समान थाना क्षेत्र बना अखाड़ा! हथियारों से लैस बदमाशों ने मचाया कोहराम, पुलिस के पहरे के बीच सड़कों पर खुला तांडव
रीवा के लैंडमार्क होटल के पास रविवार देर रात सड़क हादसे के बाद दो विरोधी गैंग्स के बीच हथियारों से लैस होकर खूनी संघर्ष, थार और बोलेरो में जमकर तोड़फोड़।
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा शहर में अपराध और कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के व्यस्त और प्रतिष्ठित माने जाने वाले इलाके में अपराधियों के हौंसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए खुलेआम सड़कों पर उतर आए हैं। रीवा में रविवार देर रात एक सड़क हादसे के बाद दो पक्षों के बीच जो खूनी संघर्ष देखने को मिला, उसने पूरे शहर में सनसनी फैला दी है। यह घटना रात करीब 2 बजे लैंडमार्क होटल के पास घटित हुई, जहाँ दो शक्तिशाली और कुख्यात माने जाने वाले गुटों के लोग आपस में भिड़ गए। इस हिंसक झड़प में केवल मारपीट ही नहीं हुई, बल्कि दोनों पक्षों की तरफ से लाई गई लग्जरी गाड़ियां (थार और बोलेरो) को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। आइए इस पूरी सनसनीखेज घटना की एक-एक परत को विस्तार से समझते हैं।
सड़क हादसे से शुरू हुआ विवाद और खूनी संघर्ष में तब्दील होना
घटना की शुरुआत एक सामान्य सी लगने वाली सड़क दुर्घटना (Road Accident) से हुई थी, लेकिन आपसी रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई के कारण यह मामूली हादसा एक बड़े खूनी संघर्ष में बदल गया। रविवार की देर रात जब शहर के अधिकांश लोग गहरी नींद में थे, तब लैंडमार्क होटल के पास तेज रफ्तार से दौड़ रहे वाहन आपस में टकरा गए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोक शुरू हो गई। देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि दोनों तरफ से लोग उग्र हो गए और मामूली बहस ने एक हिंसक झड़प का रूप ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति इतनी भयावह थी कि मौके पर मौजूद आम लोग सहम गए और वहां से जान बचाकर भागने लगे।
अमन चतुर्वेदी (एलेक्स गैंग) और आशीष पटेल (प्रखर हंटर गैंग) का आमने-सामने आना
इस पूरे विवाद के पीछे रीवा के दो अलग-अलग इलाकों के आपराधिक समूहों का नाम सामने आ रहा है। पुलिस सूत्रों और शुरुआती छानबीन के अनुसार, यह पूरा खूनी खेल अमन चतुर्वेदी, जो कि कैलाशपुरी के रहने वाले एलेक्स गैंग से जुड़े बताए जाते हैं, और दूसरी तरफ आशीष पटेल, अभी पटेल, अमन रॉक और प्रखर हंटर गैंग (निवासी इटौरा) के सदस्यों के बीच हुआ है। इन दोनों पक्षों के बीच पहले से ही अंदरखाने तनाव चल रहा था और रविवार रात हुए सड़क हादसे ने आग में घी का काम किया। दोनों ही गुटों के लोग पूरी तरह से तैयार होकर और हथियारों से लैस होकर आमने-सामने आ गए, जिससे शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर दाग लग गया है।
थार और बोलेरो में जमकर तोड़फोड़, हथियारों से लैस थे बदमाश
विवाद जब चरम सीमा पर पहुंच गया, तब दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की गाड़ियों को अपना निशाना बनाया। सड़क पर खड़ी और दौड़ रही थार (Thar) और बोलेरो (Bolero) जैसी भारी-भरकम गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की गई। लाठी-डंडों, पत्थरों और अन्य हथियारों से गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए और उन्हें बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। खास बात यह है कि इस पूरी घटना में यह बात सामने आई है कि दोनों पक्षों के लोग अवैध हथियारों से लैस होकर वहां पहुंचे थे। रात के सन्नाटे में हुई इस तोड़फोड़ और गोलियों या हथियारों के डर से आसपास के इलाके में भारी दहशत फैल गई। लोग अपने घरों की खिड़कियों से इस खौफनाक मंजर को देख रहे थे, लेकिन किसी की भी हिम्मत बीच-बचाय करने की नहीं हुई।
समान थाना क्षेत्र में हड़कंप, पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और वाहन जप्ती
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन हरकत में आया। समान थाना प्रभारी आशीष मिश्रा ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे[cite: 1]। पुलिस को आता देख अधिकांश उपद्रवी मौके से फरार होने में कामयाब हो गए, हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर मौजूद दोनों क्षतिग्रस्त वाहनों (थार और बोलेरो) को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस दोनों गाड़ियों को खींचकर थाने ले आई और उन्हें वहां खड़ा कराया गया है[cite: 1]। थाना प्रभारी ने मीडिया को जानकारी दी कि सड़क दुर्घटना के बाद उपजे इस विवाद और मारपीट के मामले में पुलिस गंभीरता से जांच कर रही है। दोनों पक्षों के लोगों की पहचान की जा रही है और उनसे पूछताछ का दौर जारी है। पुलिस का कहना है कि इस गंभीर कृत्य में शामिल किसी भी बख्शा नहीं जाएगा और सभी के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
रीवा में लगातार बढ़ रहे अपराध और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस पूरी घटना ने रीवा जिले की कानून-व्यवस्था (Law and Order) पर एक बार फिर बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठता है कि रात के 2 बजे जब शहर की पुलिस गश्त का दावा करती है, तब इस तरह के बदमाश खुलेआम हथियार लेकर सड़कों पर कैसे घूम रहे थे? क्या रीवा में पुलिस का खौफ अपराधियों के दिलों से पूरी तरह खत्म हो चुका है? आए दिन शहर में गैंग्स का सक्रिय होना और इस तरह की हिंसक वारदातों को अंजाम देना आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। यदि समय रहते इन आपराधिक गिरोहों पर नकेल नहीं कसी गई, तो आने वाले समय में यह स्थिति और भी अधिक भयानक रूप ले सकती है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त अभियान चलाकर उनके अवैध साम्राज्य को नेस्तनाबूद करे।