नगर निगम है या पार्टी ऑफिस? रीवा में कांग्रेस के इवेंट पर आमने-सामने आए बीजेपी और कांग्रेस
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा जिले की स्थानीय राजनीति में एक नया और बड़ा बखेड़ा खड़ा हो गया है। हाल ही में नगर निगम कार्यालय परिसर के अंदर आयोजित किए गए कांग्रेस पार्टी के सदस्यता ग्रहण समारोह को लेकर राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है। इस कार्यक्रम के दौरान वैश्य समाज के 15 से अधिक प्रमुख पदाधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया, जिन्हें रीवा के महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ ने पार्टी की औपचारिक सदस्यता दिलाई।
हालांकि, यह आयोजन जैसे ही सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर आया, वैसे ही इस पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। भारतीय जनता पार्टी ने इसे प्रशासनिक और सरकारी तंत्र का खुला दुरुपयोग करार दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने रीवा की स्थानीय राजनीति में ठंड के मौसम में भी सियासी तापमान को काफी बढ़ा दिया है।
विवाद की मुख्य वजह और भाजपा की आपत्ति
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में नगर निगम कार्यालय जैसा एक सार्वजनिक और प्रशासनिक परिसर है। कार्यक्रम की तस्वीरें सामने आने के तुरंत बाद भाजपा जिला महामंत्री बिजेंद्र गौतम ने कड़े शब्दों में आपत्ति दर्ज कराई। उनका मुख्य तर्क यह था कि नगर निगम का कार्यालय किसी एक राजनीतिक दल का कार्यालय नहीं है, बल्कि यह शहर के तमाम नागरिकों की सेवा के लिए समर्पित एक निष्पक्ष संस्थान है।
बिजेंद्र गौतम ने सवाल उठाया कि आखिर किस प्रशासनिक स्तर से या किसकी अनुमति से नगर निगम कार्यालय के भीतर इस तरह की राजनीतिक गतिविधियों को अंजाम दिया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस प्रकार के आयोजनों के लिए अनुमति दी जाती है, तो क्या ऐसे ही दरवाजे और हॉल अन्य राजनीतिक दलों, जैसे कि भाजपा या अन्य संगठनों के लिए भी समान रूप से खोले जाते हैं? भाजपा का साफ कहना है कि सरकारी संस्थानों की गरिमा और राजनीतिक निष्पक्षता को बनाए रखना हर जनप्रतिनिधि और अधिकारी की नैतिक जिम्मेदारी है।
समान नियमों के पालन की मांग और कांग्रेस से माफी की सुगबुगाहट
विपक्ष की ओर से यह भी जोर देकर कहा गया कि निर्वाचन और स्थानीय निकाय से जुड़ी परिस्थितियों में सरकारी सुविधाओं, भवनों और सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर बेहद पारदर्शी रुख अपनाया जाना चाहिए। यदि स्थानीय निकाय के सभागार या किसी मीटिंग हॉल में इस तरह के राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने के कोई नियम हैं, तो वेनियम सभी दलों के लिए एक समान होने चाहिए, न कि चुनिंदा लोगों के लिए।
मामले को तूल देते हुए भाजपा जिला महामंत्री ने कांग्रेस पार्टी और आयोजकों से सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार करने और शहर की जनता से माफी मांगने की मांग की है। उनका मानना है कि यदि इस तरह की परंपराओं को नहीं रोका गया, तो भविष्य में सरकारी दफ्तर राजनीतिक अखाड़े बनकर रह जाएंगे, जिससे आम जनता का प्रशासनिक व्यवस्था से भरोसा उठ सकता है।
रीवा की राजनीति पर इसका प्रभाव
वैश्य समाज के 15 से अधिक प्रतिष्ठित लोगों के कांग्रेस में शामिल होने के इस कार्यक्रम को एक समय पर कांग्रेस पार्टी अपनी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में देख रही थी, लेकिन स्थान विशेष (नगर निगम परिसर) के चयन ने इस पूरी सफलता पर राजनीतिक बादलों को घेर लिया है। अब शहर के हर चौक-चौराहे और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यही चर्चा है कि क्या सरकारी भवनों का इस तरह इस्तेमाल करना उचित है या नहीं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा स्थानीय निकायों की बैठकों और प्रशासनिक उड़नदस्ता चर्चाओं में भी मुख्य रूप से गूंज सकता है।