प्रशिक्षु से एसपी तक का सफर: रीवा की गलियों को बखूबी पहचानते हैं नए कप्तान गुरुकरण सिंह, पंजाब के इस अफसर पर टिकीं सबकी निगाहें
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मूल रूप से पंजाब के रहने वाले गुरुकरण सिंह 2014 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी हैं। रीवा आने से पहले वे विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखना और अपराध की रोकथाम उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
11 साल बाद वापसी: प्रशिक्षु से कप्तान तक
नए एसपी के लिए रीवा की धरती नई नहीं है। उन्होंने मीडिया से साझा किया कि वे लगभग 11 साल बाद जिले में वापस आए हैं। इससे पहले वे अपने प्रशिक्षण (Probation) काल के दौरान रीवा में प्रशिक्षु आईपीएस के तौर पर एक थाने की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने अपनी इस वापसी को सुखद बताया और कहा कि पुराना अनुभव जिले को समझने में मददगार साबित होगा।
सुरक्षा और चुनौतियां: एसपी और पूर्व एसपी के बीच संवाद
कार्यभार ग्रहण करने के बाद गुरुकरण सिंह ने निवर्तमान एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान के साथ सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान दोनों अधिकारियों के बीच जिले की कानून-व्यवस्था, सक्रिय गिरोहों और वर्तमान चुनौतियों पर लंबी चर्चा हुई।
अपराध नियंत्रण: नए एसपी ने कहा कि गंभीर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तकनीक और इंटेलिजेंस का उपयोग बढ़ाया जाएगा।
टीम वर्क: उन्होंने पुलिस बल के मनोबल को बनाए रखने और जनता के साथ बेहतर समन्वय पर जोर दिया।
ट्रैफिक और पुलिस बल: शैलेंद्र सिंह चौहान के सुझाव
विदाई से पहले पूर्व एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने रीवा पुलिसिंग के दो सबसे कमजोर पहलुओं पर प्रकाश डाला:
- बल की कमी: उन्होंने बताया कि संभागीय मुख्यालय होने के नाते रीवा पर काम का भारी दबाव है, लेकिन पुलिस बल की भारी कमी है। उन्होंने सुझाव दिया कि आगामी भर्ती में मिलने वाले नए जवानों की बड़ी संख्या में पदस्थापना रीवा में की जानी चाहिए।
- ट्रैफिक मैनेजमेंट: शहर की यातायात व्यवस्था को हमेशा से एक बड़ी चुनौती मानते हुए उन्होंने कहा कि केवल पुलिसिंग से यह नहीं सुधरेगा। इसके लिए बेहतर रोड इंजीनियरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लानिंग की आवश्यकता है।
रीवा के नए कप्तान के सामने 'नशे का किला' ढहाने की चुनौती: क्या गंगा नगर में बंद होगा मौत का सामान?
रीवा जिले की कमान संभालते ही नवागत एसपी गुरुकरण सिंह के सामने सबसे पुरानी और जटिल समस्या 'नशा' खड़ी है। जिले के कुछ क्षेत्र, विशेषकर कबाड़ी मोहल्ला के नाम से चर्चित गंगा नगर, लंबे समय से अवैध नशीले पदार्थों के गढ़ के रूप में कुख्यात हैं। यहाँ कोरेक्स, गांजा और अब ब्राउन शुगर की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि इसे उखाड़ना किसी भी अधिकारी के लिए बड़ी परीक्षा से कम नहीं है।
गंगा नगर: वर्षों पुराना अवैध कारोबार और जनता की मांग
रीवा शहर का गंगा नगर इलाका पुलिस फाइलों में संवेदनशील माना जाता है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यहाँ सालों से नशे का कारोबार फल-फूल रहा है, जिसने युवा पीढ़ी को बर्बाद कर दिया है। पदभार ग्रहण करते समय गुरुकरण सिंह ने स्पष्ट किया है कि अपराध नियंत्रण उनकी प्राथमिकता है, ऐसे में जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि "क्या जो काम आज तक कोई नहीं कर सका, वह नए एसपी साहब कर पाएंगे?"
कोरेक्स और ब्राउन शुगर के खिलाफ 'सर्जिकल स्ट्राइक' की जरूरत
रीवा में कोरेक्स की तस्करी और अब बढ़ता ब्राउन शुगर का चलन पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है। पूर्व एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने भी अपनी विदाई वार्ता में स्वीकार किया था कि पुलिसिंग में निरंतर सुधार की आवश्यकता है। नए एसपी, जो खुद 11 साल पहले रीवा में प्रशिक्षु रह चुके हैं, यहाँ के भौगोलिक और आपराधिक ताने-बाने से अच्छी तरह वाकिफ हैं। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत कर नशे के मुख्य सप्लायर्स पर कड़ा प्रहार करेंगे।
कानून-व्यवस्था और पुलिस बल की चुनौती
शैलेंद्र सिंह चौहान ने रीवा में पुलिस बल की कमी को एक बड़ी समस्या बताया था। गंगा नगर जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में प्रभावी कार्रवाई के लिए पर्याप्त फोर्स और एक ठोस रणनीति की आवश्यकता होगी। गुरुकरण सिंह का पंजाब से होना और नशे के खिलाफ वहां के अनुभवों का लाभ रीवा को मिल सकता है, ऐसी संभावना जताई जा रही है।
शैलेंद्र सिंह चौहान की नई पारी और विदाई
उल्लेखनीय है कि शैलेंद्र सिंह चौहान का डीआईजी (DIG) पद पर प्रमोशन हो चुका है और अब वे भोपाल में अपनी नई सेवाएं देंगे। विदाई के अवसर पर उन्होंने अपनी टीम की सराहना करते हुए कहा कि रीवा की जनता का सहयोग उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। उन्होंने टीम वर्क को सफलता का मूल मंत्र बताया।