Maihar Viral Video : क्लासरूम में LED टीवी पर धुरंधर देख रहे थे टीचर और स्टूडेंट्स, CM हेल्पलाइन में शिकायत
मध्य प्रदेश के मैहर जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहाँ एक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाई के समय छात्रों को फिल्म दिखाई जा रही थी। यह मामला अमरपाटन तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कठहा के सरकारी स्कूल का है। 31 जुलाई को घटित इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।
प्रमुख बिंदु: कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए निर्धारित क्लासरूम में लगे स्मार्ट डिजिटल बोर्ड का उपयोग शैक्षणिक गतिविधियों के बजाय एक व्यावसायिक और 'A' सर्टिफाइड फिल्म देखने के लिए किया जा रहा था। इस दौरान कक्षा में अतिथि शिक्षक भी मौजूद थे।
ग्रामीणों द्वारा बनाए गए वीडियो में साफ दिख रहा है कि छात्र पढ़ाई छोड़कर स्क्रीन पर चल रही फिल्म देखने में व्यस्त थे। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों और अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है।
क्यों गंभीर माना जा रहा है 'A' सर्टिफाइड फिल्म का प्रदर्शन?
स्कूल में जिस फिल्म 'धुरंधर' का प्रसारण किया जा रहा था, उसे सेंसर बोर्ड (CBFC) द्वारा 'A' (Adults Only) प्रमाण पत्र दिया गया है। भारतीय कानून और सेंसरशिप नियमों के अनुसार, इस श्रेणी की फिल्में 18 वर्ष से कम आयु के किशोरों या बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती हैं।
मामले की गंभीरता के मुख्य बिंदु:
- उम्र का उल्लंघन: स्कूल में मौजूद 11वीं और 12वीं कक्षा के अधिकांश छात्र नाबालिग (18 वर्ष से कम उम्र) थे।
- शैक्षणिक वातावरण पर असर: पठन-पाठन के समय में इस तरह की सामग्री दिखाना स्कूल के अनुशासित माहौल को प्रभावित करता है।
- जिम्मेदारी की कमी: कक्षा में शिक्षक की उपस्थिति के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर ऐसी फिल्म चलाई गई।
इसी कारण अभिभावकों का मानना है कि स्कूल प्रशासन और संबंधित शिक्षकों ने अपनी नैतिक व प्रशासनिक जिम्मेदारियों की अनदेखी की है।
ग्रामीणों का विरोध और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की पूरी प्रक्रिया
जैसे ही यह बात ग्रामीणों के संज्ञान में आई, स्थानीय निवासी निशांत तिवारी समेत अन्य लोगों ने इस पर कड़ा विरोध व्यक्त किया। उन्होंने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए तुरंत 'सीएम हेल्पलाइन' में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि:
- सरकार ने स्कूलों में स्मार्ट एलईडी टीवी और डिजिटल बोर्ड इसलिए प्रदान किए हैं ताकि बच्चे आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।
- इन महंगे डिजिटल संसाधनों का प्रयोग यदि फिल्मों और मनोरंजन के लिए होगा, तो बच्चों के भविष्य और सरकारी पैसों का दुरुपयोग होगा।
- मामले में केवल औपचारिकता न निभाकर दोषी कर्मचारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया: जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) का बयान
मामले की खबर फैलते ही जिला शिक्षा विभाग मैहर हरकत में आ गया है। इस पूरे प्रकरण पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सलोनी शर्मा ने आधिकारिक बयान जारी किया है।
उन्होंने बताया कि स्कूल का वीडियो उनके संज्ञान में आ चुका है और मामले की निष्पक्ष जांच शुरू करा दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद:
- संबंधित अतिथि शिक्षक और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका तय की जाएगी।
- दोषी पाए जाने पर विभागीय नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
डिजिटल संसाधनों के सही इस्तेमाल पर खड़े होते बड़े सवाल
डिजिटल इंडिया अभियान के तहत प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों को आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है। स्मार्ट क्लासरूम्स का उद्देश्य बच्चों को कठिन विषय आसानी से समझाना और ऑडियो-विजुअल माध्यमों से पढ़ाई को रोचक बनाना है।
हालाँकि, मैहर की यह घटना यह दर्शाती है कि प्रॉपर मॉनिटरिंग और शिक्षकों की जवाबदेही तय न होने पर इन संसाधनों का दुरुपयोग हो सकता है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या नजीर पेश करता है ताकि भविष्य में कोई अन्य संस्थान ऐसी गलती न दोहराए।