लाचार विधवा की पेंशन पर नीयत खराब : बाप मरा, परिवार कर्ज में डूबा और बाबू को चाहिए थी 'दलाली'! रीवा लोकायुक्त ने उतारी रिश्वतखोर की सारी हेकड़ी
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। विंध्य क्षेत्र में शासकीय कार्यालयों के भीतर पैर पसार चुके भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त पुलिस ने एक बार फिर करारी चोट की है। रीवा जिले के जल संसाधन विभाग में खुलेआम चल रही अवैध वसूली पर शिकंजा कसते हुए लोकायुक्त की विशेष टीम ने बाणसागर कॉलोनी स्थित दफ्तर में अचानक दबिश दी। यहाँ तैनात एक बेशर्म और लालची बाबू को पीड़ित से नकद रकम ऐंठते हुए रंगे हाथों दबोच लिया गया। इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
पिता के निधन के बाद परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
यह पूरा मामला रीवा जिले की त्योंथर तहसील के ग्राम चुनरी (पोस्ट सोहागी) का है। गाँव के रहने वाले मोनू नापित के पिता स्वर्गीय रामसुचित नापित जल संसाधन विभाग के उप संभाग त्योंथर में बतौर चौकीदार तैनात थे। मार्च 2026 में सेवाकाल के दौरान ही उनका अकस्मात निधन हो गया। सिर से पिता का साया उठने के बाद परिवार पर आर्थिक और मानसिक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर चलाने और पुराने कर्ज को चुकाने के लिए मोनू अपनी मां की पारिवारिक पेंशन शुरू कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हो गया।
पेंशन और अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर घूसखोरी का नंगा नाच
पीड़ित जब मां की पेंशन की फाइल पास कराने बाणसागर कॉलोनी स्थित जल संसाधन विभाग के दफ्तर पहुँचा, तो वहाँ तैनात बाबू रामबरण मिश्रा (निवासी जनकहाई, तहसील जवा) ने मदद करने के बजाय दलाली मांगनी शुरू कर दी।
- पेंशन फाइल के लिए मांग: बाबू ने पेंशन स्वीकृत करने के नाम पर कुल 12 हजार रुपये की घूस तय कर दी।
- मजबूरी पर भी नहीं पसीजा दिल: पीड़ित ने बाबू के सामने हाथ-पांव जोड़े और बताया कि उसके ऊपर दो-दो कर्ज चल रहे हैं, लेकिन ज़मीर बेच चुके इस बाबू का दिल नहीं पसीजा।
- अनुकंपा नियुक्ति का सौदा: पेंशन के अलावा जब पीड़ित ने पिता की जगह अनुकंपा नियुक्ति की बात की, तो बाबू ने उसके लिए भी 35 हजार रुपये की अलग से डिमांड रख दी।
लोकायुक्त का जाल और रंगे हाथों पकड़ा गया रिश्वतखोर बाबू
बाबू की लगातार बढ़ती प्रताड़ना से परेशान होकर पीड़ित ने हिम्मत जुटाई और लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक रीवा से शिकायत कर दी। लोकायुक्त की टीम ने गोपनीय तरीके से शिकायत का सत्यापन कराया।
- सत्यापन का खेल: सत्यापन के दौरान बाबू ने पहले ही 5 हजार रुपये डकार लिए थे और फिर सत्यापन प्रक्रिया के दौरान 4 हजार रुपये और ऐंठ लिए।
- ट्रैप की कार्रवाई: शिकायत सही पाए जाने पर लोकायुक्त टीम ने बाणसागर कॉलोनी कार्यालय में जाल बिछाया। जैसे ही पीड़ित ने बकाया 3 हजार रुपये की अंतिम किश्त बाबू रामबरण मिश्रा को दी, टीम ने उसे रंगे हाथों धर दबोचा। केमिकल टेस्ट में बाबू के हाथ रंगे पाए गए, जिससे उसकी चालाकी धरी की धरी रह गई।
लगातार दूसरे दिन ताबड़तोड़ कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप
रीवा लोकायुक्त की इस आक्रामक कार्रवाई से रिश्वतखोरों के होश उड़े हुए हैं। लोकायुक्त टीम ने दो दिनों के भीतर यह दूसरी बड़ी सफलता हासिल की है। इससे पहले शनिवार को वन विभाग के वनपाल दिनेश कुमार को स्वर्णलोक ढाबा में 78 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था, जिसने एक जब्त ट्रक को छोड़ने और जुर्माना घटाने के नाम पर 2 लाख रुपये की मांग की थी। इसके ठीक अगले ही दिन जल संसाधन विभाग के इस लालची बाबू को धर दबोचा गया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज
लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी बाबू रामबरण मिश्रा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी करने के साथ ही विभाग को आरोपी के निलंबन और विभागीय जांच के लिए लिखा गया है।