रीवा शिक्षा विभाग में 'भ्रष्टाचार की पुताई : घोटाला 28 लाख का, पर कार्रवाई सिर्फ 2 पर क्यों? रीवा कमिश्नर की रडार पर अब भी 4 रसूखदार, विभाग में मचा हड़कंप

 
रीवा में स्कूलों की मरम्मत के नाम पर 28 लाख का घोटाला उजागर, कमिश्नर ने एपीसी और प्राचार्य को किया निलंबित, 4 अन्य अधिकारियों पर गिर सकती है गाज।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा के स्कूल शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभाग की साख पर बट्टा लगा दिया है। स्कूलों के कायाकल्प और मरम्मत के लिए सरकार द्वारा भेजे गए बजट को डकारने के लिए अधिकारियों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश रची। इस 28 लाख रुपये के घोटाले में कमिश्नर ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए दो मुख्य चेहरों को निलंबित कर दिया है।

इन दो अधिकारियों पर गिरी गाज: कौन हैं ये दोषी?
कमिश्नर की जांच रिपोर्ट में सात लोग मुख्य रूप से दोषी पाए गए थे। फिलहाल, दो पर सीधी कार्रवाई की गई है:

  • विनय मिश्रा (प्राचार्य, पीएमश्री स्कूल गुढ़): इन्होंने बिना काम पूरा हुए ही 'पूर्णता प्रमाण पत्र' जारी कर दिया था। इन्हें सस्पेंड कर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में अटैच किया गया है।
  • सुधाकर तिवारी (प्रभारी एपीसी, रमसा): इन्हें इस पूरे भ्रष्टाचार का 'मास्टरमाइंड' बताया जा रहा है। सुधाकर तिवारी ने ही बिना किसी भौतिक परीक्षण के भुगतान की फाइलें कमिश्नर तक बढ़ाई थीं। इन्हें अब जेडी (JD) ऑफिस में अटैच किया गया है।

घोटाले की मोडस ऑपरेंडी: कैसे हुआ सरकारी धन का बंदरबांट?
रीवा जिले को स्कूलों के मेंटेनेंस के लिए कुल 50 लाख रुपये की राशि मिली थी। जिले के छह स्कूलों में इस बजट का उपयोग होना था। जांच में सामने आया कि:

  • ठेकेदार ने स्कूलों में एक पैसे का काम नहीं किया और सीधे बिल डीईओ कार्यालय में लगा दिए।
  • अधिकारियों ने बिना साइट पर जाकर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किए ही भुगतान की मंजूरी दे दी।
  • प्राचार्यों के फर्जी हस्ताक्षर और झूठे प्रमाण पत्रों का सहारा लेकर सरकारी तिजोरी से 28 लाख रुपये निकाल लिए गए।

कार्रवाई अभी 'आधी-अधूरी': ये 4 रसूखदार अब भी रडार पर
जांच में कुल सात लोग दोषी थे, जिनमें से एक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। दो को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन चार नाम ऐसे हैं जिन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इनमें शामिल हैं:

  • रामराज मिश्रा (जिला शिक्षा अधिकारी)
  • पुष्पा पुसाम (लेखा अधिकारी)
  • नवीन श्रीवास्तव (तत्कालीन रमसा प्रभारी)

खैरा स्कूल के प्राचार्य
चर्चा है कि विभाग के कुछ उच्च अधिकारी लेखा अधिकारी पुष्पा पुसाम को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके कारण फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही है।

कमिश्नर की स्थिति 'सुदामा' जैसी: खुद की जांच में खुद ही फंसे?
रीवा संभाग के कमिश्नर की वर्तमान स्थिति की तुलना पूर्व डीईओ सुदामा लाल गुप्ता से की जा रही है। जैसे सुदामा लाल गुप्ता ने अनुकंपा नियुक्ति के फर्जीवाड़े की जांच खुद ही बिठाई थी और बाद में खुद भी उसमें उलझ गए थे, वैसा ही कुछ यहाँ भी नजर आ रहा है। कमिश्नर ने शिकायत मिलने पर जांच तो बिठा दी, लेकिन अब जब बड़े अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, तो पूरी कार्रवाई को अंजाम तक पहुँचाना एक चुनौती बन गया है।

पारदर्शिता की जरूरत
रीवा का यह रंगाई-पुताई घोटाला शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है। जब तक सभी छह दोषियों पर समान रूप से निलंबन की गाज नहीं गिरती, तब तक न्याय अधूरा ही रहेगा। जनता अब यह देख रही है कि क्या रसूखदार अधिकारी इस बार भी बच निकलेंगे या कमिश्नर अपनी निष्पक्षता साबित करेंगे।