खाकी पर दाग: 'गांजे' के नाम पर रीवा के व्यापारी को बंधक बनाने वाले पन्ना के पुलिसकर्मी लाइन अटैच, अब दर्ज हुई FIR : चारों आरोपी फरार

 

मड़ला थाना प्रभारी सहित 4 पर FIR: क्या है पूरा जबरन वसूली का मामला?

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से कानून के रखवालों द्वारा ही कानून की धज्जियां उड़ाने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस ही लुटेरी बन गई। पन्ना जिले के मड़ला थाने में पदस्थ थाना प्रभारी (TI) रचना पटेल समेत तीन पुलिसकर्मियों और उनके एक निजी सहयोगी के खिलाफ साजिश रचने, बंधक बनाने और रंगदारी वसूलने की धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस घटना ने पूरे मध्य प्रदेश पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया है। खाकी वर्दी की आड़ में चल रहे इस अवैध वसूली के रैकेट का भंडाफोड़ तब हुआ, जब पीड़ित व्यापारी ने हिम्मत दिखाकर मामले की लिखित शिकायत पन्ना की पुलिस अधीक्षक (SP) निवेदिता नायडू से की। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद एसपी ने कड़ा रुख अपनाते हुए पहले तो तीनों पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया और उसके बाद विभागीय जांच बैठाते हुए सीधे एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए। वर्तमान में चारों आरोपी पुलिस की गिरफ्तारी के डर से फरार हैं और उनकी तलाश में जगह-जगह दबिश दी जा रही है।

बागेश्वर धाम जा रहे रीवा के व्यापारी को कैसे जाल में फंसाया गया?
यह पूरी घटना 14 मई की दोपहर से शुरू होती है। विंध्य क्षेत्र के रीवा जिले के तरहटी गांव के रहने वाले 40 वर्षीय मोहनलाल सोनी पेशे से एक सर्राफा (सोने-चांदी) व्यापारी हैं। वे 14 मई की दोपहर करीब 1 बजे अपनी निजी कार से छतरपुर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बागेश्वर धाम के दर्शन के लिए निकले थे। शाम के करीब 5 बजे के आसपास उनकी गाड़ी पन्ना जिले के मड़ला गांव के नजदीक पहुंची थी। लंबा सफर होने के कारण मोहनलाल ने मड़ला के पास एक पेट्रोल पंप के सामने अपनी कार रोकी और उसे पार्क करने लगे।

इसी दौरान, सादे कपड़ों (सिविल ड्रेस) में दो अज्ञात युवक उनकी कार के पास आए। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में मोहनलाल को अपनी गाड़ी रोकने के लिए कहा। जब व्यापारी ने उनसे परिचय पूछा, तो उन्होंने खुद को पुलिस विभाग का कारिंदा बताया। इसके तुरंत बाद, उन युवकों ने मोहनलाल पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पास पुख्ता सूचना है कि इस कार में बड़े पैमाने पर 'गांजे' की तस्करी की जा रही है। अचानक लगे इस आरोप से सर्राफा व्यापारी सन्न रह गए। उन्होंने बार-बार कहा कि वे एक संभ्रांत व्यापारी हैं और उनका ऐसी किसी भी अवैध गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन आरोपियों ने उनकी एक न सुनी और जबरन कार के दरवाजे खुलवाकर तलाशी लेने का ढोंग शुरू कर दिया। कुछ ही देर में आरोपियों ने कार की सीट के नीचे से पहले से छिपाकर रखी गई एक काले रंग की पॉलिथीन निकाली और दावा किया कि इसमें गांजा है।

नकली गांजा और बंधक बनाने की इनसाइड स्टोरी: शराब दुकान के पीछे क्या हुआ?
कार से पॉलिथीन निकलते ही व्यापारी मोहनलाल सोनी बेहद डर गए। उन्हें समझ आ गया था कि उन्हें किसी गहरी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। जब उन्होंने पैकेट के बारे में पूरी तरह अनभिज्ञता जताई, तो सादे कपड़ों में आए एक युवक ने रौब झाड़ते हुए कहा, "ज्यादा चालाकी मत करो, यह मड़ला थाने के मुंशी रज्जाक खान हैं और मेरा नाम बृजेश यादव है, मैं यहीं पास की शराब दुकान पर काम करता हूँ। अगर जेल जाने से बचना है, तो चलो तुम्हारा मैटर यहीं रफा-दफा निपटाते हैं।"

इसके बाद दोनों आरोपी जबरन व्यापारी की ही कार में सवार हो गए और गाड़ी को आगे बढ़ाने को कहा। कुछ ही दूरी पर स्थित एक देसी-विदेशी शराब की दुकान के पास ले जाकर उन्होंने कार को रुकवा दिया। मोहनलाल के अनुसार, जैसे ही कार शराब दुकान के पास रुकी, वहां पहले से मौजूद खाकी वर्दी पहने एक पुलिसकर्मी आ गया, जिसकी नेम प्लेट पर 'रामशरण' लिखा हुआ था। अब आरोपियों की संख्या तीन हो चुकी थी। हेड कॉन्स्टेबल रज्जाक खान, कॉन्स्टेबल रामशरण और शराब दुकान के कर्मचारी बृजेश यादव ने मिलकर मोहनलाल को कार से उतारा और शराब दुकान के पीछे बने एक सुनसान हिस्से में ले गए। यहाँ व्यापारी को करीब दो घंटे तक अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया और उन्हें एनडीपीएस एक्ट (गांजा तस्करी) के तहत जेल भेजने और करियर बर्बाद करने की लगातार धमकियां दी गईं।

अपराध का घटनाक्रम:

  • 14 मई, दोपहर 1:00 बजे ──> रीवा से बागेश्वर धाम के लिए प्रस्थान
  • 14 मई, शाम 5:00 बजे  ──> मड़ला पेट्रोल पंप पर फर्जी गांजा प्लांट किया गया
  • 14 मई, शाम 5:30 बजे  ──> शराब दुकान के पीछे 2 घंटे तक बंधक बनाया गया
  • 14 मई, शाम 7:30 बजे  ──> 95 हजार रुपए वसूल कर पीड़ित को छोड़ा गया
  • 15 मई               ──> पन्ना एसपी निवेदिता नायडू से लिखित शिकायत

95 हजार की डील: ऑनलाइन ट्रांजैक्शन ने कैसे खोली पुलिसिया भ्रष्टाचार की पोल?
शराब दुकान के पीछे बने उस बंधक गृह में डरे-सहमे सर्राफा व्यापारी को छोड़ने के बदले कॉन्स्टेबल रामशरण ने साफ शब्दों में एक लाख रुपए की मांग रख दी। व्यापारी ने रोते हुए अपने परिवार और अपनी बेगुनाही की दुहाई दी। काफी मिन्नतें करने और हाथ-पैर जोड़ने के बाद, सौदा अंततः 95 हजार रुपए में तय हुआ।

व्यापारी मोहनलाल सोनी के पास उस समय उतनी बड़ी रकम नगद उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने अपने पास रखे 45,000 रुपए नगद आरोपियों के हवाले कर दिए। बची हुई 50,000 रुपए की राशि के लिए आरोपियों ने डिजिटल माध्यम का सहारा लिया। उन्होंने व्यापारी से अलग-अलग मोबाइल नंबरों और शराब दुकान के क्यूआर (QR) कोड पर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करवाए। यही ऑनलाइन ट्रांजैक्शन आगे चलकर इन भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के लिए सबसे बड़ा अकाट्य सबूत बन गया। पैसे पूरी तरह से अपने खातों में ट्रांसफर करवाने के बाद ही आरोपियों ने व्यापारी को छोड़ा। डरे हुए मोहनलाल वहां से सीधे रीवा अपने घर वापस लौट आए और अपने परिवार को आपबीती सुनाई।

पन्ना एसपी निवेदिता नायडू की बड़ी कार्रवाई: लाइन अटैच के बाद अब एफआईआर
रीवा पहुंचने के बाद व्यापारी ने कानून के वरिष्ठ अधिकारियों पर भरोसा जताया और 15 मई को पन्ना पहुंचकर जिला पुलिस अधीक्षक (SP) निवेदिता नायडू के समक्ष एक विस्तृत लिखित शिकायत दर्ज कराई। एसपी निवेदिता नायडू ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे अत्यंत गंभीरता से लिया। उन्होंने बिना वक्त गंवाए पूरे मामले की गोपनीय और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए।

जांच टीम ने जब घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, पीड़ित के बयान दर्ज किए और सबसे महत्वपूर्ण—उन बैंक खातों और क्यूआर कोड की जांच की जिनमें पैसे ट्रांसफर हुए थे, तो मड़ला थाना पुलिस की पूरी कहानी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। जांच में यह पूरी तरह प्रमाणित हो गया कि मड़ला थाना प्रभारी रचना पटेल के संरक्षण में ही उनके अधीनस्थ पुलिसकर्मी रज्जाक खान, रामशरण अहिरवार और शराब दुकान के कर्मचारी बृजेश यादव ने इस पूरी जबरन वसूली (Extortion) के नेटवर्क को अंजाम दिया था।

थाना प्रभारी रचना पटेल की भूमिका इस पूरी साजिश को रचने और अपने स्टाफ को शह देने में पाई गई। इस रिपोर्ट के आधार पर:

एसपी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच (Line Attached) कर दिया।
इसके बाद पन्ना पुलिस लाइन के सब इंस्पेक्टर रामकृष्ण पांडे की शिकायत पर मड़ला थाने में ही चारों आरोपियों के खिलाफ धारा 384 (जबरन वसूली), 120B (अपराधिक साजिश) और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई।
मामले की आगे की कमान और विवेचना एएसआई वृंदावन प्रजापति को सौंपी गई है, जो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश पुलिस में भ्रष्टाचार कैसे रोकें: जनता के अधिकार क्या हैं?
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि अगर कोई नागरिक सही तरीके से और हिम्मत के साथ अपनी आवाज उठाए, तो भ्रष्ट से भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई हो सकती है। आम जनता को यह जानना बेहद जरूरी है कि यदि कोई पुलिसकर्मी आपको किसी झूठे केस में फंसाने की धमकी देता है या अवैध रूप से पैसों की मांग करता है, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

हमेशा याद रखें कि सादे कपड़ों में आए किसी भी व्यक्ति को अपनी गाड़ी की तलाशी तब तक न लेने दें जब तक वह अपना वैध पहचान पत्र न दिखाए। अगर आपके साथ ऐसी कोई घटना घटती है, तो तुरंत उस बातचीत का ऑडियो या वीडियो रिकॉर्ड करने का प्रयास करें। डिजिटल ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड हमेशा सुरक्षित रखें। स्थानीय थाने की शिकायत सीधे जिले के पुलिस अधीक्षक (SP), आईजी (IG) या राज्य के लोकायुक्त और भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB) से करें। पन्ना एसपी द्वारा की गई यह त्वरित कार्रवाई समाज में यह संदेश देती है कि खाकी के भीतर छिपे अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।