MP भाजपा कोर ग्रुप की अंदरूनी चर्चाएं लीक होने से राजनीतिक भूचाल: उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल की सख्त चेतावनी
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के सत्ता के गलियारों में इस समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उच्चस्तरीय कोर ग्रुप बैठक की खबरें सुर्खियों में हैं। बंद कमरे में आयोजित इस बैठक की अंदरूनी बातचीत सार्वजनिक होने के बाद पार्टी संगठन और सरकार दोनों में हड़कंप मच गया है। प्रशासनिक रवैये, जनप्रतिनिधियों के सम्मान, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संवेदनशील कफ सिरप प्रकरण और कलेक्टरों के शिष्टाचार प्रोटोकॉल जैसे अहम विषयों पर हुई तीखी बहस का बाहर आना संगठन की गोपनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। इस पूरे घटनाक्रम पर उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए सख्त रवैया अपनाया है।
प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा पर उठे सवाल
भाजपा कोर ग्रुप की इस महत्वपूर्ण बैठक का एक मुख्य एजेंडा राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के बीच घटता तालमेल था। सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने खुले तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों के नकारात्मक रवैये और कार्यप्रणाली पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। बैठक में यह मुद्दा जोर-शोर से उठा कि शासन के शीर्ष अधिकारी जनप्रतिनिधियों द्वारा लाई जाने वाली जनसमस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। क्षेत्रीय स्तर पर विधायकों और मंत्रियों की बातों को अनसुना करने से विकास कार्यों की गति प्रभावित होने और जनता के बीच गलत संदेश जाने की चिंता जताई गई। सरकार और नौकरशाही (ब्यूरोक्रेसी) के बीच समन्वय की कमी को लेकर कोर ग्रुप में विस्तृत चर्चा हुई, जिससे कई नेता असहज दिखे।
स्वास्थ्य विभाग और चर्चित कफ सिरप मामले को लेकर तीखी बहस
बैठक का सबसे संवेदनशील मोड़ तब आया जब प्रशासनिक ढिलाई पर हो रही चर्चा के बीच स्वास्थ्य विभाग और राज्य के बहुचर्चित कफ सिरप प्रकरण का जिक्र छिड़ गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जब उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने अधिकारियों की शिकायत रखी, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में हुए दूषित कफ सिरप मामले की ओर ध्यान आकर्षित किया।
मध्य प्रदेश में दूषित कफ सिरप के सेवन से मासूम बच्चों की मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। बैठक में कथित तौर पर इस बात पर बहस हुई कि प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ विभागीय निगरानी की कमी भी ऐसे बड़े हादसों का कारण बनती है। मुख्यमंत्री द्वारा कफ सिरप मुद्दे का संदर्भ दिए जाने के बाद शीर्ष नेतृत्व के बीच कुछ देर के लिए तीखी नोकझोंक और असहज स्थिति निर्मित होने की खबरें सामने आईं।
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उठाया कलेक्टरों के प्रोटोकॉल का मुद्दा
इस कोर ग्रुप बैठक में केवल राज्य सरकार के मौजूदा मंत्री ही नहीं, बल्कि केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रशासनिक प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर गंभीर आपत्ति जताई। मीडिया में आई रिपोर्टों के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान ने शिकायत की कि जब वे अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे पर होते हैं, तो स्थानीय जिला कलेक्टर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं करते। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जनप्रतिनिधियों और केंद्रीय मंत्रियों के दौरों के समय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शिष्टाचार का पालन न करना लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। पूर्व मुख्यमंत्री की इस शिकायत के बाद यह स्पष्ट हो गया कि मध्य प्रदेश में अफसरों की निरंकुशता को लेकर पार्टी के भीतर गहरे असंतोष की लहर है।
गोपनीयता भंग होने पर उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का कड़ा संदेश: "बैठने लायक नहीं रहेगा"
बैठक में उठाये गए मुद्दों से भी ज्यादा गंभीर मामला अब उस गुप्त चर्चा का मीडिया और जनता के बीच लीक होना बन गया है। इस पूरे प्रकरण से बेहद नाराज उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त चेतावनी जारी की है। "पार्टी की बंद कमरे की बैठकों की गरिमा और गोपनीयता बनाए रखना हर सदस्य का प्राथमिक कर्तव्य है। जो व्यक्ति कोर ग्रुप जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक की अंदरूनी बातें बाहर लीक करता है, वह पार्टी के अनुशासन के दायरे से बाहर है और वह ऐसी बैठकों में बैठने के लायक नहीं है।" — राजेंद्र शुक्ल (उपमुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश)
उपमुख्यमंत्री के इस तीखे बयान से यह साफ हो गया है कि भाजपा नेतृत्व इस मामले को साधारण सूचना का बाहर आना नहीं मान रहा, बल्कि इसे सीधे तौर पर दलीय अनुशासनहीनता के रूप में देख रहा है।
लीक करने वाले की तलाश और भाजपा संगठन की भावी रणनीति
कोर ग्रुप बैठक की बातें बाहर आने के बाद अब सभी की निगाहें भाजपा संगठन की आंतरिक जांच पर टिकी हैं। पार्टी की बैठकों में नीतियों, प्रशासनिक खामियों और चुनावी रणनीतियों पर निष्पक्ष एवं पारदर्शी चर्चा होती है, लेकिन ऐसी चर्चाओं का सार्वजनिक होना पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाता है। हालांकि लीक हुई जानकारियों को लेकर काफी खबरें बन रही हैं, लेकिन अभी तक पार्टी संगठन की तरफ से इस बातचीत का कोई आधिकारिक ब्यौरा जारी नहीं किया गया है।
अनुशासन समिति या संगठन स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आखिर यह सूचना किस माध्यम से बाहर तक पहुंची। यदि लीक करने वाले व्यक्ति की पहचान स्थापित हो जाती है, तो उस पर गाज गिरना तय माना जा रहा है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनुशासनात्मक लापरवाही न दोहराई जाए।