का कोई जवान मौके पर नहीं पहुँचा। यह निष्क्रियता चीख-चीख कर गवाही दे रही है कि शराब तस्करों को कानून का डर नहीं, बल्कि सिस्टम का वरदहस्त प्राप्त है।

लक्ष्मणपुर: अवैध शराब वितरण का नया ट्रांजिट पॉइंट
तस्करों से हुई पूछताछ में खुलासा हुआ कि लक्ष्मणपुर अब अवैध शराब की सप्लाई का मुख्य केंद्र बन चुका है। यहाँ से शराब को छोटे-छोटे गांवों और घर-घर तक पहुँचाया जा रहा है। सरकारी ठेकों से सस्ती और मिलावटी शराब को ऊंचे दामों पर बेचकर माफिया चांदी काट रहे हैं, जबकि आम जनता का स्वास्थ्य और युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है।

मध्य प्रदेश सरकार की आबकारी नीति का खुला उल्लंघन
शिवराज सरकार और वर्तमान प्रशासन ने शराब बिक्री के लिए कड़े नियम बनाए हैं। सार्वजनिक स्थलों पर पीना और अवैध रूप से भंडारण करना प्रतिबंधित है। लेकिन रीवा में ये नियम केवल कागजों तक सीमित हैं। बिछिया से लेकर लक्ष्मणपुर तक फैला यह नेटवर्क यह बताने के लिए काफी है कि आबकारी विभाग की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा सिंडिकेट नहीं चल सकता।

प्रशासन से तीखे सवाल: कब जागेगा रीवा का आबकारी विभाग?
इस खुलासे के बाद अब गेंद प्रशासन के पाले में है।

  • क्या बिछिया थाना प्रभारी पर इस लापरवाही के लिए कार्रवाई होगी?
  • बिछिया शराब दुकान के लाइसेंस को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी?
  • लक्ष्मणपुर के मुख्य सरगना 'प्रकाश' तक पुलिस के हाथ कब पहुँचेंगे?

रीवा की जनता अब जवाब चाहती है। जिला प्रशासन को यह समझना होगा कि अवैध शराब केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में बढ़ते अपराधों की जननी भी है।