ऑपरेशन प्रहार 2.0' का फुस्स पटाखा: ज्योति स्कूल के गेट पर सज रही नशे की महफिल; आईजी साहब! आपके दावों को समान थाना दे रहा चुनौती
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर का समान थाना क्षेत्र इन दिनों अपराधियों की सुरक्षित पनाहगाह बन चुका है। सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि थाने से महज कुछ ही कदमों की दूरी पर नशे का काला कारोबार फल-फूल रहा है। न्यू बस स्टैंड के पास स्थित ज्योति स्कूल, जो सैकड़ों बच्चों के भविष्य का केंद्र है, उसके ठीक सामने 'मौत का सामान' बेचा जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जिस खाकी पर सुरक्षा का जिम्मा है, क्या उसकी आँखों पर पट्टी बंधी है?
ऑपरेशन प्रहार 2.0: दावों की हकीकत या सिर्फ कागजी कार्रवाई?
मध्य प्रदेश के आईजी (IG) और पुलिस प्रशासन 'ऑपरेशन प्रहार 2.0' के जरिए नशे को जड़ से उखाड़ने का दम भर रहे हैं। लेकिन समान थाने के अंतर्गत ज्योति स्कूल के पास की हकीकत इन दावों को ठेंगा दिखा रही है। जब थाने के बगल में ही गांजा और नशीली सिरप का व्यापार नहीं रुक रहा, तो पूरे जिले में 'ऑपरेशन प्रहार' की सफलता पर सवाल उठना लाजिमी है। क्या यह अभियान सिर्फ प्रेस नोट जारी करने तक सीमित है?
ज्योति स्कूल और पेट्रोल पंप: शिक्षा के मंदिर के सामने 'मौत' का बाजार
ज्योति स्कूल के मुख्य द्वार और बगल में स्थित पेट्रोल पंप के पास नशे के सौदागरों ने अपना अड्डा बना रखा है। थाने से मात्र 5-10 कदम की दूरी पर गांजा, ब्राउन शुगर और प्रतिबंधित कोरेक्स (Corex) सिरप धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। छात्र स्कूल आते-जाते समय इन असामाजिक तत्वों के बीच से गुजरने को मजबूर हैं। पेट्रोल पंप के पास होने वाली यह अवैध गतिविधि किसी बड़ी अनहोनी को भी न्योता दे रही है।
थाना प्रभारी की भूमिका: अनभिज्ञता या मिलीभगत का खेल?
क्षेत्रीय नागरिकों और सूत्रों का कहना है कि पुलिस को इसकी जानकारी कई बार दी गई है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर 'शून्य' हासिल हुआ है। ऐसे में गंभीर सवाल समान थाना प्रभारी पर उठते हैं:
- क्या थाना प्रभारी को अपनी नाक के नीचे चल रहे इस सिंडिकेट की जानकारी नहीं है?
- या फिर थाने के ही कुछ 'भेड़िए' इस अवैध कमाई में हिस्सेदार हैं?
- क्या हर महीने का 'नजराना' पुलिस की जुबान और हाथों को बांधे हुए है?
नशे की खेप: गांजा, ब्राउन शुगर और कोरेक्स का खुला खेल
यहाँ नशा सिर्फ एक रूप में नहीं, बल्कि वैरायटी के साथ उपलब्ध है। युवाओं को निशाना बनाने के लिए ब्राउन शुगर जैसे महंगे और जानलेवा नशे की छोटी पुड़िया आसानी से उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं, कोरेक्स सिरप और गांजे के शौकीन बेखौफ होकर यहाँ जमावड़ा लगाते हैं। पुलिस की गश्ती गाड़ियाँ यहाँ से गुजरती तो हैं, लेकिन इन सौदागरों पर उनकी नजर कभी नहीं पड़ती।
कब जागेगा रीवा का पुलिस प्रशासन?
शिक्षा के मंदिर के सामने नशे का यह कॉरिडोर रीवा के माथे पर कलंक है। यदि जल्द ही समान थाना पुलिस ने अपनी कुंभकर्णी नींद नहीं त्यागी और इन सौदागरों के खिलाफ कठोर एक्शन नहीं लिया, तो 'नशा मुक्त रीवा' का सपना केवल एक चुनावी नारा बनकर रह जाएगा। उच्च अधिकारियों को तुरंत हस्तक्षेप कर थाना प्रभारी की जवाबदेही तय करनी चाहिए।