मऊगंज दहला: 15 साल की किशोरी से गैंगरेप! पुलिस ने 1 नाबालिग समेत 3 दरिंदों को कुछ घंटों में दबोचा
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मऊगंज जिले के लौर थाना क्षेत्र से आई यह खबर न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे समाज को शर्मसार करती है। शुक्रवार की देर शाम, जब दिन का उजाला खत्म हो रहा था, गाँव की एक 15 वर्षीय किशोरी अपने घर से केवल पानी भरने की एक सामान्य जरूरत के लिए बाहर निकली। उसे अंदाजा भी नहीं था कि गाँव की सामान्य गलियाँ उसके लिए खौफनाक जाल बन चुकी हैं।
गाँव के ही तीन युवकों ने, जिनमें चौंकाने वाला तथ्य यह है कि एक आरोपी नाबालिग भी शामिल है, किशोरी को अकेला पाकर उसे घेर लिया। यह घटना दर्शाती है कि समाज में आपराधिक मानसिकता किस हद तक जड़ें जमा चुकी है कि नाबालिग भी ऐसे घिनौने अपराधों में शामिल हो रहे हैं। यह सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं है, यह मऊगंज की सुरक्षा व्यवस्था पर लगा एक काला धब्बा है। यह घटना हर माता-पिता को यह सोचने पर मजबूर करती है कि ऐसे अपराधों को कैसे रोकें और हमारी बेटियां कब तक सुरक्षित रहेंगी।
स्कूल की बाउंड्री बनी दरिंदगी का केंद्र: विरोध पर हुई बर्बर मारपीट
अपराधियों ने किशोरी को पकड़ने के बाद किसी सुनसान जगह की तलाश नहीं की, बल्कि उसे जबरन खींचकर गाँव के पास ही स्थित स्कूल की बाउंड्री के अंदर ले गए। स्कूल, जिसे ज्ञान और सुरक्षा का मंदिर माना जाता है, उसे इन दरिंदों ने अपने जघन्य कृत्य का केंद्र बना दिया। आरोपियों ने बारी-बारी से किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। जब पीड़िता ने प्रतिरोध करने की हिम्मत दिखाई, तो आरोपियों ने उसकी मारपीट भी की, ताकि वह खौफ में आकर चुप हो जाए।
आरोपियों ने किशोरी को धमकाकर चुप रहने को कहा था, लेकिन किशोरी की बहादुरी ने उन्हें नाकाम कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए पुलिस गश्त (Police Patrolling) और सामाजिक निगरानी की कितनी सख्त आवश्यकता है। स्कूल की बाउंड्री के पास अपराध क्यों हुआ, इस सवाल का जवाब स्थानीय प्रशासन को देना होगा।
पुलिस की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति: कुछ घंटों में ही सलाखों के पीछे तीनों आरोपी
जघन्य वारदात के बाद किशोरी ने हिम्मत दिखाते हुए रात में ही अपने परिजनों को सारी आपबीती बताई। परिजनों ने त्वरित निर्णय लिया और बिना किसी डर या शर्म के तुरंत लौर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को समझते हुए तत्काल सक्रियता दिखाई।
मऊगंज पुलिस अधीक्षक के सीधे निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने अपराधियों की धरपकड़ के लिए रात भर ऑपरेशन चलाया। शिकायत के महज कुछ घंटों के भीतर ही पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की यह तत्पर कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि यदि पुलिस चाहे तो अपराधियों को बच निकलने का मौका नहीं मिल सकता। पुलिस ने यह सुनिश्चित किया कि अपराधियों को कब पकड़ा गया, इसका एक स्पष्ट संदेश समाज में जाए।
POCSO एक्ट और वैज्ञानिक जांच: त्वरित न्याय की कानूनी तैयारी
गिरफ्तारी के बाद, तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और POCSO (लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण) एक्ट की संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। POCSO एक्ट के तहत, नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों में कठोरतम सजा का प्रावधान है। पॉक्सो एक्ट क्या कहता है, यह अपराधियों को यह समझाता है कि उनके अपराध की सजा साधारण नहीं होगी।
पीड़िता का तत्काल मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उसका उपचार व परामर्श जारी है। पुलिस अब मामले की गहन वैज्ञानिक जांच (Scientific Investigation) कर रही है। घटनास्थल की फॉरेंसिक जांच, साक्ष्यों का संग्रहण, और आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस बनाना अब पुलिस की प्राथमिकता है। पुलिस का उद्देश्य इस केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाकर, दोषियों को कड़ी से कड़ी और त्वरित सजा दिलाना है।
समाज और प्रशासन का साझा दायित्व: ऐसे अपराधों को कैसे रोकें
मऊगंज में हुई यह घटना समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक चेतावनी है। केवल पुलिस पर ही निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। हमें समाज के रूप में यह सुनिश्चित करना होगा कि:
सामाजिक निगरानी: गाँव और मोहल्लों में आपसी निगरानी बढ़ाई जाए।
- जागरूकता: नाबालिगों को 'गुड टच और बैड टच' के बारे में शिक्षित किया जाए।
- फास्ट ट्रैक जस्टिस: न्यायालयों में ऐसे मामलों की सुनवाई में देरी न हो, ताकि अपराधियों में कानून का डर बना रहे।
यह घटना दिखाती है कि केवल कानून बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसका सख्त क्रियान्वयन आवश्यक है। अब मऊगंज प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि किशोरी को जल्द से जल्द न्याय मिले और ऐसी घटना दोबारा न हो।