'पीएम आवास भी बने, पट्टा भी मिला... अब कहां जाएं?' बारिश में मासूम बच्चों को गोद में लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे बधरी के 60 आदिवासी परिवार

 

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्यप्रदेश के रीवा जिले से गरीब और निर्धन परिवारों के सिर से छत छीनने का एक संवेदनशील मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर स्थित सेमरिया तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत लैन बधरी (ग्राम बधरी) में वर्षों से आबाद लगभग 60 परिवारों को प्रशासनिक कार्रवाई का डर सता रहा है।

हाल ही में सेमरिया तहसीलदार प्रशासनिक अमले के साथ बधरी गांव पहुंचे और वहां बने मकानों को हटाने के लिए प्रशासनिक नोटिस जारी कर दिया। अफ़सरों की ओर से ग्रामीणों को महज दो दिन के भीतर जमीन खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है। अचानक मिले इस बेदखली के आदेश के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया है और गरीब आदिवासी परिवार भारी मानसिक तनाव में आ गए हैं।

पट्टा और पीएम आवास होने का दावा: वर्षों से आबाद है 60 घरों की बस्ती
कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि वे सभी भूमिहीन और अत्यंत गरीब वर्ग से आते हैं। कई दशक पहले उनके पास खुद का कोई निजी भूखंड नहीं था, जिसके कारण वे बधरी गांव में स्थित सरकारी जमीन पर आशियाना बनाकर रहने लगे थे।

  • शासकीय पट्टा: ग्रामीणों का दावा है कि पूर्व में शासन द्वारा उन्हें इस भूमि पर रहने के लिए विधिवत आवासीय पट्टे प्रदान किए गए थे।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY): पट्टे के आधार पर ही सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री आवास योजना' के तहत उनके पक्के मकानों का निर्माण स्वीकृत हुआ था।
  • बुनियादी सुविधाएं: बस्ती में वे वर्षों से बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं और उनके पास पहचान से जुड़े तमाम प्रशासनिक दस्तावेज मौजूद हैं।

उद्योग के लिए भूमि आवंटन की चर्चा: बारिश के मौसम में बेघर होने का डर
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस जमीन पर उनके मकान बने हुए हैं, उस जमीन को जिला प्रशासन द्वारा उद्योग विभाग (Industrial Area) को आवंटित किए जाने की बात कही जा रही है। उद्योग स्थापित करने के उद्देश्य से ही अब इस पूरी बस्ती को खाली कराने की कवायद शुरू कर दी गई है।

ग्रामीणों का बड़ा सवाल: "अगर सरकार उद्योगों के विकास के लिए हमारी बस्ती को हटाना चाहती है, तो पहले हमारे पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। इस भरी बारिश के मौसम में, जब हर तरफ पानी भरा है, हम अपने छोटे-छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर आखिर कहाँ जाएंगे?"

मासूम बच्चों व महिलाओं संग कलेक्ट्रेट में गुहार: कलेक्टर से न्याय की उम्मीद
तहसीलदार के दो दिवसीय अल्टीमेटम से घबराए बधरी गांव के दर्जनों महिला, पुरुष और बुजुर्ग अपने दूधमुंहे बच्चों को गोद में लिए बुधवार को रीवा कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित होकर जिला प्रशासन और कलेक्टर के समक्ष अपनी व्यथा रखी।

ग्रामीणों ने मांग की है कि:

  • उन्हें बेघर करने की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए।
  • यदि जमीन शासकीय आवश्यकता के लिए ली भी जा रही है, तो उन्हें पहले किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर विस्थापित कर पक्का मकान और पट्टा दिया जाए।
  • बारिश के सीजन में किसी भी तरह की बुलडोजर या बेदखली की कार्रवाई न की जाए।
  • पीड़ितों को उम्मीद है कि जिला कलेक्टर इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सेमरिया तहसीलदार के इस फरमान पर रोक लगाएंगे।