एक स्वर, एक लय! जब गढ़ के सरस्वती शिशु मंदिर में गूंज उठे भारत माता के जयकारे!
रीवा के गढ़ स्थित सरस्वती शिशु मंदिर (भारतीपुरम्) में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के शताब्दी वर्ष पर भव्य सामूहिक गायन का आयोजन हुआ। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने एक स्वर में राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के विंध्य अंचल अंतर्गत रीवा जिले के गढ़ क्षेत्र से एक बेहद प्रेरणादायक और गौरवमयी खबर सामने आ रही है। गढ़ स्थित प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (भारतीपुरम्, गढ़) में राष्ट्रीय भावना को समर्पित एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के ऐतिहासिक शताब्दी वर्ष समारोह के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसने पूरे क्षेत्र में देशभक्ति की एक नई लहर पैदा कर दी है।
अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के दिशा-निर्देशों एवं केंद्रीय मार्गदर्शन में आयोजित इस विशेष सामूहिक गायन कार्यक्रम का मुख्य ध्येय विद्यार्थियों को देश की सांस्कृतिक जड़ों, गौरवशाली इतिहास और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़ना रहा। कार्यक्रम की विशालता और छात्रों के उत्साह को देखकर पूरा विद्यालय परिवार भावविभोर हो उठा।
सरस्वती शिशु मंदिर भारतीपुरम् गढ़ में उत्साहपूर्वक सहभागिता
25 सितंबर 2026 को आयोजित इस गरिमामयी समारोह की शुरुआत वैदिक परंपरा के अनुसार मां सरस्वती और भारत माता के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पूजन-अर्चन के साथ हुई। इसके पश्चात विद्यालय प्रांगण में अनुशासित पंक्तियों में खड़े होकर छात्र-छात्राओं, आचार्य परिवार और कर्मचारियों ने एक साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की। विद्यालय के प्राथमिक खंड के छोटे बच्चों से लेकर उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं के छात्र-छात्राओं ने पूर्ण अनुशासन और भक्ति भाव के साथ इस गायन में भाग लिया। इस अवसर पर बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
सामूहिक गायन से राष्ट्रभक्ति और देशभक्ति के रंग में रंगा विद्यालय
पूरे कार्यक्रम का सबसे मुख्य और आकर्षक केंद्र सामूहिक 'वंदे मातरम्' गायन रहा। जब सैकड़ों विद्यार्थियों और शिक्षकों की आवाज़ एक लय और एक ताल में विद्यालय प्रांगण में गूंजी, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।
उपस्थित समस्त जनसमूह ने एक स्वर में सस्वर वंदे मातरम् का गायन किया। सामूहिक गायन के समाप्त होते ही विद्यालय परिसर "भारत माता की जय" और "वंदे मातरम्" के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इस अलौकिक वातावरण ने उपस्थित अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों को भी राष्ट्रप्रेम से सराबोर कर दिया।
अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान का मार्गदर्शन और अनुशासित आयोजन
यह विशेष कार्यक्रम अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के उस राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में वंदे मातरम् की महत्ता और उसके क्रांतिकारी इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है।
विद्यालय प्रबंधन ने संस्था के दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करते हुए कार्यक्रम का भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन सुनिश्चित किया। इस प्रयास से विद्यार्थियों को राष्ट्रगीत के शताब्दी वर्ष के ऐतिहासिक महत्व की गहरी समझ प्राप्त हुई।
शिक्षक, प्रबंध समिति और अभिभावकों की गरिमामयी उपस्थिति
इस राष्ट्रभक्ति कार्यक्रम की सफलता में विद्यालय के आचार्य परिवार और प्रबंधन का अतुलनीय योगदान रहा। कार्यक्रम में विद्यालय के वरिष्ठ आचार्यों, शिक्षिकाओं और अधिकारियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। विद्यालय से जारी आधिकारिक जानकारी और पत्र के अनुसार, गणित विषय के व्याख्याता अखिल कुमार पाण्डेय सहित अन्य वरिष्ठ शिक्षकों ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में मुख्य भूमिका निभाई। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंध समिति के सम्मानित पदाधिकारी, क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और विद्यार्थियों के अभिभावक भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिन्होंने बच्चों के इस सराहनीय प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
विद्यार्थियों में राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना का सिंचन
सरस्वती शिशु मंदिर प्रबंधन के अनुसार, वर्तमान आधुनिक दौर में युवा पीढ़ी और विद्यार्थियों को उनके मूल सांस्कृतिक संस्कारों तथा राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इस प्रकार के सामूहिक और सांस्कृतिक आयोजनों से बच्चों के मन में देश के प्रति समर्पण, नागरिक कर्तव्य और अनुशासन के बीज अंकुरित होते हैं। वंदे मातरम् के 100 वर्षों के इतिहास और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में इसके क्रांतिकारी योगदान के बारे में भी विद्यार्थियों को विस्तार से अवगत कराया गया, ताकि वे देश के वीर बलिदानियों और राष्ट्रगीत के महत्व को भली-भांति समझ सकें।