Nepal Landslide: कैलाश यात्रा से लौटे रीवा के ओम की आपबीती: 'महादेव की कृपा से बची जान, नेपाल में हर तरफ फैला है मलबा!' 'आंखों के सामने देखी मौत, जहां रुके थे वहां बचा सिर्फ मलबा
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) हिमालय की गोद में बसे पड़ोसी देश नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में प्रकृति का ऐसा भीषण तांडव देखने को मिला है जिसने हर किसी की रूह कंपा दी है। नेपाल के रसुवागढ़ी क्षेत्र में हुए अचानक भूस्खलन और उफनती बाढ़ ने पूरे इलाके को तहस-नहस कर दिया है। यह वही मार्ग है जहां से मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रहने वाले ओम द्विवेदी अपनी धार्मिक यात्रा पूरी करके महज दो दिन पहले गुजरे थे। ओम द्विवेदी कैलाश मानसरोवर की दुर्गम यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर अपने गृह क्षेत्र लौट आए हैं, लेकिन वहां का भयावह दृश्य आज भी उनके मन मस्तिष्क में पूरी तरह ताजा है। एक तरफ जहां ओम द्विवेदी महादेव के आशीर्वाद से सुरक्षित अपने घर पहुंच चुके हैं, वहीं मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के दो मजदूर युवक इस प्राकृतिक त्रासदी के बाद से लगातार लापता हैं और उनके परिवारों में मातम व अनहोनी का सन्नाटा पसरा हुआ है।
तबाही का खौफनाक दृश्य: जलमग्न हुआ इमिग्रेशन और विश्राम केंद्र
ओम द्विवेदी ने आपबीती साझा करते हुए बताया कि यात्रा के दौरान नेपाल के रसुवागढ़ी स्थित जिस सीमा जांच केंद्र पर उन्होंने प्रशासनिक कागजी प्रक्रिया पूरी की थी, जहां के स्थानीय होटल में उन्होंने रात्रि विश्राम किया था और पास के भोजनालय में खाना खाया था, वह पूरा इलाका इस आपदा के बाद नामो-निशान खो चुका है। जिस स्थान पर दो दिन पहले तक चहल-पहल थी, वहां अब केवल कई फीट गहरा मलबा, विशालकाय चट्टानें और त्रिशूली नदी का गर्जन करता जलजला नजर आ रहा है। ओम ने भावुक होते हुए कहा कि जब उन्हें भारत लौटने के बाद इस भीषण प्राकृतिक हादसे की जानकारी मिली, तो उनकी नजरों के सामने वे तमाम स्थानीय नेपाली नागरिक और गाइड घूम गए जिन्होंने यात्रा के कठिन चरणों में उनका मार्गदर्शन किया था। स्थानीय निवासियों के जीवन और संपत्ति का जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कर पाना बेहद मुश्किल है।
जिंदगी और मौत का वो खौफनाक पल: बाल-बाल बचे यात्री
इस कठिन धार्मिक यात्रा की शुरुआत से ही मौसम लगातार करवट बदल रहा था। 12 अगस्त को काठमांडू से 20 भारतीय श्रद्धालुओं और 4 नेपाली सहायकों का दल कैलाश मानसरोवर के लिए रवाना हुआ था। रसुवागढ़ी पहुंचने पर दल को नेपाली गाइड पेम्बा शेरपा ने आगे पहाड़ धंसने और रास्ते बंद होने की सूचना दी थी। भारी जोखिम के बीच यात्रियों ने वाहनों को छोड़कर पैदल ही सीमा पार की थी।
वापसी के दौरान ओम द्विवेदी ने मौत को बेहद करीब से देखा। जब उनका दल पहाड़ी पगडंडी से गुजर रहा था, तभी ऊपर से एक भारी-भरकम चट्टान तेजी से नीचे की तरफ लुढ़कती हुई आई। उस पल के लिए पूरे दल की सांसें थम गईं। गनीमत यह रही कि वह विशाल पत्थर ओम से महज कुछ इंच की दूरी से गुजरते हुए सीधे नीचे खाई में बह रही त्रिशूली नदी में जा गिरा। अगर वह पत्थर जरा सा भी दिशा बदलता तो बड़ा हादसा हो सकता था।
21,500 फीट की ऊंचाई और 52 किमी की कठिन मानसरोवर परिक्रमा
प्राकृतिक अड़चनों और पल-पल गिरते पत्थरों के बावजूद श्रद्धालुओं के दल ने हार नहीं मानी। रसुवागढ़ी सीमा पार कर दल तिब्बत के केरुंग और सागा क्षेत्रों से गुजरता हुआ पवित्र मानसरोवर झील तक पहुंचा।
पवित्र स्नान व दर्शन: श्रद्धालुओं ने शून्य से नीचे के तापमान में मानसरोवर के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाई और विधिवत पूजा-अर्चना की।
अति दुर्गम परिक्रमा: श्रद्धालुओं ने समुद्र तल से लगभग 21,500 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित माइनस तापमान के बीच कैलाश पर्वत की 52 किलोमीटर लंबी पैदल परिक्रमा पूरी की।
पौराणिक स्थलों की यात्रा: दल ने अपनी यात्रा के दौरान धार्मिक महत्व रखने वाले गौरीकुंड, राक्षस ताल और अष्टपद जैसे दुर्लभ व पवित्र स्थलों के भी दर्शन किए।
परिक्रमा पूरी कर जब दल वापस लौटने लगा तो पुराना मार्ग पूरी तरह से गायब हो चुका था। पहाड़ ढहने से सड़कें नदी में समा गई थीं। गाइड पेम्बा शेरपा की सतर्कता के कारण सभी यात्रियों ने जान जोखिम में डालकर दलदली मलबे को पार किया और आगे खड़े वाहनों तक पहुंचकर किसी तरह काठमांडू का सुरक्षित रुख किया।
रायसेन के दो मजदूर युवक लापता: जलविद्युत परियोजना स्थल से संपर्क टूटा
नेपाल के इसी आपदा प्रभावित रसुवागढ़ी इलाके में काम कर रहे मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के दो मजदूर युवकों के परिजन बेहद चिंतित हैं। 26 अगस्त को आई भयंकर बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद से ही दोनों युवकों का अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं हो सका है।
- विशेष राजपूत: निवासी ग्राम मंजूस, तहसील सुल्तानपुर, जिला रायसेन।
- हिमांशु शाक्या: निवासी औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप, जिला रायसेन।
ये दोनों युवक नेपाल के रसुवागढ़ी क्षेत्र में संचालित अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (जल विद्युत परियोजना) में कार्यरत थे। भूस्खलन के कारण उस क्षेत्र में दूरसंचार सेवाएं पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं, जिससे परिजनों का संपर्क पूरी तरह कट गया है। पीड़ित परिवारों ने राज्य शासन और भारतीय विदेश मंत्रालय से गुहार लगाई है कि नेपाल सरकार के समन्वय से खोज एवं बचाव अभियान चलाकर उनके बच्चों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए।