विंध्य में गरमाया इंदौर का विवाद : पत्रकार से बदसलूकी के खिलाफ रीवा में NSUI का रण, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का फूंका पुतला 

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और एक पत्रकार के बीच हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इंदौर की इस घटना की आंच अब प्रदेश के अन्य हिस्सों तक भी पहुंच गई है। इसी क्रम में आज विंध्य की धरा रीवा (Rewa) में कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए और इस्तीफे की मांग की।

शहर के हृदय स्थल सिरमौर चौराहे  पर सैकड़ों की संख्या में छात्र एकत्रित हुए और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ जमकर गुबार निकाला। प्रदर्शनकारियों ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि मंत्री का पुतला फूंककर अपना आक्रोश भी व्यक्त किया।

'लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान नहीं सहेगा छात्र': NSUI के गंभीर आरोप 
प्रदर्शन के दौरान छात्रों के निशाने पर सरकार और मंत्री का 'अहंकारी' रवैया रहा। NSUI नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्ता के मद में चूर नेता अब पत्रकारों के साथ भी सार्वजनिक रूप से अभद्रता करने से नहीं चूक रहे हैं।

छात्रों के मुख्य आरोप:

  • मर्यादा का उल्लंघन: कार्यकर्ताओं का कहना है कि कैलाश विजयवर्गीय अक्सर अपने बयानों से मर्यादा लांघते हैं।
  • पत्रकारों पर हमला: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को डराने और अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा है।
  • संवैधानिक पद का दुरुपयोग: जिस मंत्री को पद की गरिमा का ख्याल न हो, उसे पद पर रहने का हक नहीं है।

अनूप सिंह चंदेल की चेतावनी: "इस्तीफा नहीं तो आंदोलन होगा और तेज" 
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता अनूप सिंह चंदेल (Anup Singh Chandel) ने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि यह लड़ाई केवल एक पत्रकार की नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी की है।
"कैलाश विजयवर्गीय जी को यह समझना होगा कि वे जनता के सेवक हैं, मालिक नहीं।

एक पत्रकार के साथ जिस तरह का व्यवहार उन्होंने इंदौर में किया, वह निंदनीय है। हमने आज सिरमौर चौराहे पर पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया है। हमारी स्पष्ट मांग है कि मंत्री जी को तत्काल उनके पद से बर्खास्त किया जाए।" — अनूप सिंह चंदेल

विंध्य क्षेत्र में बढ़ता राजनीतिक दबाव: बीजेपी के लिए बढ़ सकती है चुनौती 
रीवा में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने संकेत दे दिया है कि कांग्रेस और उसके अनुषांगिक संगठन इस मुद्दे को हाथ से जाने नहीं देना चाहते। सिरमौर चौराहे पर हुई इस भारी भीड़ ने पुलिस प्रशासन को भी अलर्ट पर रखा। प्रदर्शन के दौरान घंटों तक यातायात प्रभावित रहा, लेकिन छात्रों के आक्रोश के सामने पुलिस को भी मोर्चा संभालना पड़ा। जानकारों का मानना है कि यदि यह विवाद जल्द शांत नहीं हुआ, तो यह आगामी दिनों में प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है, जिससे आगामी चुनावों या उपचुनावों के समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।

निष्कर्ष: सत्ता और लोकतंत्र के बीच की तकरार 
लोकतंत्र में सवाल पूछना पत्रकार का धर्म है और उन सवालों का शालीनता से जवाब देना एक जन-प्रतिनिधि का कर्तव्य। इंदौर की घटना और उसके बाद रीवा में हुआ यह प्रदर्शन बताता है कि जनता अब नेताओं के व्यवहार पर पैनी नजर रख रही है। कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग अब रीवा की सड़कों पर गूंज रही है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 
Q1. रीवा में NSUI ने किसका पुतला फूंका? NSUI कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का पुतला फूंका।
Q2. यह विरोध प्रदर्शन किस जगह हुआ? यह प्रदर्शन रीवा के सबसे व्यस्त 'सिरमौर चौराहे' पर आयोजित किया गया।
Q3. विवाद की मुख्य वजह क्या है? विवाद की मुख्य वजह इंदौर में एक पत्रकार के साथ कैलाश विजयवर्गीय द्वारा कथित तौर पर की गई अभद्रता और बदसलूकी है।
Q4. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या है? NSUI और छात्र नेताओं की मुख्य मांग है कि कैलाश विजयवर्गीय को नैतिकता के आधार पर मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए।
Q5. रीवा में प्रदर्शन का नेतृत्व किसने किया? इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व मुख्य रूप से छात्र नेता अनूप सिंह चंदेल और अन्य NSUI पदाधिकारियों ने किया।