पड़रिया गैस एजेंसी का 'OTP फ्रॉड': ग्रामीणों की गोपनीयता से खिलवाड़ कर रातों-रात बेचे जा रहे सिलेंडर, प्रशासन मौन

 
ग्रामीणों के हक पर डाका! पड़रिया गैस एजेंसी के कर्मचारी ओटीपी लेकर बेच रहे सिलेंडर, खुली लूट का खुलासा।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले के अंतर्गत आने वाली पड़रिया इण्डेन ग्रामीण गैस वितरक एजेंसी इन दिनों भ्रष्टाचार का केंद्र बन गई है। जहाँ एक तरफ सरकार उज्ज्वला और अन्य योजनाओं के जरिए गरीबों तक ईंधन पहुँचाने का दावा कर रही है, वहीं पड़रिया में इसके ठीक उलट मासूम ग्रामीणों के हक पर डाका डाला जा रहा है। उर्बिजा उपाध्याय (मामा) जरहा ने इस पूरी धांधली का पर्दाफाश करते हुए बताया कि यहाँ गैस की किल्लत नहीं है, बल्कि 'कृत्रिम किल्लत' पैदा कर कालाबाजारी की जा रही है।

कैसे काम कर रहा है कालाबाजारी का यह 'खेल'? 
गैस एजेंसी के कुछ भ्रष्ट कर्मचारी और बिचौलिए मिलकर एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहे हैं।

  • पहला कदम: ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को निशाना बनाया जाता है।
  • दूसरा कदम: उनसे फोन पर DAC (Document Acknowledgement Code) और OTP मांग लिया जाता है।
  • तीसरा कदम: कोड मिलते ही रिकॉर्ड में सिलेंडर 'डिलीवर' दिखा दिया जाता है, जबकि असल में वह सिलेंडर बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है।

पीड़ित महिला की आपबीती: 'गैस मिली नहीं और रिकॉर्ड में डिलीवर' 
ताजा मामला ग्राम डगडउआ (सूजी) का है। यहाँ की निवासी श्रीमती फूलमती अग्निहोत्री पति लक्ष्मण प्रसाद अग्निहोत्री ने 1 अप्रैल 2026 को गैस बुक की थी। 3 अप्रैल को एजेंसी के कर्मचारी ने फोन कर उनसे ओटीपी और डीएसी कोड मांगा। भोली-भाली महिला ने गैस मिलने की आस में कोड दे दिया।

जब आज 11 अप्रैल 2026 को वह तपती धूप में घंटों लाइन में खड़ी रहने के बाद काउंटर पर पहुँचीं, तो उन्हें यह कहकर भगा दिया गया कि "आपका सिलेंडर तो डिलीवर हो चुका है।" महिला मिन्नतें करती रहीं कि उनके घर तक तो गैस का वाहन पहुँचा ही नहीं, फिर गैस किसे मिली? लेकिन कर्मचारियों ने उनकी एक न सुनी।

गोपनीयता भंग: DAC और OTP का गलत इस्तेमाल 
यह सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की गोपनीयता का उल्लंघन है। एजेंसी के कर्मचारी नियमों को ताक पर रखकर ग्राहकों के रजिस्टर्ड डेटा का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। बिना सिलेंडर दिए ओटीपी मांगना और उसे सिस्टम में फीड करना एक बड़ा डिजिटल फ्रॉड है, जिसकी जांच उच्च स्तर पर होनी चाहिए।

भ्रष्ट कर्मचारियों और बिचौलियों का गठजोड़ 
सूत्रों की मानें तो यह कोई इकलौता मामला नहीं है। पड़रिया गैस एजेंसी में ऐसे सैकड़ों ट्रांजेक्शन रोज हो रहे हैं जहाँ रिकॉर्ड में गैस बट चुकी है, लेकिन हितग्राही आज भी खाली हाथ है। बिचौलिए इस गैस को होटलों और व्यवसायिक कार्यों के लिए ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं, जिससे ग्रामीण जनता परेशान है।

प्रशासन से उठती जांच की मांग 
इस पूरे मामले में पड़रिया इण्डेन गैस एजेंसी के संचालक और कर्मचारियों की संलिप्तता साफ नजर आती है। क्षेत्र की जनता और समाजसेवियों ने जिला प्रशासन और खाद्य विभाग से मांग की है कि एजेंसी के पिछले एक महीने के रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स की जांच की जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।